Wednesday, March 5, 2008

प्रेम संन्यास :

प्रेम संन्यास : सन १९२६ में बनी, एक पुरानी श्वेत श्याम फिल्म है

प्रसारण अवधि /१०५ मिनप्रोडक्शन : ग्रेट इस्टँन फिल्म कॉर्पोरेशन और एमेल्का डायरेक्शन : फ्रान्ज़ ओस्टीन व हिमाँशु राय कास्ट : सीता देवी , हिमाँशु राय , शारदा , उकिल , रानी बेला प्रफुल्ला रोय , गोकुल दास --
श्री आड्वींन आर्नोल्ड द्वारा लिखी एक कविता " Light of Asia " पर आधारित ये फिल्म गौतम बुद्ध के जन्म से , शुरू होती है आगे कथा ये दीखालाती है कि, कैसे राज कुमार गौतम का लालन पालन , सुख समृध्धि और अपार वैभव विलासिता भरे राज महल मेँ हुआ। उनका विवाह हुआ राजकुमारी यशोधरा के साथ और उनकी खुशी का प्रतीक बालक राहुल का जन्म हुआ जिस से , गौतम का राज प्रसाद , निखर उठा ।

परंतु, गौतम को इस आमोद प्रमोद , सुख - सागर के मध्य में भी , किसी अनजान वस्तु की तलाश थी । जिस को उन्होंने हासिल किया , एक लम्बी आत्मा के उत्थान की तपस्या के बाद , अपना घर परिवार, राज महल, सुख की शैय्या अपने पुत्र तथा प्रेम करनेवाली अपनी भार्या का त्याग करने के बाद ! सारे संसार का त्याग करने बाद !
अपनी हर प्रिय वस्तु का त्याग करने के बाद ! जब गौतम , समाधि में लींन थे उस वक्त उन्हें "कैवल्य ज्ञान " की प्राप्ति हुई थी ।

जिसके बाद, वे राज कुमार गौतम से भगवान् बुध्ध " बने और पहचाने गए ।

यह चलचित्र एक मील का पत्थर साबित हुआ था उस समय की उभरती हुई बंबई की चित्र उद्योग की नई नवेली , संस्था के लिए जिसकी पहचान आज " बोलीवूड " के नाम से ज्यादा लोकप्रिय है जिस को हम "Indian Film industry।" भी कहते हैं ।

" प्रेम संन्यास " को विदेशों में भी आर्थिक मुनाफे सहित , सफलता हासिल हुई थी। प्रेम संन्यास का प्रदर्शन , भारतीय फिल्म उद्योग के लिए , एक , पहला सोपान था जिसकी कथा वस्तु ने भारतीय धर्म इतिहास की साझी परम्परा का परिचय करवाने में भी आशिंक सफलता प्राप्त की थी।

भगवान् बुध्ध , विश्व की एक ऐसी विभूति हैं जिन के प्रेरणादायक जीवन को आज भी मानवता , अपार श्र्ध्धा तथा अपने आत्मोध्धार के संबल स्वरूप , देखना , गुनना चाहती है।



2 comments:

Udan Tashtari said...

जानकारी का आभार...यह फिल्म नहीं देखी.

Lavanyam - Antarman said...

समीर भाई देखी तो हमने भी नही सिर्फ़ सूना और पढा है इसके बारे में :)