Thursday, July 7, 2011

“दिलसे दिल तक” - देवी नागरानी जी और शिकागो मे मनाया विवाहोत्सव

महरिष गुंजार समिति द्वारा आयोजित किये गये समारोह में श्री पी शर्मा“महरिष” जी की “मेरी नज़र में” एवं श्रीमती देवी नागरानीके ग़ज़ल संग्रह “दिलसे दिल तक”, डॉ॰अंजना संधीर द्वारासंपादित “प्रवासी आवाज़” इन तीनो पुस्तकों का विमोचन ११ तारीख, रविवार २००८ शाम४ बजे,आर डी नैशनल कालेज के कॉन्फ्रेन्स रूम में संपन्न हुआ. कार्य दो सत्रों में हुआ पहला विमोचन, दूसरा काव्यगोष्टी.

प्रथम सत्र
में अध्यक्ष रहे श्री राम जवाहरानी (चेयर परसन-सहयोग फौंडेशन) ,श्री नँदकिशोर नौटियाल (कार्याध्यक्ष-महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादेमी एवं
संपादक नूतन सवेरा), श्री आर. पी शर्मा(पिंगलाचार्य).श्री मा.ना. नरहरी ( वरिष्ठ शायर व समीक्षक )और श्री गणेश बिहारी तर्ज़, डा॰ सुशीला गुप्ता,( संपादक- हिंदुस्तानी ज़ुबान ) डॉ॰ राजम नटराजन पिल्लै( संपादक-कुतुबनुमा), श्री खन्ना मुज़फ़्फ़रपुरी ( वरिष्ठ शायर) व देवी नागरानी. श्री मधुप शर्मा जी ने जो एक उत्तम ग़ज़लकार हैं, और उन्होंने आर पी शर्मा “महरिष” की पुस्तक मेरी नज़र में का लोकार्पण किया.श्री गणेश बिहारी “तर्ज़” ने देवी नागरानी जी के ग़ज़ल संग्रह दिल से दिल तक का विमोचन किया. डॉ॰अंजना संधीर द्वारा संपादित “प्रवासी आवाज़” का विमोचन डॉ॰ सुशीला गुप्ता ने किया. समारोह का कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हुआ. संचालान का भार पहले सत्र में श्री अनंत श्रीमाली ने खूब निभाया.

द्वीतीय सत्र
में संचालान की बागडौर श्री जयप्रकाश त्रिपाठी जी ने बड़ी ही रोचकतपूर्ण अंदाज़ से संभाली.श्री
मुरलीधर पांडे्य संयोंजक रहे इस कार्य के और समारोह में वरिष्ट साहित्यकार व महमान जो पधारे थेः श्री धनराज चौधरी, श्री गिरिजा शंकर त्रिवेदी, जनाब माहिर जी, दीनानाथ शर्मा, श्री गोपीचंद छुग, अनील गहलोत, श्री टी. मनवानी आनंद, श्री अरविंद राही, श्री उदासीन साहिब, प्रभा कुमारी, प्रो॰ शोभा बंभवानी, हरी व पायल नागरानी, देवीदास व लता सजनानी, उषा जेसवानी, नंदलाल थापर, प्रो॰ लखबी वर्मा और श्रीमती जे. जोशी. कविता पाठ में शरीक रहे श्री गणेश बिहारी तर्ज़, मधुप शर्मा, मा, ना. नरहरी साहब, देवी नागरानी, सेतपाल जी (प्रोत्साहन के संपादक), लोचन सक्सेना, श्री शिवदत्त अक्स, गीतकार कुमार शैलेंद्र जी, श्री रमाकांत शर्मा, श्री संजीव निगम, मरियम गज़ला, ज़ाफर रज़ा, नीरज कुमार, जनाब अहमद वसी, कवि कुलवंत, श्री राम प्यारे रघुवंशी जी, डॉ॰शेलेश वफा, नंद हिंदूजा आनंद, रोचल नागवानी, श्री विजय भटनागर, भैरवानी जी,कपिल कुमार, रेखा किंगर, नीरज गोस्वामी, कपिल कुमार, प्रेमलता त्रिपाठी, आर्य भूषण, मोना अल्वी, शिल्पा सोनटके व अन्य कई रचनाकार व साहित्यकार, जिन्हों ने अपनी अपनी रचनाओं का पाठ किया और महफिल को शब्द सरिता के सजा दिया. जयहिंद

