Sunday, October 18, 2009

श्री राज कपूर जी : भारतीय चलचित्र निर्माण , " BOLLYWOOD " एक विशाल व्यवसाय है [ कई सारी दुर्लभ तस्वीरें ]


इस चित्र में, रितू के विवाह से २ दिवस पहले, आयोजित " संगीत संध्या " के अवसर पर रीतू के लिए, मेरी अम्मा, श्रीमती सुशीला नरेंद्र शर्मा ने, हमारी बगिया से ,चमेली , जूही और नन्हे गुलाब की कलियों के बाजू बंद, टीका
 कर्ण ~ फूल, गलहार, हाथ के गजरे, बनाकर, हल्की केसरीया ओढ़नी से सर ढके, रितू को सजाया था तब वह अपूर्व देव कन्या सी सुन्दर दिखीं थीं। 
 उस वक्त की यह छवि है।
पास ही रितू और रिशी कपूर ( जो रीतू के छोटे भाई और रणबीर कपूर के पिता हैं उन दोनों से छोटी बहन रीमा भी एक दम सटकर बैठी हुई, अपनी बड़ी बहन रितू को निहारतीं हुईं दीखलाई दे रही है। 

चलिए, आज आपको हिंदी सिने संसार से जुड़े प्रसिध्ध कपूर परिवार की यादों की झलकियाँ दीखलाऊँ................यहाँ कई चित्र , नेट से उपलब्ध हुए हैं। 
जिन्हें आप अवश्य पसंद करेंगें --( आभार गुगल बाबा जी का :)
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फिल्मी दुनिया , एक विशिष्ट प्रकारकी दुनिया है ।
-- यह एक आभासी सच है ।


यहां, कथा, कहानी और गीतों को, संगीत से सजाकर, आपके लिए ३ घंटों का सफ़र ,जहां आप, कुर्सी पर, सोफे पर बैठे हुए या खड़े होकर भी, एक कथा के पात्रों से रूबरू होते हैं। फिल्मों को बड़े परिश्रम और मनोयोग से, तैयार किया जाता है।
 परदे के पीछे, कई लोग काम करते हैं जिसे " फिल्म यूनिट " कहा जाता है। 
परदे पर नायक, नायिका , खलनायक, खलनायिका, सह अभिनेत्री , सहकलाकार जो,दादा दादी , भाई बहन , बुआ , भतीजी और परिवार , मित्र , पडौसी , साथ काम करनेवाले, दफ्तर के सहकर्मी, मालिक - पैसा ब्याज पर देनेवाला सेठ साहूकार , किसान - मजदूर , क्लब में नाचनेवाली औरत , या बाजारू स्त्री या खूनी दरिन्दे और क्लर्क से लेकर , नेता - और आला -- अफसर तक या ऐसे ही अनगिनत पात्रों के बीच चलती, आम जीवन की छाया - सी , कथा , ही असल में, फिल्म के केंद्र  में अपनी प्रधान भूमिका ले लेती है - एक आभासी कथा को परदे पर , फ़िल्म के माध्यम से सजीव रूप देने के लिए , फ़िल्म यूनिट काम करने लगती है ।
       लेख़क और संवाद लेखक , मिलकर इस पटकथा को तैयार करते हैं ।
भारतीय फिल्मे कई सारे गीत लिए बनायी जातीं हैं ।
गीतकार, इन फिल्मों में, प्रसंग अनुरूप गीत लिखतें हैं ।
संगीतकार चलचित्र के हर द्रश्य को एक तरह का बेक ग्राउंड देते हुए, पार्श्व संगीत तैयार करता है और कथानक के साथ चल रहे गीतों को भी संगीत से , संवारते हुए, सजीव करता है। छायांकन, कैमरे से, फोटोग्राफर करता है ।
निर्देशक इन सभी को मार्गदर्शन देते हुए, फिल्म तैयार करता है औरफ़िल्म निर्माता निर्माण के लिए, अपना धन लगाता है ।
- फिल्म बन जाने पर, वितरक या Distributor = डिस्ट्रीब्यूटर ,
फिल्म को ( दुनियाभर में प्रदशित करने के लिए ) खरीद कर , बेचते हैं। 
हम और आप जैसी, आम - जनता , तब ये फिल्म देखती है।
या चित्र घर में या थिएटर्स में या फ़िर डी वी डी जब बाज़ारों में आ जातीं हैं तब घर पर लाकर भी हम फिल्मों को देख लेते हैं । कई सारे व्यवसाय इन से, इंडिरेक्टली जुड़े हुए हैं । संगीत सीडी, डीवीडी ,की खपत भी करोड़ों में होतीं हैं ।
अच्छी लगे तो फिल्म हिट और बहुत बढिया फिल्म सुपर हिट !
या कदाचित, डिब्बे में, बंद रहने के लिए, उतार ली जाती है और फ़ैल हो जाती है या पिट जाती है। 

