Friday, February 26, 2010

आ प सभी को " हो ली की भी , बहुत बहुत शुभ कामनाएं "

आज होली के पर्व पर कुछ बातें , समाज से जुडी ,
मनोमंथन - सी , मेरे मन में , उभरीं हैं
और सोचा, आप सब के संग साझा करूं .


एक ग़ज़ल : " सुफेद रंगों में रंग भरना , कोई तो सीखे "


बचपन के दिन , वो घर , वे लोग , वो प्यार और अपनापन । वे त्यौहार वे हंसी के पल , यादों में आबाद तो हैं , पर अब वो भारत वाली , अपनी सी बात , अब नहीं है !

जब् हम छोटे थे, तब अकसर, हम से बड़ों के पैरों के पास, अदब से बैठा करते थे ।

उन बातों के बीते हुए एक ज़माना बीत गया है । वर्तमान ने , ईश्वर के प्रसाद रूपी
फल भी कृपा कर , मेरी झोली में डाल दिया है । जिसे सहेजे सहेजे, यादों में , अपने शैशव के दिनों में , जम कर खेली " होली " की यादें , साकार किये , भारत भूमि को याद कर रही हूँ

Do See this Link :

और मेरे हिन्दी जगत में फैले अनगिनत हमसफ़र परिवारों को

मेरी शुभकामनाएं " प्रेषित कर रही हूँ।

" होली आयी रे कन्हाई , रंग छलके सुनादे जरा बांसुरी " --
" मधर इंडीया" फिल्म के पुराने गीत से चल कर , आज के दौर के गीत
" होली के दिन दिल खिल जाते हैं , रंगों में रंग मिल जाते हैं "
शोले फिल्म का गीत
और" लेट्स प्ले होली " , " वक्त " फिल्म का गीत - तक
संगीत , नाच और मन की मौज , गुलाल और गुझीये ,मूंग दाल के गरमागरम पकौड़े के साथ होली की याद ,भारत को साकार करती आ खडी हुई है.

