Monday, December 28, 2009

गीतों और गज़लों से सजी हिन्दी चित्रपट की दुनिया का सुरीला सफ़र

हिन्दी फिल्मों में अपनी दर्दभरी , दिल को छु लेनेवाली आवाज़ , दिलकश अदाकारी और गंभीर हुस्न के लिए पहचानी जानेवाली मशहूर अदाकारा स्व. मीना कुमारी जी ने कई सुमधुर और अविस्मरनीय गीतों में अपने सशक्त अभिनय से जान फूंक दी ..........
आवाज़ और लफ्जों के जादूगर दोनों एक साथ : स्वर साम्राग्नी सु श्री लता मंगेशकर और शायर जावेद अख्तर
रेडियो : फ़िल्मी गीतों तथा ग़ज़लों को प्रसारित और लोकप्रिय करने वाला जादूई यंत्र
फ़िल्मी प्रचार के लिए बनाए गये पोस्टर
दो बहने जिन्हें भारत और दुनिया भर में असाधारण प्रसिध्धि हासिल हुई _ लता दी और आशा ताई


गीतों और गज़लों से सजी हिन्दी चित्रपट की दुनिया का सुरीला सफ़र
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ज हम हिंदी सिनेमा जगत में गीत और ग़ज़लों के लिखनेवाले , कुछ जाने पहचाने और कुछ सदाबहार कलाकारों को याद करते हुए चलें , संगीत और सृजन की, एक अनोखी, सुरीली , संगीतमय यात्रा पर !
आपने भी कई बार , इन कलाकारों के रचे, गीतों को गुनगुनाया होगा - ये मेरा विशवास है -
जैसा की अकसर होता है, जब् भी हमारी जिंदगी में , ऐसे पल आते हैं जिनसे गुजरते हुए,
अनायास ही हमारे जहन में, कोइ भूला - बिसरा गीत,
उभर आता है और हम , हमारी संवेदना को उसी गीत में ढालकर , गीत, गुनगुनाने लगते हैं !
....ये कितने आश्चर्य की बात है कि, अकसर हमारे मन में चल रही हलचल को , कोइ ना कोइ गीत ,
या कोइ ग़ज़ल, हूबहू, उसी के अनुरूप, किसी ख़ास अंदाज़ में मिल ही जाती है !
और अकसर ये गीत साहित्य या हिंदी फिल्मों से सम्बंधित होता है !
आज हम , कई सारे मशहूर कलाकारों को याद करेंगें जिनके गीत और ग़ज़ल हमारे जीवन में ऐसे रच बस गए हैं मानो वे हमारे परिवार और हमारे जीवन का अभिन्न अंग ही हों !
हां कई ऐसे कालाकार और उनके नाम आज हम चाहकर भी न ले पायेंगें क्यूंकि ये असंभव सी बात है सभी का नाम लेना और उनके गीत याद करना !
अगर सभी का नाम लूं , तब तो मेरा आलेख बहुत लंबा हो जाएगा और आपका समय भी तो कीमती है !
आज बस यही समझें , संगीत की बगिया से फूल नहीं, महज कुछ पंखुरियां ही चुन कर,
आपके सामने पेश कर रही हूँ --
मुझे याद है बचपन में देखी फिल्म "जागृति " जिसके तकरीबन सारे गीत, हर भारतीय ने
बचपन से लेकर, अपनी जीवन यात्रा के हर मुकाम पार करते हुए ,गुनगुनाये होंगें !
" आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ..."
और
" दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ..."...और
" हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के

इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के "

इन अमर गीतों के साथ याद कर लें और नमन करें कवि प्रदीप जी की लेखनी को !
ऐसे ही ,
देश - प्रेम या भारत प्रेम का जज्बा कुछ और गहराता है जब् जब् हम गाते हैं ,
" सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है

वक़्त आने पर बता देंगे तुझे ओ आसमाँ
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है "

श्री राम प्रसाद "बिस्मिल " के त्याग और बलिदान के रंग में रंगे ये अक्षर समय के दरिया से भी ना धुन्धलायेंगें !