भारत विश्व का सर्वाधित फिल्म उत्पादक देश है। इस मामले में, भारतीय फ़िल्म व्यवसाय ने दूसरे नंबर पर आनेवाले, होलीवुड को भी पीछे छोड़ दिया है ।
फ़िल्म, आम जनता के लिए, एक सस्ता और सुलभ मनोरंजन है । इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराना,यही हिन्दी व प्रादेशिक भाषाओं में बन ने वालीं फिल्म निर्माण का, मुख्य लक्ष्य है। धन उपार्जन इस का मूलभूत कारन भी है ।
ये एक बहुआयामी और अत्यन्त विशाल व्यवसाय है।
बोम्बे या बम्बई नामक शहर में , भारतीय सिने संसार प्रमुखत: विद्यमान हैबंबई का नामकरण " मुम्बा देवी " से अब " मुम्बई " कर दिया गया है । बोम्बे नगरी में बसी यह इंडस्त्री इसी कारण से , बोलीवुडके नाम से , जग प्रसिध्ध हो गयी है ।
City named " Bombay " now known as " MUMBAI "
is the capital of Film Industry hence it is also known ,
the world over as " BOLLYWOOD " --
Thus, a new word has been coined
& accepted which is quite similer to " Hollywood"
Hollywood is in WEST mainly, situated in the Golden Sun Shine State ,in North America's California State , in the city of Los ~ Angeles. 
 बहुत बड़ी तादाद में, लोग , BOLLYWOOD " = भारतीय चलचित्र निर्माण
संस्था में कार्यरत हैं और भारत सरकार, फिल्म निर्माण पर लगे कर से आमदनी से, टैक्स से , भरपूर आय प्राप्त करती है ।
भारत में, क्रिकेट के साथ, फिल्मे ही शायद सबसे ज्यादा लोकप्रिय विधा है। 
फिल्म का प्रथम प्रदर्शन, माने प्रीमियर, फिल्म फेस्टिवल, अवार्ड्स ,
ये भी फिल्मों के ही बाय - प्रोडक्ट्स हैं । ये भी, इस विशाल व्यवसाय के विभिन्न पहलू हैं और भी कई बारीक बातें हैं.................. 
जिनकी चर्चा, फिर कभी ............

श्रीमान राज कपूर साहब, भारतीय फिल्म उद्योग के बेहद लोकप्रिय ,
कई किरदार को सफलता से जीते हुए , दुनियाभर में प्रसिद्धी प्राप्त , जगमगाते नक्षत्र हैं। " राज साब " के प्यारभरे संबोधन से पुकारे जानेवाले राज कपूर,
' कपूर खानदान ' के यशस्वी स्तम्भ हैं । फिल्म तथा रंगमंच के कलाकार, अग्रज श्री पृथ्वी राज कपूर जी व् उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रमादेवी ( जिन्हें हम सब " चाईजी " पुकारा करते थे ) उनके सबसे बड़े पुत्र हैं राज साब !
मंझले हैं श्री शम्मी कपूर जी और सबसे छोटे भाई हैं श्री शशि कपूर साहब ।
यहां नीचे के चित्र में देखिये , जनाब शम्मी कपूर, अपने फिल्मी किरदार के लिए मेक - अप करवा रहे हैं ।" पंढरी जूकर " यहां इनके मेक - अप मेन हैं। 
कुर्सी पर बैठे हुए हैं शम्मी कपूर !! तैयार होकर, उठते ही, किरदार को अपनाकर वे बन जायेंगें कोई नये शख्श :) एक नया किरदार जीवित हो जाएगा और एक फ़िल्म बन कर तैयार हो जायेगी ।


