Friday, January 28, 2011

अमरीकी समाज का महत्त्वपूर्ण अंग है, अमरीका का राष्ट्रीय खेल - फूटबोल जहां ३० सेकण्ड के टेलिविज़न विज्ञापन की कीमत २.६ मिलियन डालर....

अमरीकी समाज का महत्त्वपूर्ण अंग है, अमरीका का राष्ट्रीय खेल - फूटबोल जहां ३० सेकण्ड के टेलिविज़न विज्ञापन की कीमत २.६ मिलियन डालर....
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देश व समाज अभिन्न हैं . हरेक देश के अपने अनूठे त्यौहार , खेलकूद , लोकप्रिय संगीत , खान पान से जुडी प्रथाएं , अपने अलग रस्मो रिवाज भी होते हैं ...जो उस देश कि संस्कृति के अविछिन्न चिन्ह कहलाते हैं ...
हम भारतीय प्रजा के लिए , सर्वप्रिय है - क्रिकेट, सिनेमा , पान , मनोरंजन के लिए सुगम संगीत इत्यादी ...जिस प्रकार , भारतीय प्रजा इन साधनों का आनंद लेती है उसी तरह , चीन या रशिया तथा यूरोपीय प्रांतीय समाज भी अपने अलग प्रकार के मनरंजन के साधन जुटाती है इस तरह हर समाज, अपने अपने विशिष्ट सांस्कृतिक अंगों द्वारा , अपनी अलग पहचान बनाकर , अपने देश व समाज का परिचय , बाहर से आनेवालों को करवाता है ...
ठीक इसी तरह, अमरीकी जनता के मानस मे , " प्रतिद्वंदीता " या स्पर्धा का भाव , स्वभाव मे बसा हुआ है ...
अमरीकी, इस जन्मजात स्पर्धा भाव को स्वभाव मे बसाए हुए , विश्व के सिरमौर बने रहने के प्रति आकृष्ट रहते हैं और साथ साथ, देश प्रेम का जज्बा भी अमरीकीयों मे प्रबल है ...
अमरीकी जनता का स्वभावगत झुकाव इसी स्पर्धाभाव के जरिए, फूटबोल जैसे भीषण प्रतिस्पर्धा की भावना से भरे हुए खेल मे प्रकट हुआ है अमरीकी समाज की विशिष्टता , अमरीकी खेल कूद तथा जीवन शैली मे भी उजागर है ...उसी का एक रूप ' फूटबोल ' का अमरीकी ढंग से खेलाजाने वाला यह गेम भी है ..
अमरीकी खेल कूद व प्रतियोगिता यह भी , अमरीकी समाज का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग है I

आज आपको , अमरीका के राष्ट्रीय खेल अमेरीकी फूटबोल के खेल के बारे मे , कुछ रोचक बातें बतलाएं ........
यह खेल , यूरोप मे रग्बी के नाम से जाने वाले खेलों से आरम्भ हुआ -
पूर्व रूप रग्बी के खेल ने यूरोप से चलकर अमरीका भूखंड को आबाद करनेवाली यूरोपीय नस्ल की प्रजा को नयी धरती पर लाकर , बदलाव के बाद , फूटबोल का स्वरूप देते हुए स्थापित किया
इस प्रकार , उत्तर अमरीका का राष्ट्रीय खेल फूटबोल नयी धरती पर ,नये रूप मे , आरम्भ हुआ था I
सन १८९२ मे , विलियम ' पज ' हेल्फींगर नामक खिलाड़ी को $ ५०० मे फूटबोल के खेल के लिए , अनुबंधित किया गया था जो, उस वक्त के लिए , बहुत बड़ी रकम थी I
१९ वी शताब्दी और २० वी सदी मे , अमरीका मे , कोलेज या विश्व विद्यालय के स्तर पर फूट बोल खेला जाने लगा और समय बीतते यह खेल, अधिकाधिक लोकप्रिय होता गया I एन ऍफ़ एल के नाम से सन १९२० मे , फूटबोल खेल को सुव्यवस्थित और संगठित करने के हेतु से न्फ्ल संस्था की स्थापना की गयी थी I
तद्पश्चात सन १९५८ मे NFL द्वारा आयोजित, सर्व प्रथम , अत्यंत सुप्रसिध्ध हुई प्रतियोगिता का आयोजन हुआ और एस सफल स्पर्धा ने , फूटबोल को अमरीका का राष्ट्रीय खेल बनाने का कार्य किया I
सन १९६० मे , ए ऍफ़ एल नामक एक और संस्था बनी परंतु बाद मे , AFL व NFL को एक कर दिया गया और अब फूटबोल के खेल का आधुनिक व सब से प्रसिध्ध ' सुपर - बोल ' स्वरूप कायम हुआ I
आज अमरीकी विश्व विद्यालयों मे , छात्रों को अपनी खेल क्षमता के आधार पर , दाखिला मिलने मे , आसानी होती है और अच्छे फूटबोल के खिलाड़ी , अपनी यूनिवर्सिटी या कोलेज के , प्रभावशाली छात्र कहलाते हैं I
सन १८६९ मे , रटगर्ज कोलेज और प्रिंसटन के बीच जम कर मुकाबला हुआ था और इस खेल प्रतियोगिता ने छात्रों और आम जनता के मन को आकर्षित करने मे अत्याधिक सफलता हासिल की थी I
सन १८८३ से १८८० तक फूटबोल के खेल से सम्बंधित कायदे और नियम लगभग तय हो गये थे I

