Friday, June 29, 2007

...ज़िँदगी ख्वाब है..चेप्टर -- ८



समय फिर आगे बढता गया. आज राजश्री और प्रकाश बेहद खुश थे.
उनका पुत्र प्रताप आज २ साल का हो गया था.
वे लोग बडे उत्साह के साथ नन्हे प्रताप राजा का बर्थ -डे मना रहे थे.
पार्टी मेँ सारे मित्रोँ के बच्चे, मम्मीयोँ के साथ आ पहुँचे थे. बडे सी कार की शेप वाला केक काटा गया और खूब जोर से सब मिलकर 'हेप्पी बर्थ डे टू यू ...हैप्पी बर्थ डे डीअर प्रताप.. .." गा रहे थे.
मुँह मीठा किया तभी मोबाइल की रीँग सुनकर प्रकाश ने
' हेल्लो हेल्लो ..कौन ?'
पूछा तो सामने से रोहित की जानी पहचानी आवाज़ आयी,
" बडा हँगामा हो रहा है ! पार्टी चल रही है क्या तेरे यहाँ ? "
उसने पूछा तो प्रकाश ने कहा,
" हाँ आ जा ना ...प्रताप आज २ वर्ष का हो गया आके केक खाओ ! "
तो रोहित भी आधे घँटे बाद वहाँ आ पहुँचा.
प्रकाश और राजश्री उससे मिलकर खुश हुए.
रोहित परिवार के सदस्योँ से बारी बारी से जा कर मिला.
फिर रात देर तक वे लोग बातेँ करते रहे.
पँखुरी और प्रताप को सुलाकर
राजश्री भी गेलेरी मेँ आ गयी जहाँ दोनो दोस्त कुर्सीयोँ पर बैठे थे.
" राजश्री जी, कहिये, कैसी हैँ आप ? " रोहित ने मुस्कुराकर प्रश्न किया
तो राजश्री ने कहा, " ठीक हूँ ..बस !
थकान हो रही है ..तुम सुनाओ ..कहाँ रहे इतने दिन ? '
" वही, अमरीका और अब यहाँ ..काम काम और फिर औ भी ज्यादा काम
..मेरा समय तो ऐसे ही बीत रहा है भाभी .."
राजश्री ने अचानक कहा, " रीना से मुलाकात हुई थी ..२ महीने पहले ..सच बत्ताना रोहित, क्या तुम दोनोँ दुबारा एक नहीँ हो सकते ? "
" ना ..मैँने बहुत सोचा है, हम एक साथ खुश नहीँ रह सकते .
.अब वो चेप्टर खत्म हो गया ..भाभी जी ..जाने दीजिये उस बात को "
रोहित बोला
..तो राजश्री और प्रकाश रोहित का चेहरा निहारने लगे और
उसे बहुत उदास और सँजीदा पाया -
- "क्या बात है दोस्त ? तुम ठीक तो हो ? " प्रकाश ने पूछा,
" हाँ अब तो अकेले रहने की आदत हो गयी है ! "
रोहित ने गहरी साँस लेते हुए आहिस्ता से कहा
तो राजश्री ने प्रकाश की ओर निहारा ,
दोनोँ की निगाहोँ मेँ सुहानुभूति घुल गयी
अपने मित्र के दुख से वे भी दुखी हो गये.
" तुम मेरी मानो और दुबारा शादी कर लो ! " राजश्री ने कहा,
" रीना से तुम्हारी नहीँ निभी
..हो जाता है ऐसा, समाज बदल चुका है, लोग समझने लगे हैँ और तलाक होना कोयी बहुत बडी बात नहीँ रही अब हमारे भारतीय समाज मेँ
खास कर बँबई जैसे शहरोँ मे "
ये प्रकाश ने समझाते हुए कहा ..तो रोहित ने कहा,
" शायद तुम सच कह रहे हो मित्र !
पर शादी - ब्याह की ओर मेरा मन नहीँ -
- मैँ काम मेँ इतना मस्रुफ रहता हूँ
कि शादी या लडकीयोँ के बारे मेँ सोचने की फुर्सत नहीँ मुझे "..
रोहित ने अपनी बात , अपने अँदाज़ मेँ रख दी -
जब भी थोडी - सी भी फुर्सत मिलेगी
तब शादी और लडकीयोँ के बारे मेँ भी सोचना जरुर !!
.लडकीयाँ इतनी बुरी नहीँ होतीँ रोहित ! "
राजश्री ने उलाहना देने के लहजे से कहा ..
" मैँ कहाँ बुराई कर रहा हूँ !
अब आप ही इतनी अच्छी मिसाल हो भाभी जी !
तब और क्या कहेँ ! " रोहित ने कहा और फिर जोडते हुए कहा,
" अरे हाँ, शालिनी से मिला था -- एक Air -port पे "
" अच्छा ? शालू को अवोर्ड मिला है इस साल -
- बेहतरीन कार्य कुशलता पर ,
उसके शहर की नगर पालिका की ओर से ! -
- ये वसुधँरा दीदी बतला रहीँ थीँ "-
राजश्री ने बडे गर्व के साथ अपनी चहेती शालिनी का जिक्र करते कहा .
" ओह यस ! शी डीझर्वज़ देट ! " ( oh yes she deserves that )
प्रकाश ने भी हाँ मेँ हाँ मिलाते हुए कहा -