इस चित्र में,
राज जी, गायिका गीता दत्त जी तथा लता दी से, गीत संयोजन के मौके पर, परामर्श करते हुए दीखलाई दे रहे हैं । तीनों का ध्यान गीत पर केन्द्रीत है।
राज जी ना सिर्फ मुकेश जी की आवाज़ से थे, वे गाते भी थे बेहद बढिया और हर तरह के इन्स्त्रुमेंट्स बजा लेते थे। एक बार वे, कश्मीर गए थे। वहां माटी की हांडी पर, संगीत बजाते कलाकार से, चन्द पलों में , वह बजाना सीख लिया और रात देर तक बजाते रहे.....................
नीचे वाले चित्र में, राज साब के साथ हैं उनकी पत्नी, कृष्णा भाभी जी और भारतीय फिल्म जगत के मशहूर और बेजोड़ नायक : दिलीप कुमार उर्फ़ युसूफ खान साहब ! फिल्म नायिका पत्नी सायरा के संग

राज जी को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भारत सरकार ने सम्मानित किया तब वे स्टेज परजाने की स्थिति में नहीं थे. तब राष्ट्रपति वेंकटरमण जी नीचे उतर आये और राज साब को शोल उढाई और ट्रोफी प्रदान की  उस वक्त की तस्वीर ! ना जाने हम लोग क्यूं ऐसा करते हैं ? अकसर व्यक्ति की तारीफ़ करने में बहुत ज्यादा विलंब करते हैं :-(
श्री राज कपूर जी की दुसरे नंबर पर संतान है रीतू - वह केसरी साडी पहने हुए, उस वक्त प्रधान मंत्री पद पर आसीन, हिन्दी के प्रसिद्ध कवि, श्री अटलबिहारी बाजपेयी जी, के साथ हैं। अपने चाचा शम्मी कपूर, कलाकार विनोद खन्ना तथा रीतू जी के उद्योगपति - पतिदेव श्री राजन नंदा जी के संग राज कपूरजी की स्मृति में जो पुस्तक, प्रकाशितकी गयी है, उसी की १ प्रति देते हुए -
भारत सरकार ने भारतीय डाक टिकट जारी कर, जोकर के पात्र को, फिल्म " मेरा नाम जोकर " से अमर करनेवाले, राज साब की यादों को सम्मान दिया है
सुनिए ये गीत
" जीना यहां, मरना यहां ,
इसके सिवा जाना कहाँ ?

अपने यहीं दोनों जहां, इसके सिवा जाना कहाँ ? "
http://www.youtube.com/watch?v=TpK8hgcnyFk
आज तलक, मैंने जितनी भी स्त्रियाँ देखीं हैं, उन सभी में, ( देस और परदेस मिलाकर :) रीतू , ही सबसे सुन्दर महिला मुझे लगीं हैं । ( युवावस्था की छवि की बात कर रही हूँ । ) रीतू का अत्यंत शालीन, सौम्य, सुन्दर , सुसभ्य , ( कहें तो गौ जैसी ) भारतीय बिटिया का जीता जागता स्वरूप, आज भी मन को लुभाता है ।