मुगलिया सल्तन के शाही तख्तो ताज के उजड़ने कि कहानी अगर कोइ चाँद लफ्जों में बयान करे तब यही कहेगा

" उम्र-ए-दराज़ माँग के लाये थे चार दिन
लाये थे चार दिन
दो आरज़ू में कट गये दो इंतज़ार में
दो आरज़ू में कट गये

कितना है बदनसीब ज़फ़र दफ़्न के लिये
दफ़्न के लिये
दो ग़ज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में -
लगता नहीं है जी ..."

और ये बेनूरानी के सबब से ख्यालात थे हिन्दोस्तान के अंतिम मुगलिया बादशाह ,

बहादुर शाह जफर के --

गीत और गज़लों की यही तो खूबी है जो महज चाँद लफ्जों से वे हमारे जहन में उभार देते हैं

एक सदी का पूरा इतिहास !

दरिया की रवानी सी बहती गीत की तर्ज पे हम डूबते उतरते हुए सिन्धु से गंगा

और वोल्गा से नाईल पार करते हुए , अमेजोन और मिसिसिपी या तैग्रीस और होआन्ग्हो भी घूम आते हैं !

और श्री भारत व्यास और हिंदी संगीत निर्देशकों के पितामह श्री अनिल बिस्वास द्वारा रचा ये गीत भी

नदी किनारे पर सुन लें

"घबराए जब मन अनमोल,
और ह्ऱिदय हो डँवाडोल,
तब मानव तू मुख से बोल,
बुद्धम सरणम गच्छामी.....

बुद्धम सरणम गच्छामी,
धम्मम सरणम गच्छामी,
संघम सरणम गच्छामी."
फिल्म थी ' अंगुलीमाल "

और संत ज्ञानेश्वर फिल्म में ये गीत था -

"ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो "

" हरी भरी वसुंधरा पर नीला नीला ये गगन
के जिसपे बादलों की पालकी उड़ा रहा पवन
दिशाएं देखो रंग भरी
दिशाएं देखो रंग भरी चमक रहीं उमंग भरी
ये किसने फूल फूल से किया श्रृंगार है
ये कौन चित्रकार है ये कौन चित्रकार
"

फिल्म : " बूँद जो बन गयी मोती " से प्रकृति के सौन्दर्य की पूजा का गीत है और भारत व्यास जी की लेखनी राजस्थान की रंगोली परोसते हैं ऐसे उत्कृष्ट प्रणय गीत से

फिल्म थी "दुर्गादास " और गीत के शब्द हैं,

" थाणे काजळियो बणालयूं म्हारे नैणा में रमाल्यूं -२
राज पळकां में बन्द कर राखूँली
हो हो हो, राज पळकां में बन्द कर राखूँली "

और फिल्म नवरंग का ये सदाबहार गीत

"आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी, मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा..."

और तब नयी " परिणीता "( यही शीर्षक भी था )का मनभावन रूप इन शब्दों में ढलता है

" गोरे-गोरे हाथों में मेहंदी रचा के
नयनों में कजरा डाल के
चली दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूँघट निकाल के -२
गोरे-गोरे हाथों ..में."

फैज़ अहमद फैज़ के लफ्जों पे गौर करें --

" ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो "

और नूरजहाँ की आवाज़ में "कैदी " फिल्म की ये ग़ज़ल क्या खूब है,

अल्फाज़ फिर फैज़ साहब के हैं

" लौट जाती है इधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न, मग़र क्या कीजे - २
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

मुझ से पहली सी मोहब्बत, मेरे महबूब, न माँग "

" ख़ूँरेज़ करिश्मा नाज़ सितम
ग़मज़ों की झुकावट वैसी ही
पलकों की झपक पुतली की फिरत
सूरमे की घुलावट वैसी ही
" -

"हुस्ने ए जाना " प्राइवेट आल्बम से जिस गाया छाया गांगुली ने और तैयार किया मुज़फ्फर अली ने शायरी नजीर अकबराबादीसाहब के कमाल का ये नमूना क्या खूब है !

