Sunday, November 2, 2008

अबोध का बोध पाठ

हाँ ...अभी सीख रहा हूँ ....
हंसिये ....ना !!
I'm COOL :) Noah as a Fire fighter
& another Cool Dude !
Mr Potato head below
"Trick or Treat "
बर्ग वार्ता - Burgh Vaartaa अनुराग भाई ने Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने पुछा था ..."हाउ वास हल्लोवीन ?"
the Ans. is , " It was Good !! "
..आज नन्हे मुन्नों के लिए कविता हाज़िर है ..बड़े भी पढ़ें ...
अबोध का बोध पाठ
हैं छोटे छोटे हाथ मेरे छोटे छोटे पांव।

नन्हीं नन्हीं आंखें मेरी नन्हें नन्हें कान।
फिर भी हरदम चलता हूं

हाथों से करता काम।
रोज देखता सुंदर सपना सुनता सुंदर गान।
ऐ बडों हमारी सुनो प्रार्थना
तुम भी बच्चे बन जाओ।
छोडों झगडे और लडाई
अच्छे बच्चे बन जाओ।
_ लावण्या शाह जून 22 , 2000



















20 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुंदर चित्र और कविता. धन्यवाद! आपने हालोवीन का आनंद लिया, जानकर अच्छा लगा!

अजित वडनेरकर said...

नोआ की तस्वीर के लिए शुक्रिया लावण्यादी...मगर अभी और...
कविता पसंद आई..

अनुपम अग्रवाल said...

ये प्रार्थना तो बड़ों को भी करनी चाहिए ;
हे प्रभु सुनो प्रार्थना हमारी
हम भी बच्चे बन जायें
छोडें झगडा लडाई हम
हम भी बच्चे बन जायें

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

नन्ही कविता बहुत बड़ी निकली..

डॉ .अनुराग said...

एक बड़ा सा काला टीका लगा दे हमारी ओर से ......!

Gyan Dutt Pandey said...

हम लोग बड़ा-बड़ा लिखने के चक्कर में बाल-गीतों, कथाओं और बाल सुलभ बातों को तो भूल ही जाते हैं। आपने अच्छा याद दिलाया। और बहुत अच्छा लिखा भी।
आगे इस पक्ष को याद रखेंगे। अपने में जो बच्चा है, उसे अभिव्यक्ति देंगे।

Parul said...

pyaari bacchhey ki pyari post

अभिषेक ओझा said...

Cute ! Cute ! Cute !

ताऊ रामपुरिया said...

बचपन कितना सुंदर होता है ! कभी हमारा भी था पर आज कहीं चूक गए हैं ! इस याद दिलाने के लिए बहुत धन्यवाद !

Radhika Budhkar said...

बहुत प्यारे बच्चे और प्यारी प्रार्थना

Suneel R. Karmele said...

मासूम की मासूम के लि‍ए मासूम सी कवि‍ता, बधाई .....

Udan Tashtari said...

तस्वीरें बहुत मजेदार हैं// :)

कविता भी सुन्दर!

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर फोटो हैं । कविता भी बढ़िया है ।
घुघूती बासूती

कंचन सिंह चौहान said...

pyare pyare noa ko khoob dher sara aashirvad..! us ke sar pe aap ka ashish bhara hath hai...kavita bahut pyari

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी said...

इन चित्रों और कविता ने वाकई बचपन में पहुँचा दिया। बच्चे जब भी होते हैं साथ तो उन के साथ बच्चा बन खेलने को मन करता है।

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

chitro or rachana ne man moh liya. nanhe munno ki baat ho to kisaka man khush nahi ho jata hai . bahut sundar acchi Abhivyakti. abhaar.

नीरज गोस्वामी said...

कविता और बच्चे दोनों खूबसूरत...नोहा को इश्वर बुरी नजर से बचाए और जिंदगी में हमेशा खुश रखे ...अनुराग भाई ने सच कहा एक काला टीका जरूर लगा दीजियेगा...
नीरज

Manish Kumar said...

bachchon ke in pyare bhole bhale chitron ko dekh man khush ho gaya

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर चित्र, सुन्दर बच्चो के, अपने बच्चो का बचपन याद आ गया, सभी ्बच्चो को प्यार

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

बहुत ही क्‍यूट बेबी हैं और उनके फोटो भी उतने ही स्‍मार्ट तरीके से लिये गये हैं।