अपने विवाह के बाद, रीतू ने, सफलतम बीमा एजेंट बनकर, सभीको आश्चर्यचकित कर दिया। 
पुत्री नताशा और पुत्र निखि, रीतू और राजन नंदा जी की, २ संतान हैं। 
नताशा के नाम पर भी एक कंपनी रीतू ने आरम्भ की और उसे सफल किया है ।
नताशा आर्ट गैलरी भी है और निखिल, नंदा परिवार के उद्योग से जुड़े हैं ।
अमरीका में व्होर्टन विश्वविध्यालय से, उपाधि प्राप्त, निखिल नंदा,
महानायक (बीग - बी ) अमिताभ व जया जी के दामाद हैं ।
निखिल, श्वेताम्बरा , अमिताभ " बच्चन " के , पति देव हैं और " नव्य नवेली " व अगस्त्य के पिता भी हैं
रीतू जी, एक ममतामयी माँ और समर्पित पुत्री के दायित्त्वों को अभूतपूर्व सफलता से जीती रहीं हैं और भारतीय स्त्री की गरिमा की जीती - जागती मिसाल हैं !
मेरी यादों में रीतू के अति भव्य विवाह की कई बातें, आज भी सजीव हैं। 
ऐसी शादी आज तक देखी नहीं ! यहां नीचे के चित्र में, श्री राजन नंदा व रीतू दुल्हा दुल्हन के भेस में देख्लाई दे रहे हैं ।
....
बाबा रे ! क्या क्या नहीं देखा था वहां !
चारों तरफ़ एक नवीन कार्यक्रम जारी था शादी की रात ....एक और था ,
भारत कोकीला, भक्तगायिका, MS सुब्बालक्षमी जी का अद्`भुत गायन !
तो दूसरी ओर बल्ले बल्ले के स्वर उठ रहे थे जहाँ, पंजाब से आये, मशहूर , भांगडा ग्रुप का एक धमाकेदार डांस जारी था !! 
एक तरफ हेमा मालिनी नामक ( नई हिरोइन का ) भारत नाट्यम नृत्य हो रहा था !
रोमेनिया से आयी, एक परदेसी नृत्यांगना का कैबरे भी हुआ था जिसे बंगाल से आये, श्री सत्यजीत रे और मेरे पापा जी ने, उपेक्षित भाव से, पीठ किये,
अपना वार्तालाप जारी रखा था, उसकी भी स्मृति शेष है :-)