"रात के ११.३० बज रहेँ हैँ ...मैँ चलूँ ? "
रोहित ने आहीस्ता से प्रश्न रखा .
.और रात के गहराते सन्नाटे मेँ, रातरानी की खुश्बु
बाग के भीतर से गेलेरी तक आ पहुँची.
तो तीनोँ उठ खडे हुए.
पति पत्नी मित्र को विदा कर भीतर घर मेँ चले गये
और रोहित अपनी नयी मर्सीडीज़ मेँ अकेला
अपने सूने आशियाने की ओर चल निकला.
१ साल बाद :
वसुँधरा दीदी , प्रकाश और राजश्री और माँ जी से मिलने आयीँ थीँ
और अचानक पूछने लगीँ --
" प्रकाश , वो तुम्हारा दोस्त रोहित किस शहर मेँ रहता है ? "
" क्योँ दीदी ? ऐसे क्यूँ पूछ रही हो ?
वोशीँगटन डी.सी. अमीरीकी राजधानी है ना,
उसी शहर से , "गणमान्य" जो उसकी आइटी कँपनी है
उसका सारा कारोबार देखता है रोहित . " प्रकाश ने बतलाया --
" अच्छा ! तब ये बतला दूँ कि शालिनी अब शिकागो शहर से,
वहीँ तुम्हारे वोशीँगटन डी.सी. रहने चली गयी है ! -
- ये मेरे जेठ जी , बतला रहे थे -- "
दीदी ने नये सामाचार सुनाये
अपनी लाडली ननद शालिनी के बारे
मेँ , तो इसे सुनकर, सभी को आस्चर्य हुआ ..
" अमीराका मेँ लोग ना जाने कितने घर बदलते हैँ " -
- माँ ने कहा, तो सब हँसे क्यूँ कि बात तो सच थी !
फिर बात दिमाग से उतर गयी --
पर एक रात ...
. ठीक मध्य रात्रि को , जब दीदी के बडे जेठ जी का ,
अमेरीका से फोन आया ,
तब प्रकाश और राजश्री की नीँद उड गयी -
- " हेल्लो ! मैँ , झवेर बोल रहा हूँ ..
हाँ हाँ ..अमेरीका से ..
वो तुम्हारा दोस्त रोहित कहाँ है ? "
बडे झल्लाये स्वर मेँ वे पूछ रहे थे
जिसे सुनकर प्रकाश की रही सही तन्द्रा भी गायब हो गयी -
- " भाइस्स्सा ..क्या बात है ?
इतनी रात आप मेरे दोस्त की खबर लेने मुझे फोन कर रहे हो ! "
प्रकाश ने पूछा तो झवर भाई सा'ब ने अब झल्ला कर कहा,
" सुना है रोहित , मेरी बेटी शालिनी से कल शादी कर रहा है ! "
" सच !! हमेँ तो इसके बारे मेँ खबर भी नही .
..ना ही कोयी सँदेशा आया है ना ही बुलावा ! "
प्रकाश ने -- कहा तब भी झवर भाई साहब खीजे हुए थे -
-" शालिनी ने हम से बातचीत करना लगभग छोड दिया है "
..सयानी हो गई है .
.उसकी जो मरजी करे ..
पर शादी कर रही है तो पिता को भी अब , इस वक्त बताया
जब कि मैँ शादी मेँ शामिल भी हो न पाऊँगा -
- हाँ उसकी मम्मी जी को भारत से बुला लिया है -
- मुझे और सुधा को ( नई पत्नि ) और उसके भाई बहनोँ को भी
नहीं बुलाया
और तुम जैसे पुराने और खास दोस्तोँ को भी
कुछ बतलाने की आवश्यकता नहीँ लगी उन दोनोँ को ! "
झवर भाईसाहब ने गुस्से से शिकायत की
तो प्रकाश और राजश्री भी असमँजस मेँ पड गये !
पर लोन्ग डीस्टन्स फोन पे क्या बात करते .
.जैसे तैसे समझा बुझा कर झवर भाई साहब से ,
बात खत्म की -
और सुबह वसुँधरा दीदी से ७ बजे फोन कर के सारा किस्सा बतलाया -
- फिर ९ बजे प्रकाश के माता पिता से ,
डा. प्रियँका दीदी के केन्सास के घर का फोन नँबर लिया गया
तब कहीँ जाकर,
प्रकाश और राजश्री,
शालिनी और रोहित से बात कर पाये !
- शादी की मुबारकबाद दी -
अपनी और परिवार की ओर से
शादी की सफलता की शुभकामनाएँ व बडोँ के आशीर्वाद दिये
तब रोहित ने इतना ही कहा था,
" राजश्री भाभी और तुम, हमारे हित के बारे मेँ कितने सही थे
ये गूढ रहस्य,
आज समझ पाये हैँ हम दोनोँ -
- अचानक ये सब तै हुआ है
बतला नहीँ पाये आप लोगोँ से ! " -
- अब और क्या कहना ?
मियाँ बीवी राजी तो क्या करे समाजी ...
वाली उक्ति ..
.चरितार्थ थी इस मामले मेँ -
- ऐसा सोचकर राजश्री और प्रकाश ने भी अपने दोस्त की खुशी को
सामने रखते हुए और बातो पे ध्यान नहीँ दिया --

