Sunday, July 12, 2009

सुश्री सुब्बालक्ष्मी / .कैसे कैसे लोग आए और चले भी गए .............

Madurai Shanmukhavadivu Subbulakshmi (Tamil: மதுரை சண்முகவடிவு சுப்புலட்சுமி, Mathurai Caṇmukavaṭivu Cuppulaṭcumi
सुश्री सुब्बालक्ष्मी !
यही नाम है " भारत रत्न " से सर्व प्रथम विभूषित किए जानेवाली इस महान गायिका का !
इन्होने , तमिल, तेलेगु, संस्कृत , हिन्दी , मलयालम, , कन्नड़ , बंगाली , गुजराती और मराठी भाषाओं में भी गीत गाये थे ।
उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब उन्हें सदा "सुस्वरलक्ष्मी " कहकर बुलाते थे । सुश्री सुब्बालक्ष्मीजी का जन्म , सितम्बर १९१६ को मदुरै तमिलनाडु में हुआ था ।
उनका प्यार से बुलाया जानेवाला नाम था , "कुंजमा " !
१९४७ भारत स्वतन्त्र हुआ और उसी अरसे में "मीरा " राजपूतानी भक्त संत कवियत्री की जीवन गाथा पर आधारित फ़िल्म बनी जिसमे , सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी ने इतना सजीव पात्र निभाया था के लोग उन्हें आधुनिक युग की मीरा जी कहने लगे ।
" वेंकटाचल सुप्रभातम " सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी के द्वारा गाया गया और वही तिरुपति बाला जी की स्तुति स्वरूप आज भी मन्दिर में , बजता है ।
विष्णु सहस्त्र नाम , भज गोविन्दम, बाला जी पंचरत्न माला ये भी सुब्बालक्ष्मीजी के तपस्विनी के अमृत स्वर पा कर
हर श्रोता को आज भी अभिभूत करने में सक्षम हैं !
तमिल भाषी २०० प्रमुख व्यक्ति विशेष की जीवन गाथा में से
१ सुब्बालक्षमी अम्मा की भी है ।
( क्लिक करें )

http://www.tamilnation.org/hundredtamils/mssubbulakshmi.htm

पण्डित नरेंद्र शर्मा जी ने कई बरसों पहले दक्षिण भारत में जन्मी सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी की मीरा फ़िल्म के हिन्दी चित्रपट के लिए भी गीत लिखे थे ।
मीरा जी का पात्र , सुब्बालक्ष्मी जी ने , बखूबी निभाया था ।
सन था १९४७ !
१८ या १९ गीत से सजी इस फ़िल्म के लिए
संगीत दिया था
एस वी वेंकटरमण जी तथा रमानाथ व श्री नरेश भट्टाचार्य जी ने !
इस फ़िल्म के दीग्दर्शक थे एलीस आर डंकन !
तमिल भाषा में बनी अत्यन्त सफल "मीरा " के गीतों को
हिन्दी में बनी "मीरा " के लिए पण्डित नरेंद्र शर्मा ने गीत
कथा के अनुरूप लिख दिए थे ।
बसों मोरे नैनं में नंदलाल :
राधा जी के ह्रदय के भाव मीरा जी के भजनों में मुखरित हुए थे ।
( क्लिक करें )
Narendra Sharma : Meera baso more nainan mein

प्रेम, भक्ति , मुक्ति :
हाँ , यही नाम था उस रिकॉर्ड का जिसमे संगीत दिया था श्री ह्रदयनाथ मंगेशकर जी ने और गीत लिखे थे पण्डित नरेंद्र शर्मा ने और स्वर था
भारत कोकिला सुश्री लता मंगेशकर दीदी का !
http://www.raaga.com/channels/hindi/movie/HD000710.html
asharan sharane shyaam hare : अशरण शरने श्याम हरे

