ये तस्वीर रोजा पारकर , नामक महिला की है जिसने , श्वेत प्रजा के लिए सुरक्षित रखी बस की सीट पर बैठ कर, अश्वेतों के लिए , ऐसे क़ानून को मानने से इनकार कर दिया था
ऐसे क़ानून से , उसके अपने,
निजी मानवाधिकार का हनन हो रहा था ।
तभी से, रोजा पारकर , एक मिसाल बन गयीं थीं !
आज़ादी या स्वतंत्रता की लड़ाई इसी तरह,
निजी और सार्वजनिक स्तर पर लडी जाती है ।
डेमोक्रेसी में सर्व जन हिताय,
बहु जन सुखाय का विशेष ध्यान रखा जाता है ।
हरेक स्वतन्त्र देश में इस , बात का ख्याल रखा जाता है के
व्यक्ति और देश की स्वतंत्रता को आंच ना आने पाये ।
फ़िर भी, इस प्रयास में
कई रूकावटे और मुश्किलें भी आती ही हैं ।
स्वतंत्रता क्या है ? स्वातंत्र्य - दिवस क्या है ?
अजी , भारत के लिए २६ जनवरी और १५ अगस्त का जो महत्व है वही दुनिया के अन्य देशों के लिए,
साल के अलग दिवस पे रहता है ।
मेक्सिको का स्वतँत्रता दिवस है सेप्टेम्बर १६
हंगरी के लिए , अगस्त २० !
जिसे ...संत स्टीफन दिवस कहा जाता है और बुडापेस्ट में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है !
दान्युब नदी के किनारे पटाखोँ को रात्रिके काले आकाश मेँ छोडकर, प्रकाश से जगमगा दिया जाता है !
फ्रांस जुलाई १४ को आज़ादी का पर्व मनाता है !
१४ जुलाई को , पेरिस शहर जो फ्रांस की राजधानी है
वहां लोग खुशी से घूमते दीखलाई देते हैं ।
इंग्लैंड और समस्त यु के में गाय फॉक्स दिवस नवंबर ७ को मनाया जाता है ।
आयरलैण्ड और स्कॉट्लैंड तथा इंग्लैंड , मिलकर , यु के कहलाते हैं
ये सारे भूभाग , शामिल होते हैं और स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं ।
उत्तर अमरीका माने यु एस ऐ --
४ जुलाई को स्वाधीनता दिवस मनाता है और पूरे उत्तर अमरीकी राज्य में , इस दिन , बहुत बड़े पैमाने पे स्वाधीनता का पर्व मनाया जाता है । कल सभी को छुट्टी थी !
आप को बतला दूँ, इस दिन , यहाँ क्या क्या होता है !
अकसर, यहाँ , सुबह से ही , बारबेक्यू माने अंगीठी पे ,
बाहर खाना तैयार करके , दोस्तों के साथ और परिवार के साथ मौज मस्ती में , दिन गुजार के मनाया जाता है।
रात को काले होते आकाश को पटाखों से , प्रकाशित होता हुआ देखने सभी पहुँच जाते हैं ।
अमरीकी राष्ट्र गीत की धुन भी बेफीक्री और मौज से भरी हुई है !
उत्तर दिशा के प्रान्तों में रहनेवाले अमरीकी को यांकी कहते हैं गीत उसी पर है ,
Yankee Doodle went to town,
A-Riding on a पोनी
He stuck a feather in his hat,
And called it macaroni। :)
(क्लिक करें सुनिए ये गीत की धुन ) ~~
. Yankee Doodle : (by कैर्री रेह्कोप्फ)
और ये है अमरीका का जन गीत :
"The Star-Spangled Banner"The Star-Spangled Banner :
चित्र देखें :
http://www.rockyou.com/show_my_gallery.php?source=ppsl&instanceid=116813018
ये उत्तर अमरीकी नक्शा है ।
यहाँ के प्रमुख शहरों के नाम भी इस पर लिखे हुए हैं ।
The Statue of LIBERTY माने स्वतंत्रा की देवी !
जिस के सर पर बना मुकुट , आज फ़िर रोशनी से जगमगाने की व्यवस्था की जायेगी। उत्तर अमरीका के , पूर्वी शहर न्यू यार्क के अटलांटिक महासागर में , स्वतंत्रता की देवी की अति विशाल मूर्ति ,
स्वाधीनता का प्रतीक मानी जाती रही है ।
यूरोप से आनेवाले , पहले , प्रवासी - नागरिकों का स्वतंत्रता की देवी ने ही स्वागत किया था । हाँ, अश्वेत प्रजा को जबरन , उत्तर अमरीका के खेत - खलिहान और खदानों में काम करने के लिए, गुलामी के बंधन में कैद करके , लाया गया था उन्हें , स्वतंत्रता , उत्तर और दक्षिण के प्रान्तों में , हुई , सिविल वोर के बाद ही प्राप्त हुई । उसका श्रेय प्रेजिडेंट अब्राहम लिंकन को मिला ।
आख़िरकार , अश्वेतों के प्रतिनिधि , ओबामा , भी राष्ट्र - प्रमुख बने ।
आशा करें , अब , अश्वेतों के लिए भी ,
कई नए मार्ग , प्रशस्त होंगे ।
अमरीकी गरुड़ को अपनी स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं और ४ जुलाई को , खेल के मैदान में , गरुड़ को मुक्त आकाश में , उड़ान के लिए , खोल दिया जाता है और दर्शक ये द्रश्य देख खुश होते हैं !