अब आगे चलें , सुनते हुए,

" मुझपे इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई है
ऐ मुहब्बत तेरी दुहाई है
मुझपे इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई है ."

इस ग़ज़ल .के बोल दीये थे, जां निसार अख्तर साहब ने 'यास्मीन" फिल्म में और संगीत से सजाया

सी . रामचन्द्रने और आवाज़ दी स्वर साम्राग्नी लता जी ने !

उनके साहबजादे जावेद अख्तर साहब , अपने अजीम तरीम वालीद से भी ज्यादा मशहूर हुए और कई खूबसूरत नगमे उन्होंने हिंदी सिनेमा को देते हुए आज भी वे मसरूफ हैं अपने लेखन में,

" ऐ जाते हुए लम्हों ज़रा ठहरो ज़रा ठहरो
मैं भी तो चलता हूँ ज़रा उनसे मिलता हूँ
जो एक बात दिल में है उनसे कहूं
तो चलूं तो चलूं हूं हूं हूं हूं
ऐ जाते हुए लम्हों ..."

रूप कुमार राठोड के स्वर, फिल्म बॉर्डर, संगीत अनु मल्लिक का और

" सिलसिला" का ये लोकप्रिय गीत

" देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाहों में हैं गुल खिले हुए
ये ग़िला है आप की निगाहों में
फूल भी हों दर्मियां तो फ़ासले हुए "

जगजीत सिंह जी की आवाज़ में "साथ साथ फिल्म का ये गीत,

संगीत कुलदीप सिंह का , एक अलग सा माहौल उभारता है

" तुम को देखा तो ये ख़याल आया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया
तुम को..."

राजा मेहेंदी अली खान साहब के इन दोनों गीतों को जब् लता जी का स्वर मिला तो मानो सोने में सुगंध मिली संगीत मदन मोहन का था और फिल्म थी " वह कौन थी ? "

" नैना बरसें, रिमझिम रिमझिम
नैना बरसें, रिमझिम रिमझिम
पिया तोरे आवन की आस
नैना बरसें, रिमझिम रिमझिम
नैना बरसें, बरसें, बरसें "

और अनपढ़ का ये गीत ,

" आप की नज़रों ने समझा, प्यार के काबिल मुझे
दिल की ऐ धड़कन ठहर जा, मिल गई मंज़िल मुझे
आप की नज़रों ने समझा .."

फिल्मों में उर्दू ग़ज़लों की बात चले और शकील बदायूनी और साहीर लुधियानवी साहब का नाम ना आये ये भी कहीं हो सकता है ? साहीर ने कितनी बढिया बात कही ,

" तू हिन्दु बनेगा ना मुसलमान बनेगा
इन्सान की औलाद है इन्सान बनगा "

संगीत एन . दता, फिल्म "धर्मपुत्र " गायक मुहम्मद रफी -

गीता दत्त का गाया पुरानी देवदास का गीत जिसे संगीत में ढाला सचिन दा ने इस भजन में ,

" आन मिलो आन मिलो श्याम सांवरे ... आन मिलो " भी साहीर का लिखा था और " वक्त " का ये रवि के संगीत से सजा सदाबहार नगमा

" ऐ मेरी ज़ोहरा-ज़बीं
तुझे मालूम नहीं
तू अभी तक है हंसीं
और मैं जवाँ
तुझपे क़ुरबान मेरी जान मेरी जान
ऐ मेरी ..."

