Friday, April 6, 2007

Changing Dynamics





The Silent Waters of Time Flow & keep moving forward

US --







The SHAH Family

10th March 2007






( Sopan & Monica' s wedding ) @ Phoenix, Arizona USA

My Babies ;-)

Sindur with her son Noah
Sopan & Sindur
Noah
Sopan ;-)
Noah ;-)

Epcot Center FL






A visit to NASA -- FL





Orlando, Florida






Noah-- Enjoying Baseball with Nana !! ;--))

Noah
Deepak, Noahy & Brian
Sopan & Noah @ Wriggley's Stadium Chicago
Noah & Sindur watching the Ball Game
Enjoying Baseball with Nana !! ;--))

Some Rare B& W Images

Famous Chhayawadee Poet Sree Sumitra Nandan Pant ji leading ,
poet Sree Narendra Sharma
for his marriage to Susheela Godiwala May 12 th 1947, Baombay, INDIA

Smt. Susheela Godiwala before her marriage an aspiring artist learning Fine Arts @ Haldenker Institute, @ Bombay, INDIA

An Old B/ & W pic of India's Legendry Songstress Sree Lata Mangesker ji
On 60th birth day of poet Late Pandit Narendra ji Sharma : Sitting in front row are :~~

Famous Hindi Poet Sree Hariwansh Rai " Bachchan ji " ( father of Sree Amitabh Bachchanji )

Dogree poetess Smt Padma Sachdev, Kum Lata Mangeshker ji, Smt Susheela Sharma & Late Smt. Tara Shah ( my mother in law )

Place : Bombay, INDIA

पीढी दर पीढी ....

५९४ , १९ वाँ रास्ता खार बम्बई,का घर
मैँ और दीपक/ कोज़ुमल, मेक्सिको,जाते हुए क्रुज़ शीप मेँ
अम्मा / श्रीमती सुशीला नरेन्द्र शर्मा,
श्रीमती कपिला गुलाबदास गोदीवाला , महिला कोँग्रेस पार्टी की अध्यक्षा / भाषण करते हुए
श्री गुलाबदास गोदीवाला श्री गुलाबदास गोदीवाला मोटा बा, उनकी माताजी, मेरी मेरी मातामह, पडनानीजी के साथ

बिटिया सिँदूर की गोद भराई की रस्म करते : प्रसन्न परिवार






Family Time 2005

Me & Brian / our son in law & Sopan our Son sitting on a Sofa
Me in Down Town Cinti shop after & Christmas Sale
Deepak, Me, Sinnu ( expecting her Baby ) & Bri
Sopan
Mommy -G & Daddy -Dee !! ( as Bri likes to say :)


चित्र को लिया है स्वर साम्राज्ञी सुश्री लता मँगेशकरजी ने चित्र को लिया है स्वर साम्राज्ञी सुश्री लता मँगेशकरजी ने

मैँ / लावण्या / " पद्म " मेरी ससुराल मेँ मेरे श्वसुर जी के कमरे मेँ १९७४ १२ नवम्बर
शाम को पापाजी की ओर से प्रीति भोज के अवसर पर जाते हुए

मैँ, दीपक और ३ साल की बिटिया सिँदूर - खार,बम्बई मेँ १९८१ दीपक और ३ साल की बिटिया सिँदूर - खार,बम्बई मेँ १९८१









2 - ब्याह

मिसेज मुन्नी धवन,गुलाबी साडी मेँ, दीपक, मैँ, प्रीतम आँटी और श्रीमती कृश्णा राजकपूर
दीपक, मेरे नानाजी, श्री गुलाबदास गोदीवाला, बा, कपिला और मैँ
पूज्य पापाजी व अम्मा पाणि-ग्रहण सँस्कार करवाते हुए, कन्यादान के अवसर पर, सप्तपदी के पवित्रव मँगलकारी सात फेरे लेते हुए,
मैँ व दीपक - पीछे बडी ननदजी स्व.श्रीमती चारुमती रमेश मेहता,