बाराती समुदाय, दुनियाभर के हर प्रदेश से, मजे लूटने आ पहुंचे थे । वर और कन्या पक्ष ने मिलकर जश्न की रात, खूब दावत और मिलना जुलना, 
मौज - मस्ती का आनंद , बेहतरीन खाना पीना, शैम्पेन, की अविरल धारा और वेज, नॉन वेज और चाईनीज़ , एक से बढ़कर एक, खाने की आइटम, साथ में एक तरफ़ ,पसीने से लत - पथ, मोटी ताज़ी पंजाबन " तारी " नाम की एक महिला ( जो अकसर भाभी जी के यहाँ दावतों में तंदूरी रोटी बनाती दीख जाती थी ) का , तंदूर से, गर्मागर्म सींकीं भरवां तंदूरी रोटियाँ निकालना....................ये भी जारी था जो भुलाए नहीं भूलता !
कैसा विस्मयकारी द्रश्य लगा था वह .................आज तक याद है मुझे !
फिल्मी दुनिया या आभासी जगत के पीछे, असली इंसान भी रहते हैं। 
उनकी अपनी जिंदगानी होतीं हैं। 
प्यार और समर्पण और बिछोह के किस्से होते हैं। 
जो परदे पर हम देखते हैं उसमे, किसी के जीवन का सच छिपा होता है। 
हर कथा में, शोलों में दबी ढँकी, कोइ चिंगारी भी अवश्य होती है। 
अगर चित्रपट का आनंद लेना हो तब, सिर्फ ३ घंटे और कुछ सम्पति का खर्च कर,मनोरंजन का मज़ा लीजिये -- फिर, आगे बढ़ जाइए ..इसी में सुख है। 
बाकी, गडे मुर्दे उखाड कर, क्या लाभ ?
यहां, सह कलाकार, राज और नर्गिस जी सहज मुद्रा में  -
आज भी इनके द्वारा अभिनीत गीत, सबसे ज्यादा पसंदीदा गीत - या कहें तो 
 " सदाबहार - गीत " कहलाते हैं और जन मानस को आज भी लुभाते हैं । 
इन दोनों की रोमांटिक जोड़ी ने सफलता के नये पैमाने कायम किये हैं ।
अब इस नीचे वाले चित्र में, राज कपूर एक वत्सल पिता की छवि में दीखलाई दे रहे हैं ।अपनी युवा बेटी रितू के गाल चूमकर आर्शीवाद देते हुए , यही छवि मुझे आज भी प्रभावित करती है।
एक और वाक़या सुनाऊं -
रीतू की शादी की अगली रात थी ।
सारे लोग, समधियों की ओर से दी गयी " संगीत संध्या " में शामिल होने  गए हुए थे। मैं, अस्वस्थ थी, तो नहीं गयी !
मैं और रितू, उनके घर के खुले बागीचे में , टहलने लगे। 
वहाँ बाग़ के किनारे किनारे, आसपास ऊंची बेंत पर सजाये, कई रंगों के बिजली के लट्टू - बल्ब जगमगा रहे थे ।
मैंने कहा, " मुझे नीली रोशनी लिए बल्ब ही सबसे ज्यादा पसंद आये "
और रीतू ने किसी को आदेश दिया और सिर्फ नीले लट्टूओं को रखने का आग्रह किया।
अगले दिन विवाह की संध्या को, सिर्फ़ नीली रोशनी बिखेरते रोशनी के लट्टू ही जले थे ये भी याद है ।
फिर, शशि कपूर जी पधारे और हम लोग घर के भीतर चले गए थे ....
बीस्तर में सोने की तैयारी कर ही रहे थे के राज पापा आ गए और कहा,
" आज तो मुकेश्चंदर ने मुझे रूला दिया बेटे ..सुनो , ये बिदाई का गीत उसने गाया है तेरे लिए ...
" लाडली मेरे नाजों की पाली, तेरी डोली चली, मोतियोंवाली " ...
और राज अंकल ने यह गीत गाना शुरू किया ...
काश, उस वक्त , इसे रिकॉर्ड कर लिया जाता !!
........
पर यह छवि तो एक पिता की है, जिसे, हम सिर्फ महसूस करें .............
मुकेश जी की बड़ी पुत्री का ब्याह भी होने ही वाला था और उसका नाम भी था रीता / Rita ...और पुत्री के विदाई का गीत गाकर, मुकेश जी अस्वस्थ हो गए थे  ये सब , राज साब ने हमें , विवाह की पूर्व रात्रि को बतलाया था ।
गीत हसरत जयपुरी जी ने लिखा और इस गीत की ४ लाइन ,
" सत्यम शिवम् सुंदरम " फिल्म में, नायिका, जीनत अमन की शादी के प्रसंग में
राज जी ने रखीं हैं । रीतू के लिए तैयार किया गया पूरा गीत प्राइवेट गीत है और बहुत मार्मिक है। 
२००९ की इस पावन दीपावली पर उपस्थित गणमान्य साहित्यकार व साथीगण,
आप सभी को पुन: दीपावली पर नमन तथा मंगल कामनाएं प्रेषित करते अपार हर्ष है। 
खूब जगमगाई इस वर्ष " दीपावली "
आपसी मित्रता की यह ज्योति , भेदभाव शत्रुता तथा कटुता का कालिख मिटाकर ,वास्तव में , प्रकाश फैलाए यही कामना है। 

आप सभी ने मेरे जाल घर पर पधार कर, आत्मीयता से ओत- प्रोत टिप्पणियाँ रखीं हैं उनके लिए हार्दिक आभार कहती हूँ ...जो आते हैं, पढ़ते हैं .................परंतु टिप्पणी नहीं करते, उन्हें भी मेरे अभिवादन ...
हो सके तो, अपने मन में आयी प्रतिक्रया भी लिखें ..
मेरा जालघर आपका भी है। 
अनुज श्री पंकज भाई जी, आपके सुझाव, ध्यान से सुन रही हूँ :)
देखिये भाई श्री पंकज सुबीर जी का ब्लॉग
http://www.subeerin.blogspot.com/
ये प्रविष्टी भी , संस्मरण की एक कड़ी स्वरूप लिख रही हूँ ....
धन्यवाद ...शुक्रिया ....शुभम भवति ..
- लावण्या -


Tuesday, October 13, 2009

पिछले दिनों -- क्या क्या हुआ ?