" साधना " फिल्म का लता जी के स्वर में , ये नारी शोषण के लिए लिखा गीत

" औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा कुचला मसला, जब जी चाहा दुत्कार दिया "

और

' रेलवे प्लेटफोर्म' का गीत : मनमोहन कृष्ण और रफी के स्वर में मदन मोहन का संगीत

" बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
ले कर दिल का इकतारा
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत ..." ये सारे गीत और गज़लें ,

साहीर साहब की अनोखी प्रतिभा के बस , नन्हे से नमूने हैं -

शकील बदायूनी की ये पाक इल्तजा फिल्म "मुगल ए आज़म " में लता जी की आवाज़ में सदीयों गूंजती रहेगी

" ऐ मेरे मुश्किल-कुशा, फ़रियाद है, फ़रियाद है
आपके होते हुए दुनिया मेरी बरबाद है

बेकस पे करम कीजिये, सर्कार-ए-मदीना
बेकस पे करम कीजिये
गर्दिश में है तक़दीर भँवर में है सफ़ीन -२
बेकस पे करम कीजिये, सर्कार-ए-मदीना
बेकस पे करम कीजिये "

और उमा देवी ( टुनटुन ) का स्वर और नौशाद का संगीत "दर्द" फिल्म में सुरैया जी की अदाकारी से सजा

" अफ़सान लिख रही हूँ (२) दिल-ए-बेक़रार का
आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का
अफ़साना लिख रही हूँ "

" मन तड़पत हरि दरसन को आज
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज
आ, विनती करत, हूँ, रखियो लाज, मन तड़पत..."

" बैजू बावरा " फिल्म के संगीतकार, नौशाद , शायर शकील ,और गायक रफी ने ये सिध्ध कर दिया की कला और संगीत किसी भी मुल्क , कॉम या जाति बिरादरी में बंधे नहीं रहते -

वे आजाद हैं - हवा और बादल की तरह और पूरी इंसानियत पे एक सा नेह लुटाते हैं !

आशा भोसले का स्वर और जयदेव का संगीत,

हिंदी कविता की साक्षात सरस्वती महादेवी जी के गीतों को

नॉन फिल्म गीत देकर , अमर करने का काम कर गयी है -

" मधुर मधुर मेरे दीपक जल !
युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,
प्रियतम का पथ आलोकित कर !

सौरभ फैला विपुल धूप बन,
मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन;
दे प्रकाश का सिन्धु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु अणु गल !
पुलक पुलक मेरे दीपक जल ! "

डाक्टर राही मासूम रजा ने कहा जगजीत ने गाया नॉन फिल्म गीत

" हम तो हैं परदेस में, देस में निकला होगा चांद - २
अपनी रातकी छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो ओ ओ
हम तो हैं परदेस में, देस में निकला होगा चांद ..."

और निदा फाजली का लिखा जगजीत का गाया ये भी नॉन फिल्म गीत

" ओ मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बात की, बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये, जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार "

तलत का गाया गालिब का कलाम, भी नॉन फिल्म गीत

" देखना क़िस्मत कि आप अपने पे रश्क आ जाये है
मैं उसे देखूँ भला कब मुझसे देखा जाये है "

ये भी एक स्वस्थ परिपाटी की और इशारा करते हैं और हमें ये बतलाते हैं कि ,

जरुरी नहीं है के हरेक गीत सिनेमा में हो !

परंतु फिल्म से जुड़े कलाकोरों ने, ऐसे कई सुन्दर गीत और कलामों को संजोया है

जो हम श्रोताओं के लिए ये नायाब तोहफा ही तो है !

इन्टरनेट पर हिंदी फिल्म में गीत और ग़ज़ल , लिखनेवालों पर , पिछले कुछ समय में ,

स - विस्तार और काफी महत्वपूर्ण सामग्री दर्ज की गयी है -

जिसमे प्रमुख है इतरंन वेब साईट -
जिस पर गीतों पर, संगीत पर, और अन्य कई बातों पर ,
बहुत सारी जानकारियाँ दर्ज कि गयीं हैं -
मेरे पापा जी, स्व. पण्डित नरेंद्र शर्मा का नाम "न " अक्षर से खोजते समय,
मुझे , इतने सारे नाम और भी मिले !
आप भी गर चाहें और अपने प्रिय गीतकार या संगीतकार या गायक पर खोज करना चाहें तब ये देखिये
लिंक :