क्रमश:

...ज़िँदगी ख्वाब है..चेप्टर - - ७


रोहित और शालिनी , वहां से अपने अलग अलग रास्तोँ पर चल दिये .रोहित ने अपना अमरीका का काम समाप्त किया और कुछ समय निकाल के, केन्सास शहर , अपनी बडी दीदी प्रियँका से मिलने चला गया

-शालिनी अपने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के काम मेँ लगी रही..

यूँ ही फिर समय रेत की तरह बीत गया.


"रे समय...तू, किस पाखी के डैन चुरा कर आया है ?
चुपचाप उडाये क्षण क्षण जीवन के, उडता जाये रे!
. तू, बतला, ओ अविचल, बहता तू जो प्रतिपल,
कौन लोक से आया है ? रे समय..ओ समय ..
तू, किस पाखी के डैन चुरा कर आया है ?"
एक दिन की बात है राजश्री बाजार ,सौदा लेने गयी थी .
मिठाई की दुकान मेँ दाखिल होते ही
उसकी निगाह रीना से जा टकरायी

जो काउँटर पे अपने पैसे दे रही थी -
रीना ने ही उसे अपने पास बुलाया था,
" राजश्री बहन, कैसी हो ? "
इतना सुनते ही राजश्री , रीना के नज़दीक आ गयी
- " मजे मेँ हूँ !- घर गृहस्थी मेँ समय कहाँ बीत रहा है ,
कैसे बतलाऊँ ?"
उसने कहा तो रीना भी मुस्कुराई -
- "हाँ कैसे हैँ पँखुरी और प्रताप ? "
उसने मीठे स्वर से पूछा तो राजश्री भी खुश हो गई -
- " बिलकुल आनँद मेँ हैँ -- आज वे दोनोँ अपने पापा के पास हैँ -
- तो वे उन्हेँ कौन सी नयी शरारत सीखला रहे होँगे क्या पता !"
राजश्री ने कहा तो दोनोँ को हँसने का मौका मिल गया !
-- इसी तरह यहाँ , वहाँ की बातेँ होने लगीँ -
- अचानक राजश्री ने कुछ गँभीर होकर पूछ लिया,
" एक बात पूछूँ रीना ? बुरा तो नहीँ मानोगी ? "
अब तक वे दुकान के बाहर आ गईँ थीँ -
- " ना पूछिये न दीदी क्या प्रश्न है ! " रीना बोली
तो राजश्री ने पूछ ही लिया
" तुम मेँ और रोहित मेँ क्या हुआ था ? क्यूँ दूर हो गये ? "
तो रीना ने कहा," सच बतलाऊँ ?
रोहीत - is a Hyper active personality in my opinion !
He is too , too much demanding !
He never can make up his mind on any one thing !
He is never satisfied with what is in front of him !
Ive noticed this habit in him ! "
रीना ने कहा,
" How do you say that humm " ? राजश्री ने उत्सुकतावश पूछा -
" well, nothing is enough for him !
even when I serve 3 types of condiments
he wants the fourth kind ...!
अब आप ही बतलाओ!..ये भी क्या तमाशा हुआ !
और ......इस तरह से नहीँ रह पाती थी !
अकसर ममी मुझसे पूछती रहती कि 'रीना बता क्या खाओगी ?
और रोहित के साथ ऐसा होता था कि जब हम खाने की मेज़ पर खाना खाने लगते तो कितनी भी डीशीस बनी होँ वो कोयी अलग चीज़ की डीमान्ड करने लगता ! जिससे मुझे घबराहट हो जाती --
i was not used to such behaviour you know.! ..
-- उसने रुँआसे स्वर मेँ धीमी आवाज़ मेँ इतना कह कर बात को वहीँ खत्म किया तो राजश्री ने भी आगे बात नहीँ बढायी ..
इतनी बात ज़ाहिर थी कि रीना भी परेशान थी ..
..अब राजश्री ने बातोँ का सिलसिला वहीँ दफनाते हुए
रीना के मन की तह को समझते हुए,
अपने घर की ओर क रुख अपनाया ..
'मियाँ बीवी के ऐसे विवाद, किसी कोर्ट कचहरी मेँ निपटे हैँ कभी ?'
राजश्री सोचती रही .
..'.की , आज इनका हल निकल पायेगा ?
असंभव ! '
घर पहुँचते ही उसने नन्हे प्रताप और चहकती हुई नन्ही पँखुरी को कुछ ज्यादह ही प्यार से चूमते हुए अपने से भीँच कर गले लगा लिया था -
- और फिर प्रकाश को रीना से अचानक हुई मुलाकात के बारे मेँ बतलाने लगी तो शाम कब रात मेँ ढल गई उन्हेँ पता ही न चला .
.सर्द हवाओँ को सहना पड जाये तो पँछी भी अपने घोँसलोँ को सहेजने लग जाते हैँ ! ये हर जीव का अपने आप को सुरक्षित रखने का नैसर्गिक प्रयास रहता है .राजश्री भी ऐसे ही प्रयास से अपने को रोक न पायी --
क्रमश:

Sunday, June 24, 2007

...ज़िँदगी ख्वाब है .चेप्टर ~ ६..( सत्य कथा पर आधारित )


रोहित ने अपने आपको कामकरने मेँ इतना मस्रुफ कर लिया कि उसे अपने अकेलेपन का अहसास कभी कभी ही होता था
. उसने ढेरोँ डी.वी.डी.. खरीद कर रख लीं...
वह जिस मानसिक नैराश्य के दौर से जुज़र रहा था उसके अनुरुप फिल्मेँ उसने चुन चुन कर देखना शुरु किया था -
जिन्हेँ देखते वक्त वह रोता नहीँ था बल्कि एकाकार हो जाता था !
आह ! क्या गुरु दुत्त जी थे...कमाल करते थे..
."प्यासा" ..का गाना .
." ये महलोँ ये तख्तोँ ये ताज़ोँ की दुनिया "
हल्के से शुरु होता और अँत होते रोहित भी तैस मेँ आकर गाने लगता,
" जला दो जला दो .इसे फूँक डालो ये दुनिया
..तुम्हारी है, तुम ही सम्हालो ये दुनिया ! "
और ठँडी आह लेते हुए ..थका हारा सोने की कोशिश करता .
.हेल्थ क्लब मेँ भी जाता
..अनमने ढँग से मशीनोँ का इस्तेमाल करता .
.पर , उसका मन था कि किसी भी स्थिती मेँ उसे चैन न लेने देता --
एक दिन उसने प्रकाश को फोन मिलाया -
- पता चला कि भाई, साहब के यहाँ एक और शिशु का आगमन हो चुका है और उसी मेँ दोनोँ व्यस्त रहे !
उसने तै किया कि अबके भारत और बँबई पहुँचते ही वो उनसे मिलने जायेगा
.आखिर हैद्राबाद, बँगलूर, चेन्नई मेँ कई सारे इन्टर्व्यू लेकर
"गणमान्य" के सी. इ ओ. ( CEO ) रोहित ने घर की राह ली --
अपने काम से कुछ मुक्ति मिलते ही वह प्रकाश व राजश्री के नवजात बालक बेटे प्रताप को मिलने आ पहुँचा -
- नन्हे मासूम बच्चे को गोद मेँ लिये रोहित कुछ पल के लिये अपना सारा अवसाद भूल गया -
- उसे पहली बार मुस्कुतराता देखकर प्रकाश को भी राहत हुई -
- उसने पूछ ही लिया, " कैसे हो दोस्त ? ठीक तो हो ना ? "
" हां -- all things considering ..I'm holing up quite well "
तुम लोग सुनाओ क्या हाल हैँ ? परिवार के सारे लोग ..सब ठीक हैँ ना ?"
" हाँ रोहित ..सब मजे मेँ हैँ -- प्रकाशने कहा -
- राजश्री ने अपनी बात जोड़ते हुए कहा,
" शालिनी अपने पापा के बुलाने पर अमरीका गई है -
- तुम्हे मिली क्या वहाँ पे ? "
" अरे भाभी , मुझे कैसे पता कि वो वहाँ है ?
अमरीका क्या एक छोटा सा उपनगर है ? .
..जैसा हम तुम रहते हैँ वैसा ?
जहाँ हर परिवार एक दूसरे के बारे मेँ सब कुछ जानता है ! " -
- "अरे बाबा ! हम तो बम्बैया हैँ ना -- हमेँ अमरीका की धौँस न दीखाओ "-- राजश्री ने झूठमुठ का गुस्सा जतलाया तो तीनोँ हँसने लगे -
- रोहित सोचने लगा, " इनके सँग मैँ कैसे हँस लेता हूँ -
- कितना सहज है ये -
- "फिर कुछ सोचकर उसने कहा, " अच्छा, उसका पता ठिकाना बतला दो -
- अगली बार जाऊँगा तो उसे भी फोन कर लूँगा - ठीक है ना ? क्या कर रही है वो वहाँ ? "
उसने पूछा तो रजश्री ने बतलाया कि शालिनी के
पापा ने शालिनी को वहीँ बुलवा लिया था और अब उसे कालिजसे स्क्लोरशीप भी मिली है और वह पढाई कर रही है --
" ये तो अच्छी दिशा मिल गई उसके जीवन को " रोहित ने तुरँत कहा और पूछा," उसकी नानी जी व मम्मी जी कहाँ हैँ ? "
"यहीँ हैँ -- " प्रकाश ने कहा ...चलो ..ठीक है "
इतनी बातेँ हुईँ फिर और बातेँ राजनीति, फिल्म से सँबँधित नये किस्से कहानियोँ की बातेँ भी होतीँ रहीँ -
-कई दिन बाद रोहित स्वस्थता महसूस करता
रात को बिस्तर पे लैटते ही सो गया -
- उसे रात स्वप्न आया जिसमेँ उसने बगिया देखी ..फूल पँछी, फव्वारे, वह घूम रहा है ..निश्प्रयोजन ..और सहसा, एक मोटरकार बाग मेँ घूस आयी और बेतहाशा तेज रफ्तार से फूलोँ को उजाडती हुई रोहित को धक्क्का देती हुई , होर्न बजाती हुई निकल गई ...रोहित कोौर कन्डीशन कमरे मेँ भी शीत ज्वर हो आया .वह काँपने लगा -ये क्या था ? उसका जीवन उस गाडी की तरह था क्या? जो फूलोँ को रौँद कर निकल गया ?