गजलः 32

खामोशी में जो अश्क पले
क्या छुपते भला मुस्कान तले.
हर दिल में धुआं क्यूँ उठता है
क्यों अरमानों की होली जले?
दिल डूब गया सूरज के सँग
क्यों चांद न आया रात ढले.
बेनूर हुई दुनियाँ सारी
मस्तानों के ये बात खले.
पत्थर का दिल जब जब धड़के
ख़्वाबों को जैसे ख़्वाब छले.
रौशन रौशन है सब राहें
दीपों में किसका खून जले. १२०


लौ दर्दे-दिल की

.

दर्दे-दिल की लौ ने रौशन कर दिया सारा जहाँ

इक अंधेरे में चमक उट्ठी कि जैसे बिजिलियाँ

देवी नागरानी


शिकागो यात्रा पूरी हुई पर रास्ते मे आदरणीया देवी बहन से मुलाक़ात हुई -

मशहूर गज़लकारा, शायरी के हुनर मे माहिर , संवेदनाशील व्यक्तित्व की धनी ,

सरल , सरहदया सन्नारी जिन्होंने
जीवन
के कठिनतम पडावों को , दृढ मनोबल और
स्वयं के
बलबूते से पार किया है .
भरपूर जवानी मे, पति को खो देने के बाद , " देवी बहन " ने
अपने
नाम को साक्षात किया

' देवी ' बन कर २ पुत्रियाँ और एक पुत्र को लायक बनाया और अपनी भावनाओं को अपनी ग़ज़लों मे मुखर किया
उन्होंने घर बुलाया तो हम वहां रुके - घर का बढ़िया भोजन किया - समोसे , २ तरह की चटनी, राजमा , चावल, सूखी गोभी, बूंदी का रायता ,
आलू के परांठे -- आहा ह़ा..
क्या स्वाद और कितना प्यार था उस भोजन मे - उनकी बड़ी पुत्री कविता से भी मिलना हुआ - अच्छा लगा

देवी जी के प्रोफाईल से उन्हीं के शब्द लायी हूँ


--
Devi

Nangrani

Industry: Education Occupation: Teacher Location: Union : NJ : United States
पुस्तकें ' दिल से दिल तक' , ' चरागे दील ' इत्यादी उनकी प्रतिभा को रोशन करते हुए , पाठकों के लिए तैयार हैं .

About Me

Zindagi kya hai?

समय के साहिल पर खड़ी रेत के घरोंदे को ढहते हुए देखती हूँ तो लगता है मैं ख़ुद भी बार‍बार मिट्टी से खेलती रही हूँ..!!

Interests

शिकागो शहर, मध्य अमरीका का सबसे बड़ा शहर है . इलीनोईस प्रांत के उत्तर मे मिशीगन लेक के किनारे बसा शिकागो