Pt. Narendra Sharma
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Songs of Pt. Narendra Sharma as a lyricist

baa.Ndh priiti phuul Dor: text, हिंदी,
chhabi terii madhur ... man me.n mere a.ngaare hai.n: text, हिंदी,
gun gun gun gun bole re bha.nwar: text, हिंदी,
hai kahii.n par shaadamaanii aur kahii.n naashaadiyaa.N: text, हिंदी,
ham chaahe.n yaa na chaahe.n: text, हिंदी,
jaa re cha.ndr, jaa re cha.ndr, aur kahii.n jaa re: text, हिंदी,
jo samar me.n ho gae amar - - Lata: text, हिंदी,
jyoti kalash chhalake jyoti kalash chhalake: text, हिंदी,
koii banaa aaj apanaa: text, हिंदी,
mai.n yauvan ban kii kalii: text, हिंदी,
man me.n mere a.ngaare hai.n (chhabi terii madhur): text, हिंदी,
man mor huaa matavaalaa: text, हिंदी,
man sau.np diyaa an_jaane me.n: text, हिंदी,
nain diivaane ik nahii.n maane: text, हिंदी,
raat a.ndhiyaarii hai, maat dukhiyaarii hai: text, हिंदी,
saa.Njh kii belaa pa.nchii akelaa: text, हिंदी,
vo chaa.Nd nahii.n hai dil hai kisii diivaane kaa: text, हिंदी,


ये भी दुसरे कई सारे गीतकार व गज़लकारों पर लिंक हैं -
-

[ do please click to read ]

अमित खन्नाआनंद बक्षी
अंजानअन्वर सागर
असद भोपालीबशर नवाज
भरत व्यासफारुख कैसर
गौहर कानपुरीगुलशन बावरा
गुलजारहसन कमाल
हसरत जयपुरीइफ्तिखार इमाम सिद्दीकी
इंदिवरजां निसार अख्तर
जावेद अख्तरकैफी आझमी
कैफी भोपालीकमाल अमरोही
खुर्शीद हलौरीकुलवंत जानी
कमार जलालाबादीकातिल शफई
एम. जी. हशमतमजरुह सुलतानपुरी
मखदुम मोहिद्दिनमेहबूब
मीर तकी मीरमिर्जा शौक
नक्श लायलपूरीनीरज
निदा फाझलीनूर देवासी
प्रदीपप्रकाश मेहरा
प्रेम धवनपं. नरेन्द्र शर्मा
राहत इंदौरीराजा मेहंदी अली खान
राजेन्द्र कृष्णरानी मलिक
रविन्द्र जैनएस. एच. बिहारी
साहिर लुधियानवीसमीर
संतोष आनंदसावन कुमार
शहरयारशैलेन्द्र
शैली शैलेन्द्रशकिल बदायुनी
शेवान रिझवीवसंत देव
योगेश

खुर्शीद हलौरीकुलवंत जानी
कमार जलालाबादीकातिल शफई
एम. जी. हशमतमजरुह सुलतानपुरी
मखदुम मोहिद्दिनमेहबूब
मीर तकी मीरमिर्जा शौक
नक्श लायलपूरीनीरज
निदा फाझलीनूर देवासी
प्रदीपप्रकाश मेहरा
प्रेम धवनपं. नरेन्द्र शर्मा
राहत इंदौरीराजा मेहंदी अली खान
राजेन्द्र कृष्णरानी मलिक
रविन्द्र जैनएस. एच. बिहारी
साहिर लुधियानवीसमीर
संतोष आनंदसावन कुमार
शहरयारशैलेन्द्र
शैली शैलेन्द्रशकिल बदायुनी
शेवान रिझवीवसंत देव
योगेश
आशा है आपको
ये गीत व ग़ज़ल की दुनिया से जुडी दीलचस्प बातें पसंद आयी होंगीं
आप अपने सुझाव तथा प्रश्न, यहां लिख कर भेज सकते हैं -
&

फिर मिलेंगें -- आज इतना ही --
" जिंदगी एक सफ़र है सुहाना,
यहां कल क्या हो किसने जाना ! "

आपके समस्त परिवार को , नव - वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं
Hope you have a wonderful 2010 ahead ............