येल विश्वविद्यालय के एक छात्र , " वोल्टर केम्प " को, कई तरह के खेलों मे निपुणता हासिल थी ..जैसे कि , सोकर, बेसबोल का खेल जो अमरीका का क्रिकेट की तरह खेल है पर भारतीय क्रिकेट से अलग है ये सभी खेलों मे , वोल्टर केम्प , निपुण थे परन्तु फूटबोल के खेल मे उनकी दक्षता ने वोल्टर को ' अमरीकी फूटबोल के खेल के पितामह ' का खिताब दिलवाया -- चूंकि वे फूटबोल के खेल के बड़े ही कुशल खिलाड़ी थे और सन १९०४ तक आते आते , फूटबोल की प्रसिध्धि बढ़ने लगी और रात्रि मे विशाल बिजली की रोशनी से झगमगाते स्टेडीयम माने खेल के मैदान मे भी फूटबोल का आयोजन अब आरम्भ हुआ I
चित्र - वोल्टर केम्प का ..
File:Walter Camp - Project Gutenberg eText 18048.jpg
अमरीकी प्रजा के स्वभाव मे , प्रतिद्वंदीता या स्पर्धा की भावना अत्याधिक प्रबल है जो फूटबोल जैसे खेल मे ख़ास द्रष्टिगोचर होती है

भूतपूर्व अमरीकी रास्ट्रपति थीयोडोर रूझवेल्ट ने खेलों मे हिंसा या मारपीट की घटनाओं का , कडा विरोध करते हुए खेल बंद करने की धमकी दी थी जब् किसी एक प्रतियोगिता मे १९ खिलाड़ी घायल हो गये थे तब कड़े नियमों को खेल मे , शामिल किया गया और सन १९३० तक आते आते फूटबोल के खेल का आधुनिक रूप स्थायी हुआ I
उत्तर अमरीकी प्रदेश मे , हर वर्ष , १ जनवरी के दिन, अंतर कोलेज फूटबोल प्रतिस्पर्धा ' रोज़ बोल ' के नाम से आयोजित की जाती है जिसमे " टूर्नामेंट ऑफ़ रोज़ेज़ परेड " , केलीफोर्नीया प्रांत मे , नये साल की अगवानी करते हुए , संपन्न किया जाता है
यह , अमरीकी समाज का महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है जो आम जनता को टेलीविजन के माध्यम से जोड़ता है और खेल आरभ होने से पहले , अमरीका का सु - प्रसिध्ध गायक , अमरीकी राष्ट्र गान गाकर खेल का उद`घाटन करता है ...
इन खेलों के हितैषी " स्पोंसर " कहलाते हैं और खेल प्रसारण के लिए , बहुत बड़ी धन राशि देकर , टेलीवीज़न चैनल्स इन खेलों के प्रसारण का हक्क ,अपनी चेनल के लिए , हासिल करते हैं और विज्ञापन प्रसारण द्वारा तगड़ा नुनाफा बटोरते हैं ..