ईश्वर प्रसाद रूपी फल : मेरा ग्रेंड सन नोआ



किसी भी समाज में मनाये जानेवाले उत्सव और त्यौहार , जन मानस को जोड़ने का , हमारी परम्पराओं को एक पीढी से दूसरी तलक ले जाने की महत्त्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं ।
भारत के अपने त्यौहार हैं और परम्पराएं हैं। भारतीय मूल के लोग जहां कहीं भी बसे , इन्हें , जीवित रखने का कार्य किया है । पर वो भारतवाली बात नहीं रहती, ये भी सच है ।
पश्चिमी मुल्कों की अपनी विशिष्ट परम्पराएं हैं । एक अलग जीवन शैली है जिसे जब् भी लोग मिलते जुलते हैं तब अकसर आदान प्रदान होने से उन्हें भी अपना लिया जाता है ।
जैसे इस चित्र में देखिये - चाचा नेहरु , अँगरेज़ महिला लेडी माऊंट बटन के संग , हवाई यात्रा के दौरान धूम्रपान का आनंद ले रहे हैं ! ये , यहां के वातावरण में बहुत सहज , सामान्य द्रश्य ही समझा जाएगा ।
परंतु भारत के लिए अजीब सा लगेगा।
जब् नोआ के स्कूल में पेरेंट्स डे था और मैं भी अभिभावक के रूप में , वहां गयी तो आश्चर्य हुआ । जब् देखा के नोआ की सहपाठिका एक नन्ही बची ' सवेना ' के पिता, ( जो पुलिस हैं, ) पिस्तोल , कमर में लटकाए आये थे और बच्चे सहजता से उनसे लिपटकर बातें कर रहे थे ।
जिसे देख , सोचने लगी के ये भारत में रहते हुए शायद कम ही मौक़ा पड़ता के ऐसे किसी को आसानी से पिस्तोल लटकाए देख पाते , जिसे ३ , ४ साल के बच्चे यहां अमरीका में , एक आम घटना की तरह, रोज ही देखते हैं । फर्क है और कई तरह के फर्क हैं ये भी एक बहुत बड़ा , सच है ।
तो सो टके की बात यही के ' हर मुल्क की अपनी अलग तहजीब और एक अलग - सा माहौल होता है। '
आज होली के त्यौहार को याद करते हुए समाज और उनमे फ़ैली सामाजिक विषमताओं , कुछ लोगों के जीवन में , आयी विषम परिस्थितीयों पर ध्यान केन्द्रीत हो गया है ।
अमरीकी मीडीया में , कोइ न कोइ समाचार खूब सुर्ख़ियों में उभरता है और दिनभर उसी पर , कई तरह की बातों को दोहराया जाता है। जैसे पिछले दिनों ,गोल्फ के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी टाईगर वूड्ज़ के बारे में , मामला सामने आया। उनकी अनगिनत प्रेमिकाएं , उनसे जुड़े किस्से दिनभर केंद्र में रहे ....
अब वे मानसिक चिकित्सा के लिए " रीहेब " ( Rehabitilation )
माने = आदत सुधारने में मदद करनेवाली, उपचार करनेवाली संस्था में ,
अपने आप को दर्ज करवा के चिकित्सा ले रहे हैं । कोइ शराब के लिए तो कोइ ड्रग्स के लिए भी ऐसे रीहेब की शरण में चले जाते हैं। पश्चिमी सभ्यता की असर भारत के महानगरों में फैलती हुई अब छोटे शहरों से होती हुई तेजी से फ़ैल रही है। शराब पीकर , अपना जीवन व्यर्थ में गंवाना ये कोई WESTERN CULTURE की exclusive देन नहीं है।
ये भारत में पहले भी होता था परंतु ड्रग्स , समलैंगिकता का खुला प्रदर्शन ,
खुला प्रेम प्रदर्शन - Modern Pub culture & open life style
इत्यादी ये अब पश्चिम की नक़ल के रूप में , ज्यादा खुलकर , सामने आने लगा है ।
शायद , मुझे ज्यादा पता नहीं परंतु सुनने में यही आ रहा है। कई कलाकार ऐसे कई अलंकरणों से , इनामों से और एवार्ड से नवाजे जाते हैं।जैसा इस नीचे के चित्र में स्वर साम्राग्नी लता जी का अभिनन्दन किया जा रहा है। तो कई कलाकार गुमनान अभिशप्त ज़िन्दगी जी कर बदनामी और बदकिस्मती के अंधेरों में खो जाते हैं। ऐसा भी होता है 
तब यही भास् होता है के सारा नियति और माया के हाथों, कठपुतली का रचाया खेल ही खेल रहे हैं
" सबहीं नचावत राम गुंसाई " श्री राम भी मनुज तन धर कर अपने पात्र के अनुरूप बिलखे और सती सीता की खोज में बन प्रांतर में भटके हैं।क्या अजीब है मानव जीवन का खेल और हम सब की जीवन लीला !
सागर नाहर भाइस'सा , अकसर संगीत से जुडी बढ़िया प्रविष्टी लेकर उनके जालघर पर प्रस्तुत करते हैं ।
आप एक सच्चे संगीत रसिक और संगीत की देवी के पुजारी हैं ..
आज उनके जालघर पर एक पोस्ट पढी : http://mahaphil.blogspot.com/

कुछ दिनों पहले मास्साब पंकज सुबीर जी के चिट्ठे पर, महान गायक पं कुमार गन्धर्व के सुपुत्र ,पं. मुकुल शिवपुत्र के बारे में पढ़ा था कि, कुमार गंधर्व के सुपुत्र मुकुल शिवपुत्र, शराब के लिए भोपाल की सड़कों पर दो- दो रुपयों के लिए भीख मांग रहे हैं। :-(((
यह समाचार पढ़ कर मन बहुत आहत हो गया। एक महान कलाकार के सुपुत्र पण्डित मुकुल शिवपुत्र जो स्वयं खयाल गायकी में बहुत जाने माने गायक हैं , कि यह हालत ! खैर, अब पता नहीं मुकुल जी कहां है किस हालत में है?
:-((
गायक श्री मुकुल शिवपुत्र की जीवन गाथा से मिलती जुलती कथा फिल्म " साज " में दीखलाई गयी है । जिसका ये गीत देखिये " साज़ " फिल्म का ये गीत सुनकर मानों मेघ मल्हार अनेकों फुहारों से चहुँ ओर ,

फुहार करने लगे ।

और मन द्रवित हो गया ये सारी कथा पढ़कर :-( फिर हमारे गुणी अनुज पंकज जी के जालघर पर भी कुमार गंधर्व के सुपुत्र मुकुल शिवपुत्र शराब के लिए भोपाल की सड़कों पर दो- दो रुपयों के लिए भीख मांग रहे हैं।
यह समाचार पढ़ कर मन बहुत आहत हो गया ।

