
रीतू के लिए , मेरी अम्मा , श्रीमती सुशीला नरेंद्र शर्मा ने , हमारी बगिया से ,
चमेली , जूही और नन्हे गुलाब की कलियों के बाजू बंद , टीका , कर्ण ~ फूल, गलहार , हाथ के गजरे ,बनाकर , हल्की केसरीया ओढ़नी से सर ढके, रितू को सजाया था, तब वह अपूर्व देव कन्या सी सुन्दर दिखीं थीं - उस वक्त की यह छवि है ।
............... जिन्हें आप अवश्य पसंद करेंगें --
-- यह एक आभासी सच है ।
इसे परिश्रम और मनोयोग से , तैयार किया जाता है ।
फिल्म के मुख्य में अपनी प्रधान भूमिका ले लेती है - एक आभासी कथा को परदे पर , फ़िल्म के माध्यम से सजीव रूप देने के लिए , फ़िल्म यूनिट काम करने लगती है ।
भारतीय फिल्मे कई सारे गीत लिए बनायी जातीं हैं ।
गीतकार , इन फिल्मों में, प्रसंग अनुरूप गीत लिखतें हैं ।
और कथानक के साथ चल रहे गीतों को भी संगीत से , संवारते हुए , सजीव करता है -
फ़िल्म निर्माता निर्माण के लिए , अपना धन लगाता है ।
या चित्र घर ठीयेतर्स में या फ़िर डी वी डी जब बाज़ारों में आ जातीं हैं तब घर पर लाकर भी हम फिल्मों को देख लेते हैं । कई सारे व्यवसाय इन से , इन्दिरेक्ट्ली जुड़े हुए हैं । संगीत सीडी , डीवीडी ,
की खपत भी करोड़ों में होतीं हैं ।
इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराना ,यही हिन्दी व प्रादेशिक भाषाओं में बन ने वालीं फिल्म निर्माण का , मुख्य लक्ष्य है । धन उपार्जन इस का मूलभूत कारन भी है ।
बोम्बे या बम्बई नामक शहर में , भारतीय सिने संसार प्रमुखत: विद्यमान है
बंबई का नामकरण " मुम्बा देवी " से अब " मुम्बई " कर दिया गया है । बोम्बे नगरी में बसी यह इंडस्त्री
इसी कारण से , बोलीवुडके नाम से , जग प्रसिध्ध हो गयी है ।
भारत में, क्रिकेट के साथ , फिल्मे ही शायद सबसे ज्यादा लोकप्रिय विधा है -
और भी कई बारीक बातें हैं.................. जिनकी चर्चा , फिर कभी ............
श्रीमान राज कपूर साहब, भारतीय फिल्म उद्योग के बेहद लोकप्रिय ,
मेक - अप करवा रहे हैं ।" पंढरी जूकर " यहां इनके मेक - अप मेन थे --

एक बार वे , कश्मीर गए -थे । वहां माटी की हांडी पर , संगीत बजाते कलाकार से , चन्द पलों में , वह बजाना सीख लिया और रात देर तक बजाते रहे.....................
नीचे वाले चित्र में, राज साब के साथ हैं उनकी पत्नी , कृष्णा भाभी जी और भारतीय फिल्म जगत के मशहूर और बेजोड़ नायक : दिलीप कुमार उर्फ़ युसूफ खान साहब ! फिल्म नायिका पत्नी सायरा के संग 

भारत सरकार ने भारतीय डाक टिकट जारी कर , जोकर के पात्र को, फिल्म " मेरा नाम जोकर " से अमर करनेवाले , राज साब की यादों को सम्मान दिया है
आज तलक, मैंने जितनी भी स्त्रियाँ देखीं हैं, उन सभी में , ( देस और परदेस मिलाकर :)और " नव्य नवेली " व अगस्त्य के पिता भी हैं

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भारत कोकीला, भक्तगायिका , MS सुब्बालक्षमी जी का अद्`भुत गायन !
तो दूसरी ओर बल्ले बल्ले स्वर उठ रहे थे जहाँ , पंजाब से आये, मशहूर , भांगडा ग्रुप का एक धमाकेदार डांस जारी था !!

इन दोनों की रोमांटिक जोड़ी ने सफलता के नये पैमाने कायम किये हैं ।

अपनी युवा बेटी रितू के गाल चूमकर आर्शीवाद देते हुए , यही छवि मुझे आज भी प्रभावित करती है -
एक और वाक़या सुनाऊं -
-- मैं, अस्वस्थ थी , तो नहीं गयी !
अगले दिन विवाह की संध्या को , सिर्फ़ नीली रोशनी बिखेरते रोशनी के लट्टू ही जले थे ये भी याद है ।
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राज जी ने रखीं हैं । रीतू के लिए तैयार किया गया पूरा गीत प्राइवेट गीत है और बहुत मार्मिक है --

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