अत: अब ये फूटबोल एक खेल न रह कर, बहुत विशाल व्यवसाय बन चुका है ...
दूसरा सर्वाधिक प्रसिध्धि पाया फूटबोल का खेल , ' सुपर बोल ' कहलाता है और पहला सुपरबोल जनवरी १५ के दिन सन १९६७ मे खेला गया और हरेक सुपर बोल के खेल को , यादगार बनाते , रोमन शैली के अँक - दीये जाते हैं I
अब २०११ , फरवरी की ६ तारीख को , इस वर्ष के " सुपर बोल के खेल होंगें जिनको - Super Bowl XLV -कहा जाएगा ...
यह खेल , टेलीविजन द्वारा सबसे ज्यादह प्रेषक संख्या बटोरनेवाला खेल होगा जिसकी टीम ' कावबोयज़ , पैकर्स, स्टीलर्स , पेटरीअट्स जैसे नामों से पहचानी जातीं हैं और इन के खिलाड़ी , मिलियनो डालर की आमदनी करते हैं ...
ओलिम्पिक खेलों की तरह जिस शहर को सुपर बोल के आयोजन का मौक़ा मिलता है , वहां अमरीका के हरेक प्रांत से जनता दौड़ी चली आती है और समूचा अमरीकी गणराज्य सुपरबोल के दिन छुट्टी बिता कर , परिवार व मित्रों के साथ ,पास्ता , चिप्स , पीत्ज़ा , बर्गर, Hot Dog , आइसक्रीम , ऐप्पल पाई जैसे अमरीकी भोजन खाते हुए प्रसन्नता से हरेक घर के टेलीविजन तथा हर सार्वजनिक स्थान पे , ये ' सुपरबोल ' के खेल को दिलचस्पी के साथ देखता है ..मजे लेता है ...
सुपर बोल की ट्रोफी चित्र मे है देखें ...Super Bowl 29 Vince Lombardi trophy at 49ers Family Day 2009.JPG
अमरीकी मे मध्य प्रांत , जिस भूखंड पर आबाद हैं वहां जितने भी गणराज्य हैं , वहां फैक्ट्री , कारखाने, उद्योग इत्यादी की बहुलता है और वहां की कर्मठ और उद्यमी प्रजा शारीरिक रूप से अत्याधिक सबल है यहां से चलकर आया , यह फूटबोल का खेल , प्रांतीय खेल न रह कर , अब एक विशाल पैमाने पे आयोजित , राष्ट्रीय खेल बनने मे सफल रहा है I
आज अमरीका मे हरेक प्रांत की अपनी टीम है जिनके नाम सुप्रसिध्ध हैं और कोलेज या विद्यालयों की टीम भी आपस मे, तगड़ी प्रतिस्पर्धा करतीं हैं I

आम अमरीकी जनता से , अगर आप उनके मन से सीधा मन का संपर्क रखना चाहें तो आसान यही है कि आप , फूटबोल मे आज कौन सी टीम जीती या कौन हारा उस पे चर्चा शुरू करें ! अमरीका मे एक कहावत है ' अमेरीकी माने बेस बोल का खेल, मा और ऐप्पल पाई ! पर धन राशि उपार्जन की द्रष्टि से , फूटबोल ही सबसे ज्यादा आय तथा वित्त वितरण करनेवाला खेल है जिसमे सन २०१० मे महज , ३० सेकण्ड के टेलिविज़न विज्ञापन की कीमत २.६ मिलियन डालर तक थी ऐसा सी बी एस टी वी चेनल वालों का कहना है ....
ब फरवरी माह आरम्भ होते ही , अमरीकी जनता , कौन सी टीम जीतेगी और कौन सा खिलाड़ी , फूटबोल के करतब दिखाकर ' प्लेयर ऑफ़ ध यर ' का खिताब हासिल करेगा , इसका इंतज़ार है ....और हां इस साल पीट्सबर्ग शहर की टीम स्टीलर और ग्रीन बे की टीम पेकर के बीच यह जनता के मनोरंजन का खेल ६ फरवरी को होगा .....

Super Bowl XLV

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Pittsburgh Steelers vs. Green Bay Packers
Sunday, February 6, 2011 - 6:30pm ET on FOX
www.nfl.com

8 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

राष्ट्रीय महत्व का विषय, अर्थोद्गम का चरम भी।

P.N. Subramanian said...

अमरीकी फूटबाल की इस रोचक जानकारी के लिए आभार.

मनोज कुमार said...

बहुत ही रोचक लगी यह रचना।

Arvind Mishra said...

साकर क्यों कहते हैं लावण्या जी ?

डॉ. मनोज मिश्र said...

रोचक जानकारी के लिए आभार.

गुड्डोदादी said...

इसी सुपरगेम में ही २.६ मिलियन डालर है विज्ञापन का मूल्य
७२ वर्ष की हूँ परिवार की धमाचौकड़ी बहुत होगी खाना अपने भारत की ही पकेगा आलू पूरी हलूया

DR. ANWER JAMAL said...

Nice post.
अगर आप 'प्यारी माँ' ब्लाग में एक लेखिका के तौर पर जुड़ना चाहती हैं तो कृप्या अपनी email id रवाना करें
eshvani@gmail.com
पर ।

प्यारी माँ

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

रोचक जानकारी लावण्या जी!