-- उसने लँबी साँस ली -- और जब नीँद खुल ही गयी थी तो फिर उठकर अपना लेपटोप ओन करके काम देखने लगा -
- ३ साल बाद :
इस सारे समय मेँ रोहित की कँपनी " गणमान्य" अमरीका की ५०० सबसे तेजीसे प्रगतीशील , कँपनीयोँ मेँ अपना गौरव भरा स्थान बना चुकी थी -
- रोहित आज स्वीट्झरलेन्ड के "डावोस" शहर के प्रतिभा सम्पन्न सभागार मेँ तीसरी पँक्ति मेँ बैठा हुआ है -
- सबसे आगे अमरीका के सुविख्यात अबजपति तकनीकी क्षेत्र के सर्वोच्च अधिपति, आज के सँचार माध्योमोँ के गुरु श्रीमान "बील गेट्स जी " बैठे हुए हैँ ये भी रोहित ने देखा -
- रोहित को "" गणमान्य" " की प्रगति पर सम्मानित किया जा रहा है -
- रोहित फिर भी अलिप्त ,सारा नज़ारा देखता रहा -
उसने सोचा, "काश ! मेरे साथ इस वक्त कोयी अपना होता !
जो मेरी इस प्रगति पर मुझे अपनापन देता -
- तब मेरी खुशी दुगनी न हो जाती ?
परँतु भाग्य मेँ क्या लिखा है ये कौन पहचानता है ?
कोइ
नही ! मैँ भी इन्सान हूँ -
- ये उपलब्धि मेरी नहीँ -
- ईश्वर की देन है "
रोहित नास्तिक भी नहीँ था परँतु बहुत ज्यादा कर्मकाँड करने वाला भी नहीँ था -- वह अति आधुनिक सँप्रेष्णा व सँचार , माहिती विनिमय ,
वाणिज्य
युग का एक ,
अन्य उसी के जैसे दीर्घ द्रष्टि वाले व्यापारी कौम के अन्य सफल अधिनायकोँ की तरह , उन्हीँ के जैसा एक प्रणेता था -
- इक्कीसवी शताब्दी रोहित के जैसे सफल व्यापारीयोँ के हस्ताक्षर ग्रहण कर रही थी !
इतिहास के पन्ने नये आध्याय जोडने मेँ लगे थे..
इन महानुभावोँ के नाम की सूची
समय की रेत पर अपने पदचाप छोडने को कटिबध्ध थी
--रोहित ने अपने माता पिता को फोन मिलाया और ये सूचना दी कि उसने अपना मानपत्र ग्रहण किया है -
- अभी अभी ' तो वहाँ से हर्षातिरेक से सने आशीर्वादोँ की झडी लग गयी -
- दो दिन बाद प्रकाश ने भी रोहित को मुबारकबाद देते हुए फोन किया तो रोहित को बहोत खुशी हुई -
- " अरे ऐसे थोडे न चलेगा रोहित जी ! अब तो आप से पार्टी लेकर ही रहेँगे -- कब आ रहे हो घर ? "
राजश्री ने भी बधाई देते हुए कहा तो रोहित ने कहा, " एक बढिया फ्रेन्च पर्फ्यूम लेकर आ रहा हूँ राजश्री भाभी आपके लिये ...दावत के लिये तैयार रहियेगा "
" हाँ आओ तो सही ..यहाँ सारे मित्र तुम्हारा बेसब्री से इँतज़ार कर रहे हैँ " इतना कहकर -- फोन रखा गया -
- रोहित ने अपना वादा निभाया -
- बँबई आते ही फाइव स्टार ताज महाल होटल के बडे होल मेँ पार्टी का आयोजन किया गया -
- बहुत सारी डीशीस , सँगीत का प्रबँध भी किया गया था -
- सभीने रोहित को गले मिलकर या पीठ थपथपाकर
..या उपहार, पुष्प गुच्छ देकर अपनी अपनी रीत से बधाई दी थी -
- उस शाम को रोहित कभी नहीँ भूलेगा -
- इतने अच्छे दोस्त...!!
इतना प्रेम मिला था उसे -
- कितने सारे लोग आये थे रोहित से मिलने -
- परँतु, रोहित फिर भी अकेला ही था ! ..
.दो दिनोँ के बाद प्रकाश के घर उसे रात्रि भोज के लिये आमँत्रित किया गया तो वह काम था फिर भी छोड कर निकल पडा -
- वहाँ जाते ही उसने देखा तो शालिनी भी मौजूद थी !
"अरे ! कैसी हो ? कब आयीँ अमरीका से ? " -
- " आई तो थी महीना भर पहले से
..पर मम्मी जी को साउथ इन्डीया घूमाने ले गई थी " शालिनी ने जवाब दिया , तो रोहित ने उसे देखा कि अब वह पहले से ज्यादा सलीका सीख गई थी. उसका सौँदर्य गँभीर किस्म का था.
ऐसा नहीँ जो शोख रँग सा चटखता हो !
वह था, किसी बाग के कोने मेँ फूली मधुमालती जैसी - शाँत सौम्य !"
"और इस सण्डे को ( British Air ways ) " ब्रिटीश एअर" से जा रही हूँ "-