व्यापार उद्योग का महत्त्वपूर्ण केंद्र है . यहां बोईंग विमान निर्माण के अति विशाल कारखाने हैं तो भारत से आये अनगिनत व्यापारियों की दुकानें डेवोन एवेन्यू मे बहुत सफल हैं . यहां डेवोन मार्ग का नाम - गांधी मार्ग भी है जो आगे जाकर जिन्ना मार्ग से जुड़ जाता है और यहां पाकिस्तानी रेस्तोरंट्स , दुकानें आबाद हैं.
शिकागो की सबसे ऊंची
बहुमंजिली ईमारत , सीयर्स टावर व अन्य कयी गगनचुम्बी भवनों से सजा इलाका , डाऊन - टाऊन कहलाता है
यहां २०१० , २०११ के वर्ष मे जून माह तक , ६ यात्राएं पूरी की हैं . परंतु इस बार की यात्रा अति सुखद रही चूंकि , हम एक मित्र के बेटे के विवाह मे शामिल होने के लिए शिकागो पहुंचे थे - विवाह अंतरजातीय था . एली अमरीका के आयोवा प्रान्त से है और अनय , भारतीय मूल का शिकागो मे जन्मा और पला , बड़ा सुखी समृध्ध परिवार का बेटा है . विवाह चर्च मे भी हुआ और हिन्दू विधि संस्कार से भी हुआ -

देखिये कुछ चित्र :

शिकागो मे मनाया विवाहोत्सव

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हम ठहरे थे हमारे स्कुल के सहपाठी दिलखुश और सुल्ताना के घर ! विवाह के रिसेप्शन के बाद मुलाक़ात हुई , जब् मैं ८ वीं कक्षा मे थी उस क्लास मे मुझ से पीछे की बेंच पर बैठते एक सहपाठी से - मुकेश - जो आज ३० से ज्यादा वर्षों से शिकागो रहते हैं और सीपीए का अपना काम है - उन्होंने स्कुल के पुराने दिनों की कयी बातें बतलायीं . हम ४० से ज्यादा वर्षों बाद मिल रहे थे पर मुझे उनका चेहरा या नाम याद नहीं था तो मुकेश जी ने अपनी अहमदाबाद से आयीं पत्नी भारती को कहा, ' ये एलीट ग्रुप मे थीं - हमें क्या ख़ाक याद रखेंगीं ! इनके पिता जी पण्डित नरेद्र शर्मा, इतने बड़े सेलीब्रेटी हैं , ये तभी जाना था जब् उनको आकाशवाणी के विविध भारती के कार्यक्रमों मे रेडियो पर सुना था और सोचा ' बाप रे , इनके बेटी मेरे स्कुल मे , मेरी क्लास मे , मुझ से आगे की सीट पे बैठती है ..और ८ वीं कक्षा के बाद तुम दुसरे दिविज़न मे चली गयीं थीं ..'
खूब बातें हुईं -- कुछ पुरानी सहेलियों , सह पाठिनों के बारे मे जान पायी तो बड़ी खुशी हुई
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दिलखुश, सुल्ताना , डाक्टर कमलेश वर के पिता , मैं व दीपक जी
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दिलखुश, सुल्ताना , मैं व दीपक जी
- लावण्या

8 comments:

मीनाक्षी said...

आप दिल से लिखती है और दिल में सीधे उतर जाते हैं आपके यादगार पल... देवीजी के बारे मे जानकर बहुत अच्छा लगा...

Udan Tashtari said...

देवी नागरानी जी का मुझ पर आप सा ही अपार स्नेह है...उनके बारे में जो भी पढ़ूं, मन हर्षित हो जाते है.


उनके आशीष की छाया में मंच पर भी उनका सानिध्य प्राप्त किया...और आशीर्वाद तो खैर उनका हमेशा ही मेरे साथ है.

अच्छा लगा आपका आलेख.

वाणी गीत said...

हमेशा की तरह रोचक कम्प्लीट पॅकेज ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

अच्‍छा लगा आपका यह विवरण पढकर। आभार।

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जादुई चिकित्‍सा !
ब्‍लॉग समीक्षा की 23वीं कड़ी...।

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत बधाई हो, रोचक विवरण।

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत बढ़िया रहा ,आभार.

P.N. Subramanian said...

देवी जी के बारे में कहीं सुना जरूर था लेकिन इतने विस्तार से अब जान सका. आभार.

neelima garg said...

bahut khubsurat...