माँ भगवती, देवी सरस्वती के साधक के पुत्र की यह दुर्दशा का कारण मदिरा है ! ? !
सुनकर, मन न जाने कैसा हो रहा है। माँ , पूजा स्वीकारें और एक भटके हुए पुत्र को अपनी दया से, पुन: स्वस्थ करें , ये मेरी सच्चे मन से की हुई प्रार्थना है।


याद आ रहा है मेरी कोलिज का सहपाठी दोस्त -- गुलजीत -- जो इसी तरह शराब और ड्रग्स के कारण , ३० वर्ष का होते ही , प्राण गँवा बैठा था ! :-((
कितना कुशाग्र था वह दुनियाभर की हर बातों से वाकिफ , मौजी, हंसमुख , मिलनसार और निर्भीक !
पर , शराब की आदत उसे ले डूबी ! माता , पिता हर प्रयास कर हार गये - रीहेब में भेजा
तो थोड़े दिनों तक सुधार रहा और फिर वही , गाडी, पटरी से उतरी .....और उतरती गयी ...और जान गयी !!
हम लोग सहम जाते थे उसकी बातें सुनकर और अपार दुःख होता था
आज वो नहीं है । परिवार वालों के दिल के टुकड़े हो गये मन तार तार
हो गया पर किसे दिखाई नहीं दिया ! :-((
क्या करना चाहीये ? है कोइ , जो अपने जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद , 
समय निकाले, परिश्रम करे और डूबतों को सहारा देकर  हाथ थाम ले ?
शायद मधर टेरेसा इसीलिये महान हैं के अपने खिर्स्ती धर्म का पालन करते हुए,
उन्होंने अनगिनती रोगी और पीड़ित , समाज से तिरस्कृत , एक बहुत विशाल मानव समुदाय को हाथ बढ़ाकर थामा। हम में से कोइ , ( बातों के अलावा ) क्या कोइ ठोस कार्य कर पाता है ?
नहीं जी ये काम बहुत मुश्किल है ।
चलिए आज उत्सव है , रंग बरस रहें हैं । कहाँ ये दुखी करने और होने का राग अलाप रही हूँ !!
दुनिया ऐसे ही चलती रहेगी। आप सभी को, वर्ष २०१० की होली के आगमन के पूर्व,
( फरवरी माह पूरा होने को है )
आईये स्वागत करें " मार्च " महीने का नये रंगों को लेकर आये , खुशियाँ बिखेरता हुआ आये ये कहते हुए , अभी आज्ञा लेती हूँ।मन का मेल धुल जाए और हर विषाद घुल जाए ये कामना करते हुए,
गुलाल का टीका , सस्नेह, माथे पर लगाए देती हूँ .............

-- लावण्या

27 comments:

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

लावण्या जी, आपको भी सपरिवार होली की बहुत बहुत शुभकामनाऎँ!!!!

संगीता पुरी said...

आप अपनी प्रविष्टि को इतना रोचक .. इतना सुंदर कैसे बना लेती हैं .. आपकी कल्‍पना शक्ति का जबाब नहीं .. इतने सारे प्रसंग होते हैं इनमें .. लेकिन सबको बुनकर सिलसिलेवार चलती रहती हैं .. आप सबों को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं !!

'अदा' said...

sangeeta ji ne laakh take ki baat kahi hai..bilkul sach..sachmuch aap itna sundar bun deti hain saare prasang ki ham lajwaab ho jaate hain..
bahut sundar...aapko holi ki bahut bahut shubhkaamna..
aur naati ko bahut bahut pyaar..

Udan Tashtari said...

सागर की लहरों सम हिंडोले खिलाती पोस्ट..कही बरबस मुस्कराहट तो कहीं आँखों में नमी..बहुत कुछ बतलाती, बहुत कुछ सिखाती पोस्ट.



आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

RaniVishal said...

Holi ke is awasar par jivan ke kai sacche rango se saji post ke liye dhanywaad!
Aapko bhi holi ki hardik shubhkaamnaae!

राज भाटिय़ा said...

लावण्या जी, आपको ओर आप के पुरे परिवार को होली की बहुत बहुत शुभकामनाऎँ

M VERMA said...

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ,
विषमताओं को रेखांकित करती पोस्ट
बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सुन्दर और सटीक पोस्ट!
होली की शुभकामनाएँ!

Arvind Mishra said...