- उसने मँद मुस्कान के साथ जोडते हुए बतलाया -
- " अच्छा ! पसँद आ रहा है वहाँ का जीवन तुम्हेँ ? "
रोहित ने पूछा तो शालिनी ने कहा,
" जीवन मेँ जो भी आता है उसे स्वीकार करना जानती हूँ -
- पीछे मुडकर अफसोस करने से कुछ हासिल नहीँ होता ! "
उसने कहा तो रोहित को लगा
मानों वो उसी को ये बात जतलाने की कोशिश कर रही थी -
- " क्या किया इतने वर्ष वहाँ ?
कुछ घूमना भी हुआ या बस पढाई ही चलती रही ? "
उसने बडप्पन जतलाते हुए पूछा
तो राजश्री ने तपाक से कहा,
" अरे ये शालू बडी ही साहसी है !
युरोप के ५ शहर Bag -Pack लेकर अकेली घूम आयी थी पिछले साल ! "
उसने कहा जिसे सुनकर रोहित को ताज्जुब हुआ और हर्ष भी ! "
" i like Independant minded people " उसने कहा...
घर जाते वक्त रोहित के तेज दीमाग मेँ एक जबर्दस्त आइडीया आया -
- और वह ठठाकर हँस पडा -
- बडे दिनोँ के बाद, आज फिर रोहित मेँ एक नई आशा का सँचार हुआ था -- उसका स्वभाव था जो उसे नये , अपरिचित रास्तोँ पर चलने के लिये बाध्य किये रहता था -
- ये उसी तरह का बिलकुल तरोताज़ा विचार था -
- हाँ! वह ऐसा ही करेगा उसने तै किया और उसी की प्लानिँग मेँ कम्प्यूटर खोलकर अपनी खुद की यात्रा के बारे मेँ इँतजाम करने लगा -- उसने दूसरे दिन सुबह शालिनी, प्रकाश राजश्री और बेला को चाइनीज़ खाने पर बुला लिया और बातोँ ही बातोँ मेँ कहा, " शालिनी हम सभी तुम्हेँ छोडने हवाई अड्डे चलेँगेँ " " क्यूँ ? ऐसी क्या जरुरत है ? "
शालिनी ने कहा तो रोहित ने कहा,
" राजश्री की बिटिया पँखुरी को प्लेन कैसे " Landing aur Take off " करते हैँ वो बतलायेँगे -
-बडा मज़ा आयेगा उसे -- क्यो चलोगे ना सब ?"
रोहित ने पूछा तो सभी ने उत्साह से हामी भरी -
- अब, तै रहा और निर्धारीत रात्रि को शालिनी को प्लेन मेँ बिठाकर रोहित ने खुद भी ,
उसी समय, " Air -France " - " एयर फ्रान्स " के विमान से , प्रस्थान किया -
- पर ये बात और किसी को पता भी नहीँ थी -
FRANCE : फ्रान्स
- ड गोल हवाई अड्डे पहुँचते ही रोहित एक खास यात्रा खँड की ओर बढता गया -- वहाँ कोँकोर्ड विमान खडा था -
- जो सबसे तेज , अबतक निर्माण किया गया विमान था -
- कोन्कोर्ड विमान जिस समय उडान की शुरुआत करता तब अगर ५ बजे का समय होता तब युरोप से अमरीका पहुँचते , पृथ्वी इतना घूम गई होती अपनी धुरी पर कि, आगँतुक यात्री, ५ बजे , उसी दिवस के समय से -- चँद मिनटोँ पहले भौगोलिक ,भूखँड पर उतर रहा होता -- उनका ये लोगो था,
" We reach our destination before your departure Time " !!
&
ये रोहित का एक आयोजन था -
स्वप्न देखना नहीँ उन्हेँ जीना भी रोहित को आता था -
- अपने जीवन की ऐसी अभूतपूर्व, अनोखी , रोमाँचक यात्रा करके रोहित अमरीकन राजधानी वोशीटँगटन डी..सी पहुँच गया -
और हँसी छिपाते हुए, ब्रिटीश ऐर " के यात्रियोँ के आगमन के द्वार पर खडा हो गया -
- कुछ यात्री निकल कर आगे बढते गये तब शालिनी, थकी सी , परँतु अपना बेग उठाये आती दीखलायी दी तो रोहित ने आवाज़ लगायी,
" हेल्लो शालिनी ! " --
हैरान शालिनी रोहित को देखती रही उसे लगा मानो उसके पैरोँ तले से ज़मीँ हट गयी थी -
- विस्फरीत नेत्रोँ से उसने रोहित को हँसते हुए ,
सामने आते देखा तो, इतना ही पूछ पायी,
"अरे ! तुम यहाँ कैसे ? तुम तो भारत मेँ थे ! "
" जादू है ये जादू
--राज़ की बात है -
- हम कैसे बतायेँ !!" -
- रोहित अब खुलके हँस रहा था -
- उसे शालिनी का चेहरा देखकर इतनी हँसी आयी कि वो
अपनी हँसी को रोक न पाया !
तो ऐसी ख्वाबोखयालात के परे की ये कहानी है शालिनी और रोहित की -- अगला हिस्सा , जल्दी ही ..