भारतीय प्रोग्राम , अकसर , हिन्दू मंदिरों में या फिर कुछ भारतीय संस्थाओं द्वारा मिलजुल कर आयोजित किये जाते हैं -

हमारे शहर में भी इसी तरह का आयोजन हुआ जहां ये कन्याएं भूमि पर बैठकर ,

शाम का भोजन खा रहीं हैं जिसे तैयार किया कुछ भारतीय माताओं ने ....

इन बच्चियोंने भारतीय और अमरीकी National Anthem गीत भी गाये --

सप्ताहांत में , आर्ट फेस्टिवल भी घूमना हुआ था -- जहां नज़र यहां भी पडी -

CANNIE COUTURE - दूकान थी कुतों के फेशन ( जिसे कुटुर भी कहते हैं ) पर आधारित --

और हंसी आयी --

कमाल है ये देश और उसकी धन कमाने की नित नयी ऊर्जा ...................

पिछले दिनों भाई श्री सुरेन्द्र नाथ तिवारी जी उनकी पत्नी सहित हमारेशहर भी पधारे -
राम चरित मानस के चुने हुए मोती पिरोकर आख्यान दिया जिसमे बाबा तुलसी के दिए सन्देश को ,
आज के समय के अनुरूप , किस तरह हम लें , उस पर उन्होंने बहुत सुन्दर सन्दर्भ देकर ,
मानस के दोहे , उद्धरण के तौर पर सुनाये,

" दैहिक दैविक भौतिक तापा , राम राज्य नहीं काहू ब्यापा

सब नर करहिं परस्पर प्रीति , चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति

अल्प मृतु नहें कवनु पीरा, सब सुन्दर सब विरूज सरीरा

नहीं दरिद्र कोऊ दुखी ना दीना , नहीं कोऊ अवध ना लक्षण हीना

सब गुनग्य पण्डित सब ज्ञानी, सब कृतज्ञ नहीं कपट सयानी "

हम भी बाबा तुलसी दास जी के अमोघ आशिष लेते हुए दीप पर्व का स्वागत करें

प्रखर कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी की काव्य पंक्तियाँ भी उन्हें कंठस्थ हैं वे भी ऊर्जापूर्ण स्वर में सुनाईं तो श्रोतागण प्रसन्न हो गए और इस चित्र में वे लेप टॉप द्वारा , प्रेजेंटेशन सेट करते हुए , दीखलाई दे रहे हैं --

भाई श्री सुरेन्द्र नाथ तिवारी जी , कई साहित्यिक प्रसंगों में हाज़िर रह चुके हैं -

- एक पुराने कवि सम्मलेन की झलक आपके लिए प्रस्तुत है --

समय : मई २५ , २००२ , शाम ७

कवि सम्मलेन हुआ था वोंग ऑडिटोरियम MIT , ( सुप्रसिध्ध संस्था के तत्वाधान में ) वहाँ प्रसिध्ध हास्य कवि श्री हुल्लड़ मोरादाबादी व आलोक भट्टाचार्य जैसे कवियों ने संगम MIT, इंटरनेशनल हिंदी असोसिएशनमें भाग लिया था --

२०० से ज्यादा न्यू जर्सी प्रांत व हार्टफोर्ड कनेतीकट जैसे दूर के प्रान्तों से लोग आये थे .

श्री सुरेन्द्र नाथ तिवारी जी , उस वक्त प्रेजिडेंट थे - " अन्तराष्ट्रीय हिन्दी समिती " के

उन्होंने अध्यक्षता की थी और मुख्य भाषण भी दिया था

जिसमे हिन्दी भाषा की स्थिति उत्तर अमरीका में क्या है उस पर अपने विचार रखे

भारतीय राष्ट्र भाषा हिन्दी को, दूसरी भाषा के तहत, अमरीकी पाठ्यक्रम के जरिए , हाई स्कूल तथा कोलेजों में स्थान मिले , चाईनीज़ या कोरीयन की तरह , इस पर ध्यान दिया जाए यह उनका आग्रह रहा

