Thursday, January 24, 2008

सुवर्ण सुन्दरी : " कुहू कुहू बोले कोयलिया "


सुवर्ण सुन्दरी १९५७ में बनी हिन्दी फिल्म थी। जिसका गीत ' कुहू कुहू बोले कोयलिया " जिसे रफी साह'ब ओर लता जी ने गाया था, आज भी संगीत प्रेमियों के मध्य बहुत प्रसिध्ध है --

आदीनारायण राव जी के अद`भुत स्वर संयोजन में लय बध्ध किये हिन्दी फिल्म जगत के , सबसे कठिन गीतों में से एक में , शुमार किये जानेवाले इस गीत ने , सदा के लिए , संगीत प्रेमियों के ह्रदय में ,अपना ख़ास स्थान रखा है...

ये आदी नारायण जी के अन्य गीतों की सूची है ...जिसमें से कई सारे भजन हैं।

हर गीत , में , स्वर संयोजन की प्रतिभा ,इतनी अव्वल दर्जे की है कि वो सुननेवालों को भाषा से परे , आध्यात्म जगत में खींच कर ले जानेमें सक्षम है ..


सुवर्ण सुन्दरी एक लोक कथा है जहाँ, एक गन्धर्व कन्या , एक मनुष्य से प्रेम करने लगती है जिसे गलत कारणों से देश निकाला दिया जाता है -

हर कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि को इनका मिलन होता है
देवराज इन्द्र कुपित होकर सुवर्ण सुन्दरी को श्राप देते हैं
जिस की वजह से, राजकुमार उसे भूल जाता है -
आगे की कथा भी रोचक है -
ये फ़िल्म पहले , तमिल व तेलेगु भाषाओं में बनी-
फिर हिन्दी में भी , अपने सुमधुर गीतों के कारण
असीम सफ़लता प्राप्त कर पाई -
ख़ास तौर से, प्रसिध्ध नायक और नायिका के न होते हुए भी
शास्त्रीय संगीत से सजे मधुर गीतों के कारण !
अब देखिये रागमालिका तमिल में --

और ये हिन्दी राग मालिका " कुहू कुहू बोले कोयलिया "



5 comments:

Harshad Jangla said...

Lavanyaji

Even after 50 years this song is still fresh, sweet and everlasting in our memories. I didtictly remembered this song being played in Binaca Geetmala which was most favorite redio program of those days.Great song indeed.
Thanx & rgds.

Mired Mirage said...

यह गीत सुनकर तो आनन्द आ गया । संगीत , शब्द व आवाज सब एक से बढ़कर एक हैं .
घुघूती बासूती

Gyandutt Pandey said...

गीत लाजवाब है। पर हमारा ब्राडबैण्ड इतना नैरो है कि आधा ही सुन पाये।
संगीत के इन नायाब नगीनों में कुछ ऐसा है जो उनपर रचे प्रत्येक गीत को कालजयी बना देता है।
बहुत सुन्दर।

mamta said...

आज भी सुनने मे कितना मधुर है ये गीत मे।

इतने सुन्दर गीत को सुनवाने का शुक्रिया।

Lavanyam - Antarman said...

घुघूती जी, ममता जी, ज्ञान भाई सा'ब्,
गीत को पसँद करने का धन्यवाद --
सादर, स स्नेह,
- लावण्या
&
Harshad bhai,
You are right. 50 yrs has not diminished the luster & sparkle of this CLASSIC song !
Binaca Geetmala has enriched many lives by high quality music.
warm rgds,
L