Saturday, June 23, 2007

...ज़िँदगी ख्वाब है..चेप्टर ~ ५


रोहित को ऐयर पोर्ट से घर ले जाने के लिये उसका ड्राइवर आ गया था -
उसके माता पिता ने कहा कि "हम आयेँगेँ तुम्हेँ लेने "
तब रोहित ने मना किया था कि,
" मैँ जब सोके उठूँगा तब आपके पास आ जाऊँगा -
आप लोग कष्ट ना करेँ !"
जेट लेग से तँग आकर रोहित पूरे १२ घँटोँ बाद ही उठ पाया था. चाय पीते हुए, बील, डाक वगैरह देखने लगा तो एक हरे लाल रँग का ब्याह का निमँत्रण पत्र देखा तो कौतूहल से उलट पुलट कर नाम इत्यादि पढने लगा .
" अब कौन फँसने जा रहा है ?? .......
कोल्हू का बैल बनेगा ! "
उसके सीनीकल दिमाग ने चुहल की तो रेशनल माइन्ड ने उलाहाना दिया,
" ऊँहूँ ! इसका लक्क मुझसे तगडा होगा
और जन्न्नत नसीब होगी मेरे यार को ! " -

- नाम था पीयूष परमार -
- आहा ! मिस्टर परमार ईज गेटीँग मेरीड!
वो स्वगत बोल उठा - दुल्हन कौन हैँ -
देखेँ तो नाम उभर कर सामने आया,
" पायल बजाज " -- वाह !
अब तो पीयूष के पैरोँ मेँ पायल बँधेगी --
उसने सोचा और तारीख भी कल की ही थी -
और विवाह की दावत पे जाना तो होगा ही -
- ड्राइवर से कह दीया कि कल शाम के बाद
उसकी रात ११ बजे तक की ड्यूटी ओवर टाइम की होगी -


" जी साब " ड्राइवर ने आहिस्ता से पूछा, " आज कहीँ चलना है साब "
" हाँ --मैँ आता हूँ .... तुम नीचे इँतजार करो "
कहता रोहित स्नान करने चला गया -
और अपने माता पिता के, छोटे से फ्लेट की ओर चल दिया -
- रास्ते मेँ रोहित ने उन सारे सवालोँ के जवाब मन ही मन तैयार कर लीये जो उसे मालूम था कि उसके सीधे सादे माता पिता उसे पूछेँगे -
-जो जो सोचा था उसी तरह उसने ,
उनसे बातेँ कीँ और उन्हेँ ढाढस बँधाया,
हीम्मत दी कि अब जो भी होगा देखा जायेगा --
इस परिस्थिती मेँ और क्या किया जा सकता है ? "
उसके ये कहने पर वे आश्वस्त हुए --
और वो फिर घर चला आया था -
- हाँ घर पर रीना उसे अब नहीँ मिलनेवाली थी ,
ये भी वो जानता था --

खैर!
दूसरे दिन उसने फिर बातेँ कीँ अपने वकील से और तलाक की कार्यवाही को किस तरह निपटाया जाये उस पर सलाह मश्वरा भी किया.
फिर शाम होते ही फ्रेश हो कर रोहित पीयूष के विवाह समारोह मेँ शामिल होने के लिये चल पडा !