स - स्नेह,
- लावण्या






Friday, December 18, 2009

भारत में , और विदेशों में भी भारत के सब से ज्यादह प्रसिध्ध नेहरु परिवार के कुछ अज्ञात या कम जाने पहचाने सदस्यों के बारे में और कुछ कवितायेँ भी ....

प्रथम भारतीय ध्वज
वीर सावरकर द्वारा निर्मित : सन १९०६
एकम सत्य
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कौन रहा अछूता जग में,
सुख दुःख की छैंया से ?
धुप छांह का खेल जिन्दगी
ये सच , जाना पहचाना !
सभी हमारे, हैं सब अपने,
कौन है जग में पराया ?
जीवन धारा एक सत्य है
हर सांस ने जिसे संवारा -
इस छोर खड़े जो,
उस छोर चलेंगे
रह जायेंगे, कुछ सपने
है मौजों के पार किनारा
कहती बहती ये धारा !
अगम अगोचार , सत्य ,
ना जाना, पर, जाना है पार ,
नैन जोत के ये उजियारे
मिल जायेंगे उस में,
जो है बृहत प्रकाश !

- लावण्या

सभी को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ भवानी प्रसाद मिश्र की एकप्रसिद्ध बाल कविता प्रस्तुत है-
( साभार डा. जगदीश व्योम के जाल घर से )

साल शुरु हो दूध दही से
साल खत्म हो शक्कर घी से
पिपरमैन्ट, बिस्कुट मिसरी से
जहें लबालब दोनों खीसें
मस्त रहें सडकों पर खेलें
नाचें कूदें गाएँ ढेलें
ऊधम करें मचाएँ हल्ला
रहें सुखी भीतर से जी से
साँझ, रात, दोपहर, सवेरा
सब में हो मस्ती का डेरा
कातें सूत बनाएँ कपडे
दुनिया में क्यों डरें किसी से
पंछी गीत सुनाएँ हमको
करं दोस्ती पेड फूल से
लहर लहर से नदी नदी से
आगे पीछे ऊपर नीचे
रहें हँसी की रेखा खींचे
पास पडोस गाँव घर बस्ती
प्यार ढेर भर करं सभी से।

-भवानी प्रसाद मिश्र

और गीत : उड़ जा रे कागा बन का : मीरा भजन : स्वर : लता दी
13 - Udd Jaa Re Kaaga.mp3 - Udd Jaa Re Kaaga.mp3
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माँ

माँ कबीर की साखी जैसी
तुलसी की चौपाई-सी
माँ मीरा कीपदावली-सी
माँ है ललितस्र्बाई-सी।

माँ वेदों की मूल चेतना
माँ गीता की वाणी-सी
माँ त्रिपिटिक के सिद्धसुक्त-सी
लोकोक्तरकल्याणी-सी।

माँ द्वारे की तुलसीजैसी
माँ बरगद कीछाया-सी
माँ कविता की सहजवेदना
महाकाव्य की काया-सी।
माँ अषाढ़ की पहली वर्षा
सावन की पुरवाई-सी
माँ बसन्त की सुरभि सरीखी
बगिया की अमराई-सी।

माँ यमुना की स्याम लहर-सी
रेवा की गहराई-सी
माँ गंगा की निर्मल धारा
गोमुख की ऊँचाई-सी।

माँ ममता का मानसरोवर
हिमगिरि सा विश्वास है
माँ श्रृद्धा की आदि शक्ति-सी
कावा है कैलाश है।

माँ धरती की हरी दूब-सी
माँ केशर की क्यारी है
पूरी सृष्टि निछावर जिस पर
माँ की छवि ही न्यारी है।

माँ धरती के धैर्य सरीखी
माँ ममता की खान है
माँ की उपमा केवल है
माँ सचमुच भगवान है।
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- डॉ० जगदीश व्योम