उसी कवि सम्मलेन में जो कवि पधारे उनमे एक थे श्री आलोक भट्टाचार्य जो बंगाली हैं

मूलत: वे आंध्र प्रदेश से हैं , तेलुगु , मराठी , बंगला बोल लेते हैं पर लिखते हैं हिंदी में और साहित्य अकेडमी और प्रेजिडेंट अवार्ड , कविता के लिए प्राप्त कर चुके हैं

सम्मलेन में , उन्होंने , इंडो -पाक , आगरा summit पर लिखी ये पंक्तियाँ सुनाईं थीं

ताजमहल के साये में तुम आये ,
और प्यार की बात ही नहीं कर पाए .


हुल्लड़ जी की व्यंग्यात्मक कविता पढें

" दोनों घुटने ठीक किये हैं श्रीराम ने
टेक ना देना इन्हें , पाकिस्तान के सामने

धन चाहे मत दीजिये जग के पालनहार
पर इतना तो कर दीजिये , की मिलता रहे उधार ! "

अब फ़िर एक चित्र , आर्ट फेस्टिवल से ..जो हमारे शहर की एक मुख्य सड़क पर हुआ था - चित्रकला , मूर्तिकला , फूल प्रदर्शनी के साथ , कई सारे लोग घूम रहे थे -- अपने पालतू जानवरों को भी धूपमें ,

घुमा रहे थे -- वहीं दीख गए ये महाशय जो , कुम्हार - कला में कुशल है --

मेरी यही प्रार्थना है हर देश में , हर कॉम में अमन चैन हो ---

हर जीव को पोषण मिले - - सब सुखी रहें

चाहें वे मूक प्राणी हों या हम जैसे वाचाल :)

और ये हमारे नोआ जी -- अपने सोफी के संग --
अब आपके लिए प्रस्तुत हैं दीपावली के शुभ पर्व पर २ कवितायें --
समस्त परिवार जन के लिए ,
मंगल कामना सहित


जीवन की अँधियारी रात हो उजारी!
धरती पर धरो चरण तिमिर-तमहारी
परम व्योमचारी!
चरण धरो, दीपंकर,
जाए कट तिमिर-पाश!
दिशि-दिशि में चरण धूलि
छाए बन कर-प्रकाश!

आओ, नक्षत्र-पुरुष,
गगन-वन-विहारी
परम व्योमचारी!

आओ तुम, दीपों को
निरावरण करे निशा!
चरणों में स्वर्ण-हास
बिखरा दे दिशा-दिशा!

पा कर आलोक,
मृत्यु-लोक हो सुखारी
नयन हों पुजारी!

-पंडित नरेंद्र शर्मा

दीप ज्योति नमोस्तुते


दीप शिखा की लौ कहती है,
व्यथा कथा हर घर रहती है!
कभी छुपी तो कभी मुखर हो
अश्रु-हास बन बन बहती है!
हाँ, व्यथा सखी, हर घर रहती है!

बिछुड़े स्वजन की याद कभी
निर्धन की लालसा ज्यों, थकी-थकी
हारी ममता की आँखों में नमी
बन कर, बह कर, चुप-सी रहती है!
हाँ व्यथा सखी, हर घर बहती है!

नत मस्तक, मैं दिवला बार नमूँ,
आरती माँ महा-लक्ष्मी, मैं तेरी करूँ,
आओ घर घर माँ, यही आज कहूँ,
दुखियों को सुख दो, यह बिनती करूँ,
माँ! देख दिया अब प्रज्वलित कर दूँ!

दीपावली आई फिर आँगन,
बन्दनवार रंगोली रची सुहावन!
किलकारी से गूँजा रे, प्रांगन
मिष्टान-अन्न-धृत-मेवा, मन भावन!
देख सखी यहाँ, फुलझड़ी मुस्कावन!

जीवन बीता जाता ऋतुओं के संग-संग,
हो सब को, दीपावली का अभिनंदन!
नए वर्ष की बधाई - हो, नित नव-रास!

-लावण्या