एक और फ़िल्म थी जीवन ज्योति , १९५४ में इस फ़िल्म का
निर्माण हुआ था और जिसके १ गीत के बोल हैं ,
" मन शीतल , नैना सुफल , जोड़ी जुगल सुहाई .....
ओ देखो , देखो , नज़र लग जाए ना "
जिसे संगीत्बध्ध किया था सचिन देव बर्मन जी ने और इस फ़िल्म के दूसरे गीत , साहीर साहब ने लिखे थे ।
नवकेतन बैनर में बनी फ़िल्म "आंधियां " जो स्मृति लोप बन गयी है उसका संगीत दिया था उस्ताद अली अकबर खान साहब ने जो अभी संगीत जगत को सूना कर चल बसे हैं ।
" घनश्याम के हैं, घनश्याम नयन
मन मोरा बना , मन मोर सखी "
ये गीत लिखा था पण्डित नरेंद्र शर्मा जी ने ...
स्वर दिया था श्रीमती लक्ष्मी शंकर जी ने !

आज इन महान कलाकारों को याद करते हुए ,
यही सोच रही हूँ, कैसे कैसे लोग आए और चले भी गए .............
जो आज हमारे साथ हैं, जैसे दीदी ( लतादी ) और ह्रदयनाथ भाई ,
और कई सारे ऐसे ही अविस्मरनीय नाम धारी कलाकार !
उन्हें हम , ना भूलें ...

क्यूंकि ये एक बहुत प्राचीन परम्परा और कला के प्रतिनिधि हैं ।

मेरी इससे पहले लिखी प्रविष्टी पर कई नए और पुराने
हिन्दी ब्लॉग जगत के साथी पधारे और कमेन्ट कर
मुझे अनुग्रहित किया उन सभी की आभारी हूँ ।
आते रहियेगा .........
आज कल ज़रा व्यस्तता बढ़ गयी है ,
कई नए आलेखों को देख नही पाई !
उसके लिए , माफी चाहती हूँ ..........
समय मिलते ही फ़िर आप सभी के साथ ,
फ़िर उसी तरह नियमित रहने की कोशिश करूंगी ।
तब तक ...........
आप सभी के लिए शुभकामना प्रेषित हैं ।
स स्नेह,
- लावण्या

25 comments:

निर्मला कपिला said...

सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी को विनम्र श्रधाँजली बहुत बडिया जानकारी के लिये धन्यवाद्

पंकज सुबीर said...

दीदी साहब आपके पास तो जानकारियों का खजाना है । इन्‍हें इसी प्रकार हमारे साथ बांटते रहिये । प्रेम भक्ति मुक्ति में गीत कहां हैं उसमें तो अमृत की बूंदें हैं जो कानों से होकर प्राणों में उतरती हैं ।

विवेक सिंह said...

सुब्बालक्ष्मी जी को श्रद्धान्जलि और आपको धन्यवाद इस लेख के लिए !

P.N. Subramanian said...

इस महान गायिका को हमारी भी श्रद्धांजलि. इनकी माताजी भी वीणा वादन में सिद्ध हस्त थीं. एनी जानकारियों के लिए आभार.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत अच्छी जानकारी दिया आपनें ,धन्यवाद.

राज भाटिय़ा said...

सुब्बालक्ष्मी जी को भाव भीनी श्रद्धान्जलि, ओर आप का धन्यवाद इस सुंदर जानकारी को हम तक पहुचाने के लिये

नीरज गोस्वामी said...

जितना सुन्दर रूप उतनी ही सुन्दर आवाज़...ऐसी विलक्षण प्रतिभा सदियों में पैदा होती है...
नीरज

दिलीप कवठेकर said...

दीदी अब आप पीछे नही हट सकती व्यस्तता के बहाने.

आपके पास जो जानकारी का खज़ाना है, वह प्रामाणिक और विश्वसनीय है.ओस की बूंदो समान आपके ये मधुर स्मृति क्षण सहेजने और हम जैसे जिग्यासू साथियों को बांटकर आपको भी अच्छा तो लगेगा ही, और साथ में हम भी धन्य हो जायेंगे.

हृदयनाथ जी के साथ कुछ क्षण बिताये थे, तो मेहसूस हुआ कि कितने विलक्षण प्रतिभा के वे धनी है. मीरा के गीतों पर कोई यादें?

Vinay said...

इस प्रस्तुति के लिए आपको बधाई,

धन्यवाद

---
प्रेम अंधा होता है - वैज्ञानिक शोध

mehek said...

bahut achhi jankari rahi.

Arvind Mishra said...