डॉ. जगदीश व्योम

http://www.anubhuti-hindi.org/kavi/j/jagdish_vyom_dr/index.htm


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आइये, अब भारत में , और विदेशों में भी भारत के सब से ज्यादह प्रसिध्ध नेहरु परिवार के कुछ अज्ञात या कम जाने पहचाने सदस्यों के बारे में भी थोड़ा जानें ..............
पण्डित मोती लाल जी की धर्म पत्नी श्रीमती स्वरूप रानी थीं
The Nehru Family

स्वरूप रानी , उनकी दूसरी पत्नी थीं ... ऐसा कहा जाता है कि
( उनकी पहली पत्नी और १ और पुत्र का देहांत हो गया था )
- पंडित मोती लाल जी, पंडित गंगा धर नेहरु जी के पुत्र थे, गंगाधर जी देहली में ब्रिटीश साम्राज्य के एक पुलिस कर्मचारी थे और गंगा धर जी लक्ष्मी नारायण नेहरु जी के सुपुत्र थे ...
Pandit Motilal Nehru


In office
1919 – 1920

Jawaharlal Nehru

Nehru, ca. 1927

In office
August 15, 1947 – May 27, 1964

भारतीय गणतंत्र के प्रथम प्रधान मंत्री ,शपथ ग्रहण करते हुए सत्ता हस्तरन्र्तित हुई लोर्ड माऊंट बेटन के हाथों से ..भारतीय जनता के हाथों में




ttp://video.google.com/videoplay?docid=6218045611920270760#docid=6986855603795328951

नेहरु जी की दुसरी बहन कृष्णा हठी सिंह :

नेहरु जी की दुसरी बहन थीं कृष्णा ठी सिंह और उनके पुत्र हैं अजितसिंह जिनका विवाह पहले अमृता जी से हुआ था और संतान हैं, निखिल , विवेक और रवि
उनके पुत्र हैं .
अजित सिंह जिनका विवाह - बाद में अमरीकी महिला हेलेन से हुआ :
http://en.wikipedia.org/wiki/Ajit_Hutheesing --
२००६ में हेलेन का न्यू योर्क में देहांत हुआ --
http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9402E2DE133AF936A35756C0A9609C8B63
Helen & Ajit's Wedding in India (1996 )
रवि हठी सिंह : http://en.wikipedia.org/wiki/Ravi_Hutheesing
इंदिरा जी


Rajiv Gandhi
......राजीव गांधी ...................
Congress Party President, Prime Minister

.संजय गांधी

Member of Parliment

प्रियंका गांधी / वाड्रा अपने २ बच्चों के संग पुत्र : रेहान और पुत्री मेयरा साथ बैठी हैं इतालियन नानी माँ , सोनिया गांधी की माँ , पोलो मेनिया ........

Rahul Gandhi राहुल गांधी -------------------------------------->
विजय लक्ष्मी नेहरु पंडित :
२ चित्र
Vijaya Lakshmi Panditj

(अगस्त १८ , १९० 0 - दिसम्बर १ , १९९० )
विजय लक्ष्मी नेहरु , भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु जी की बहन हैं । सन १९२१ में , रंजित सीताराम पंडित से उनका ब्याह हुआ वे प्रथम महिला हैं जिन्होंने सन १९३७ में केबिनेट पोस्ट संभाली थी सोवियत राष्ट्र संघ , संयुक्तगणराज्य अमरीका और मेक्सिको केलिए भी वे भारतीय प्रतिनिधि बनकर उन देशों में रहीं। ( १९४९ से १९५१ ) आयरलैंड के लिए १९४९ से १९५१ तक और १९५८ से १९६१ तक . स्पेन और संयुक्त ब्रीटीश राष्ट्र संघ में भारत एलची = Ambassador बन कर रहीं थीं सन १९५८ से १९६१ तक . १९४६ से १९६८ उन्होंने भारतीय प्रतिनिधि मंडल की प्रमुख बन कर , यूनाईटेड नेशंस में शिरकत की थी ।
अब आज्ञा .............बहुत सामान परोस दिया है ...आप के लिए ...
कुछ न कुछ आपको अवश्य , नया लगा होगा इसी आशा सहित, नमस्ते