न्यू यार्क शहर में बनी १०२ मंजिला इमारत भी अमरीकी गर्व का प्रतीक है अंपायर स्टेट बिल्डिंग ! ये मकान १०२ मंजिल ऊंचा है। इस मकान को जब बनवाया गया तब इसकी कुल लागत थी
$ ४० ,९४८ ,९०० !
इस मकान में , १ , ८६० सीढीयाँ ,
६ ,५०० खिड़कियाँ बनी हुई हैं और कई प्रेमी
इसकी सबसे ऊपर वाली द्रश्य दीर्घा गेलेरी
पे मिलना पसंद करते हैं ।
२ बार मैं ख़ुद भी इस स्काई स्क्रेपर की
१०२ वीं मंजिल पे पहुँची हूँ ।
जब मैं , पहली बार , गयी थी तब
आकाश से बर्फ झरने लगी थी ...
मानो आकाश कुसुम हमारा नये देश में स्वागत करने लगे ...
स्टेट बिल्डींग से आतिशबाजी का द्रश्य देखते हुए है आहा !! क्या नज़ारा है !! ऐसा भाव मन मेँ आता है ।
लिंक पे क्लीक करें : ~~
http://www.panoramas.dk/fullscreen2/full28.html
और ये तस्वीर है, अमरीका में , खान - पान माने ग्रोसरी खरीद कर लाते वक्त, ऐसी लोहे की गाडी में सामान रख कर , आप , अपनी गाडी तक, लाते हैं -- उसी का -- परिवार के साथ --
अब, इस धन संपन्न देश में , मनुष्य के साथ साथ, पालतू प्राणी के लिए भी , ख़ास दुकाने पशुओं के लिए भी , स्वादिष्ट , बिस्कुट तैयार करती है - एक जगह देखी थी कुतों के लिए बेकरी !! कुत्तों और बिल्लियों के लिए, ख़ास स्कूल भी होते हैं जहाँ उन्हें , शिष्ट और सभ्य बनाया जाता है !
;-)
उनके केश संवारने से लेकर, हफ्ते या महीने भर के लिए या एक दिन के लिए स्पा की व्यवस्था भी यहाँ मौजूद है !
कई तरह के बिज़नस हैं जी !
;-)
अमरीकी और भारतीय बच्चों में , एक फर्क ये देखा है , यहाँ अमरीका में बच्चे बहुत जल्दी प्रौढ़ हो जाते हैं । जिम्मेदारी निभाना सीख लेते हैं । काम का बोझा उनपे , १६ , १७ साल तक के होते ही लाद दिया जाता है ताकि वे अपना जिम्मा ख़ुद लें -
अपने खर्च से लेकर, अपनी शिक्षा , रहने, खाने पीने का इंतज़ाम , ख़ुद करें , ऐसा ही अमरीकी परेंट्स चाहते हैं । उसी के अनुरूप , बच्चों को तैयार किया जाता है ।
( परँतु भारतीय माता,
पिता अक्सर बच्चोँ की ज़िम्मेदारी निभाते रहते हैँ )
ये मैं, मध्य और उच्च वर्ग की बात कर रही हूँ -
- जो अनाथ या बहुत गरीब हैं,
उनके लिए सरकारी व्यवस्था होती है ।
एक बार मेरी बिटिया की ४ क्लास की पुस्तक में
ये वाक्य पढा था --
" अपनी खुशी तुम्हारे जीवन का मुख्य ध्येय होना चाहीये ! "
मैंने मेरे बच्चों को कहा, " इसके आगे ये भी जोड़ना जरुरी है,
" अपनी खुशी के लिए, दूसरों के मन को दुख भी ना पहुंचाया जाए
ये भी ध्यान रखना जरुरी है ! "
यहाँ, बच्चे वयस्क होने लगते हैं तब, घर के बाहर अमरीकी सभ्यता और दुसरे बच्चों का व्यवहार और अपने भारतीय घरों में हमारी अपनी सभ्यता से बसे घर का रहन - सहन, अलग लगने लगता है । उस समय, भारतीय सभ्यता की अच्छाईयां और यहाँ की कर्मठता और शिस्त्बध्धता को मिला जुला कर, अपनाई जीवन शैली का पाठ , भारतीय परेंट्स को , अगली पीढी को देनेका मुश्किल काम, करना पड़ता है ।
कई बच्चे बिगड़ते भी हैं । आज भारत में भी तेजी से बदलाव आ रहे हैं । कल की बात है, जब समलैंगिक रिश्तों को , मान्यता दी गयी । समाज व्यवस्था का भविष्य इस बदलते समय में , एक , प्रश्न , बन रहा है !
आगे क्या होगा ? रुढीवादी , परम्परा से लदे भारतीय समाज को अपनाए रखना हितवाह है क्या ?
या, बदलती मान्यताओं को , आगामी पीढी के लिए, हमें स्वीकार कर लेना चाहीये ?
ये प्रश्न अब, सिर्फ़ भारत के लिए नही, इस सिकुड़ कर ,
पास आ गए सम्पूर्ण विश्व के लिए, आवश्यक हो गया है --
समाज अपनी गति और रीति से आगे बढ़ता रहेगा और हमें , अपने लिए क्या हितकारी है ,
किस दिशा में हमारा "मंगल " है,
ये जानकर, आगे कदम रखने होंगे ।
-- लावण्या
