सुब्ब लक्ष्मी और पंडित नरेंद्र शर्मा जी से जुड़े इन संस्मरणों के लिए आभार

Udan Tashtari said...

बहुत अच्छी जानकारी!

शोभना चौरे said...

apki hr ak post dhrohar hai .sushree sublakshmiji ko shrddhanjali .
apko dhnywad jo itni jankari ham tk phuchati hai .
dhnywad

रंजना said...

इनलोगों को विस्मृत करना सहज नहीं..........

इतने सुन्दर और जानकारीपरक आलेख के लिए बहुत बहुत आभार.

shama said...

Kayeeyon ke ajaramar rahnekee dua kartee hun..Lata deedee unmese ek hain..!

Wo nahee to mere jeewan me sur nahee...

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डॉ .अनुराग said...

ऐसा लगता है ..आपके पास बैठकर कभी ढेर सारी यादो को टटोलना पड़े तो कई दिन गुजर जाये ....चलती फिरती यादो का एक समुंदर आपके पास है....

Gyan Dutt Pandey said...

इन सभी बड़े नामों को सुन पढ़ कर मन में श्रद्धाभाव स्वत जगता है।
आपकी पोस्ट के लिये बहुत धन्यवाद लावण्याजी।

कंचन सिंह चौहान said...

jaankaari se bhari post

Alpana Verma said...

भारत रत्न सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी को नमन.

आप की हर पोस्ट यादों के स्वर्णिम मोती लिए होती है.
ऐसा लगता है उस युग में पहुँच गए हैं.

[आप व्यस्तताओं के बावजूद अपनी यादों को बाँट रही हैं यही क्या कम है.
बाकि सब की पोस्ट तो जब समय मिले तब पढ़ ही लिजीयेगा.लेकिन यादों के खजाने से अनमोल जानकरियां हमसे शेयर करती रहियेगा.]

प्रकाश पाखी said...

आदरणीय दीदी
आपके ब्लॉग पर वो दुर्लभ खजाना मिलता है जिसे आज हम अगर चाहें तो भी नहीं पा सकते..उस समय के हस्तियों के बारे में जानकार रोमांचित हो जाता हूँ..
आभार स्वीकारें
प्रकाश.

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

आदरणीय दीदी
आपके ब्लोग पर जब भी आता हू तो जाने का मन ही नही करता। आप द्वारा लिखि विभिन्न यादो मे मै समाहीत हो जाता हू। अब देखीए ना आप ही, सुश्री सुब्बालक्ष्मीजी की आपने जो जानकारीया दी वो इस जगत की बहुमुल्य निघि को आपने हम पाठको के बीच बडी ही सहज सरल आत्मयता से पिरो कर प्रस्तुत किया यह ही सबसे बडी सलामी या श्रधाँजली " भारत रत्न सुश्री सुब्बालक्ष्मीजी के लिऐ। वास्तव मे वो एक महान गायिका थी। जिन्होने तमिल, तेलेगु, संस्कृत , हिन्दी , मलयालम, , कन्नड़ , बंगाली , गुजराती और मराठी भाषाओं में भी गीत गाये थे । आपने उनके बारे मे विभिन्न जानकारीया दी जो मुझे इससे पुर्व ज्ञात नही थी। आपके इस योगदान के लिए मै आपको भी प्रणाम करता हू दीदी।

हार्दिक मगलभावनओ सहित
हे प्रभू यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आप सभी की
स्न्हेहपूर्ण टीप्पणियोँ के लिये
बहुत बहुत धन्यवाद
स स्नेह,
- लावण्या

मुकेश कुमार तिवारी said...

लावण्या जी,

सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी को विनम्र श्रृद्धाँजलि!

श्री वैंकट भजनमाला (सुश्री सुब्बालक्ष्मी जी के स्वर में ) से सुबह की शुरूआत मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा है। मैं ऐसा मानता हूँ वह अलौकिक आवाज़ जब भी गूंजती है तो कितना ही निष्ठुर मन हो एक बार भक्ति-भाव जाग्रत हो ही जाते हैं।

बहुत ही सिलसिलेवार जानकारी पूरी रोचकता के साथ।

आभार,

मुकेश कुमार तिवारी

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

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