कितने रंग हैं होली के और कहाँ बदरंग हुयी होली -आपने एक समग्र दर्शन करा दिया -

"किसी भी समाज में मनाये जानेवाले उत्सव और त्यौहार , जन मानस को जोड़ने का , हमारी परम्पराओं को एक पीढी से दूसरी तलक ले जाने की महत्त्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं -"
कितनी सही बात कही है आपने -
आपकी आज की यह पोस्ट होली -२०१० की अमूल्य धरोहर है ! कई होलियाँ आयेंगी जायेगीं मगर इस पोस्ट का रंग न उतरेगा !

श्यामल सुमन said...

होली के हर रंग का चर्चा बिल्कुल खास।
पोस्ट बहुत अच्छी लगी अच्छा लगा प्रयास।।

होली की शुभकामनाएं।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

बेचैन आत्मा said...

आप जितने परिश्रम से एक-एक पोस्ट लिखती हैं वह अनुकरणीय है.
...आभार सहित होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ.

हृदय पुष्प said...

प्रशंसनीय - होली "मंगल-मिलन" की हार्दिक शुभकामनाएं

दीपक 'मशाल' said...

बहुत ही उच्चकोटि की पोस्ट देने के लिए आभार मैम.. मुकुल शिवपुत्र के बारे में यही कहूँगा कि ये उनको उनके उन कुकर्मों की सजा है जिनके बारे में दुनिया नहीं जानती सिर्फ उनका परिवार जानता है और चंद करीबी लोग.. सिर्फ कला ही सबकुछ नहीं होती.. माँ सरस्वती निवास करने से पहले मन की शुद्धता भी देखती हैं..
आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनायें..

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत खूबसूरत और संग्रहनीय पोस्ट.
आपको होली की शुभकामनायें.

निर्मला कपिला said...

रोचक और संग्रहनीय पोस्ट है मैने बूकमार्क कर ली है। पता नही आप इतना कुछ कैसे एक ही बार मे पर्स्तुत करती हैं कि पढने वाला हैरान हो जाता है बस यहाँ से जाने का मन ही नही होता। आपको भी सपरिवार होली की बहुत बहुत शुभकामनाऎँ

डॉ .अनुराग said...

होली की ढेरो शुभकामनाये ओर नोया को ढेर सारा स्नेह....

rashmi ravija said...

एक संग्रहणीय पोस्ट है यह....सारे रंग समेटे हुए...बहुत ही अच्छी तरह आपने यादों के मोती को इतने सुन्दर तरीके से पिरोया है..लाज़बाब
नोवा को ढेरों आशीर्वाद और आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं

अभिषेक ओझा said...

होली की शुभकामनायें. ड्रग्स और दारु से तो अच्छे-अच्छे बर्बाद हो जाते हैं !

खुशदीप सहगल said...

पोस्ट पर तो बस इतना ही कहूंगा...
सत्यम, शिवम, सुंदरम...

लेकिन मुझे नोआ ने तो क्लीन बोल्ड कर दिया...

जय हिंद...

ताऊ रामपुरिया said...

आपको होली पर्व की घणी रामराम.

रामराम

sangeeta swarup said...

आपका लिखा पहली बार पढ़ रही हूँ...मन अभिभूत है...सुन्दर संस्मरण...और बहुत से प्रसंगों से सजी हुई पोस्ट...बधाई
होली की शुभकामनायें

सुलभ § सतरंगी said...

गहन और रोचक पोस्ट ..
---
मन मोरा झकझोरे छेड़े है कोई राग
रंग अल्हड़ लेकर आयो रे फिर से फाग

आपको होली की रंरंगीली बधाई.
- sulabh

प्रकाश पाखी said...

आदरणीय लावण्या दी!
कितने सुन्दर तरीके से आपने पोस्ट में अपनी कोमल संवेदनाओं को पिरो दिया है.बहुत अच्चा लगा!
आपको और आपके परिवार को होली की ढेरो शुभकामनाए!
प्रकाश

दिलीप कवठेकर said...

दीदी, आपने हमेशा की तरह अलग अलग विषयों पर लिख कर अलग अलग रंग भर दिये हैं आजकी पोस्ट में.

मुकुल शिवपुत्र मात्र अपने हीं किसी कर्मों का फ़ल भोग रहें है.

Manish said...

सुन्दर..........होली मुबारक!!!!

Harshad Jangla said...

Lavanya Di

As usual, wonderful and colorful post with great info/pic/links.
Thanx and rgds.

-Harshad Jangla
Atlanta, USA

bhawna said...

पहली बार आपके ब्लॉग पर आ पहुँची हूँ.......
बहुत सुंदर और भावपूर्ण है, आशा करती हूँ होली बहुत सी खुशियाँ दे गई होगी......शुभकामनाएँ।