मैँ व दीपक , अम्मा, बकुल जीजाजी,स्व. वासवी,पापा, बाँधवी, मेरी छोटी बहन और छोटा बाई परितोष, वासवी व बकुल जी के विवाह के समारोह पर - जुहू, सेँटोर होटेल के लोन पर स्टेज पर खडे हुए

दीसम्बर ९, १९७४

दीपक और लावण्या

लावण्या

" बाबुल , छूट चला तेरा अँगना ".
..मेरे पापाजी के साथ, अँतिम बार, कन्या रुप मेँ, हमारे घर की गेलेरी मेँ खडे हुए - मैँ और पापाजी, पँडित नरेन्द्र शर्मा
मेरी खास सहेली, सुधा त्रिवेदी, नीली साडी मेँ, मैँ दुल्हन के भेस मेँ , वरमाला लिये और बडी बहन स्व. वासवी बकुल मोदी गुलाबी साडी मेँ, दुल्हे राजा = दीपक, का स्वागत करतीँ हुईँ श्रीमती सुशीला नरेन्द्र शर्मा, राजेन् गुलाबदास गोदीवाला के साथ
९ नवम्बर, १९७४ दीपक और लावण्या के ब्याह के अवसर पर / साँताक्रुज,बम्बई, आर्य समाज मँदिर

यादोँ के झरोखोँ से : ~~

मैँ और दीपक, ५९४, पापा और अब परितोष के घर के खुले बारामदे मेँ खडे हुए -बम्बई शहर/ भारत
अमर गायक श्री मुकेशचँद्र माथुर के साथ, मैँ, १९७५ / लोस -अन्जिलीस , केलीफोर्नीया, यु.एस्. ए.
स्वर साम्राज्ञी सुश्री लता मँगेशकरजी का अमेरीका के हवाई अड्डे पर स्वागत करते हुए - मैँ /१९७६
दीपक, पूज्य पापाजी से आशीर्वाद लेते हुए- अमरीका एम्.बी.ए की पढाई के लिये जाते हुए -
चित्र मे अम्मा सुशीला, परितोष व मैँ भी हैँ
स्वर साम्राज्ञी सुश्री लता मँगेशकरजी व मैँ

वो कोलेज के दिन:

वो कोलेज के दिन:
हमेँ भी याद है वो कोलेज के दिन
हमेँ भी याद है वो कोलेज का केन्टीन,
वो लडकोँ का कोलेज के दरवाजे पे,
हमारा बेसब्री से हमारा इँतजार करना!
वो लहराती हुई ओढनी का, सरसरा के फिसलना!
और हमारा बदन को छुपाना -छिपाना !
किसीकी निगाहोँ मेँ शोला भडकना,
किसीकी सीटीयोँ से वो रँगत बदलना!
हमेँ भी याद आता है, वो गुजरा जमाना,
वो तेज तेज बारिश मेँ कपडोँ का चिपकना,
जुहू बीच की तनहाएयोँ मेँ वो मौजोँ का उछलना!
किसी सहेली की कोमल हथेली का पकडना !
वो खिलखिलाती हँसी से, दिल का बहलना -
और, थरथराते लब का वो जादू टोना !
वो साहिल के शिकवे, वो कश्ती के आँसू-
कहाँ किसका मिलना, किसका बिछडना!
वो माँ की दुआ, या पापा का लाड हम पे,
वो उनकी निशानी, ये आँखोँ मेँ पानी !
कहाँ हैँ वो नगमे, वो भोली सी बातेँ ?
जिन्हेँ हम कहा करते थे, "मीठी'ज़ बातेँ"
सपना हो गईँ हैँ वो बातेँ पुरानी,
कहानी मेँ अब है, "एक राजा, एक रानी "
( मीठी'ज़ बातेँ क्यूँकि मैँ मीठीबाई कोलिज, जुहूस्कीम,विले पार्ले मेँ जो कोलिज है वहाँ पढती थी )
---लावण्या जुलाई, २, २००१