-- धूम धाम, फूलोँ से सजा प्रेवेश द्वार, स्कूल कालिज के कई परिचित दोस्तोँ के चेहरे, बँबई के गुजराती परिवारोँ के सँभ्राँत बुजुर्ग वर्ग के सदस्य, कुछ परिचित कुछ नये चेहरे, आगे स्टेज भी फूलोँ से लदा सजा रँगीन रोशनी के बल्ब, हवा मेँ सँगीत लहरी बहती हुई, खुश्बुओँ के झोँकोँ से झकझोर कर बारी बारी से कह रहे थे, " आ जाओ भारत मेँ रोहित ! ये तुम्हारे देश का विवाह उत्सव है " --

सच! भारतीय शादीयोँ मेँ फूलोँ की जितनी तेज मादक सुगँध उसने महसूस की है वैसी खुश्बु लँदन अमरीका के बेशकिमती फूलोँ के गुल्दस्तोँ मेँ उसने नहीँ पायी -- भारतीय गुलाब व मोगरोँ के गजरोँ से महकती शामेँ , सर्वथा बेजोड होतीँ हैँ उसे ये पता था -

- " हेल्लो ! बीग शोट ! आप यहाँ तशरीफ लाये -- बडी मेहरबानी की हुज़ूर ! " इतना कहती , बेला उसके पास चल कर आयी -
उसकी सहपाठी थी वो -- और भी कई सारे मित्र उसे देखते सामने से चलकर आने लगे -
- बहुतोँ से वो कई महीनोँ बाद मिला था -
खूब बातेँ होने लगीँ --
कभी अमरीका की कितनी ट्रीप उसने कीँ उस के बारे मेँ
तो कभी क्या काम कर रहा है उस विषय पर ,
प्रश्न करते दोस्तोँ से रोहित , सबके जवाब देता मुस्कुराता हुआ खडा था

- तभी मनोज ने पूछा, " यार ! तेरी बीवी कहाँ है ? नहीँ मिलवाओगे ? "
अब रोहित ने जो सूझा कह दिया, ' आज उसकी तबियत ठीक नहीँ -
- इसलिये नहीँ आ पायी - मिलवा दूँगा - फिर कभी ! "

इतने मेँ बेला फिर चहक कर बोली,
" तुम्हारी गप्प मारने की आदत अब भी वैसी ही है रोहित !
केमेस्ट्री क्लास मेँ गली पार करके स्कूल आधा घॅँटा देरी से पहुँचते थे और रस्तोगी सर से कहते थे,
"ट्रेन लेट थी सर बैठ जाऊँ क्लास मेँ -?" -
ह हा ह ह हा ..हा ..झूठे कहीँ के !
वो देखो, रीना तो आयी है शादी मेँ !
वहाँ डा. मोदी के साथ कौन खडा है ? "


उसने कहा तो सारे मित्र मँडली की निगाहेँ उसी ओर घूम गईँ
जहाँ रीना अपनी डा. मम्मी के साथ खडी होकर आइस्क्रीम की तश्तरी
वेटर के हाथोँ से ले रही थी.

अब तो रोहित के चेहरे से खून उतर गया --
क्या कहता सब के सामने ?

" अरे यार, अब मिलवा दे रीना से " गौतम ने कहा तब तो रोहित की रही सही सँज्ञा भी सुन्न पडने लगी -
- क्या करे वो?
रीना उससे सीधे मुँह बात भी करेगी या नहीँ उसका रोहित को भरोसा नहीँ था -- और क्या ठाठ थे उसकी अब चँद दिनोँ की मेहमान बीवी जी के !
खूब सज सँवर कर आयी थी रीना --

रोहित मौन खडा था और उसके दोस्त ,
रोहित के, बदलते हाव भाव देखकर सोच रहे थे कि
"ये माजरा क्या है ? कुछ तो है जिसके तहत ये खामोश है ! "-

लोगबाग भी समझ लेते हैँ !
खत का मजमूँ , लिफाफा देखकर !

सो, भीड छँट गयी रोहित के इर्दगिद से
-- सिर्फ एक बेला वहीँ खडी उसका चेहरा पढने की नाकाम कोशिश कर रही थी, " क्या बात है ? Any problems my friend ? "
उसने पूछा तो रोहित ने दो टूक उत्तर दीया,
" Its a damn long story Bela ..
.I just lost my appetite ..
.will fill you in some other time Bela !
Come let's go wish our friend Piyush & his New Bride "
इतना कह कर रोहित नवविवाहीत वर वधु को
उनके विवाह पर अपनी बधाई और शुभ सँदेश देने स्टेज की ओर चल पडा --

" मुबारक हो सब को समाँ ये सुहाना ..
.मैँ खुश हूँ मेरे आँसूओँ पे न जाना ..
.मैँ तो दीवाना दीवाना दीवाना .
..मैँ तो दीवाना दीवाना दीवाना "
रोहित के जहन मेँ ये मुकेश जी का गाया हुआ गीत बजने लगा ..
.तो उसने सोचा
" हिन्दी फिल्मोँ के गाने हर मौके की तलाश मेँ छिपे बठे रहते हैँ घात लगाये ..
.मौका देखते ही छा जाते हैँ ...
और आज यही गाना उभर आया था


रीना की मम्मी ने रोहित को स्टेज पर खडे देखा तो अपनी लाडली को कुहनी मारकर सँकेत करके रोहित की उपस्थिती के बारे मेँ सावधान कर दीया --

माँ बेटी मौन ही रहे पर देखते रहे रोहित के नये सूट को -
- अब तो आगमन हो गया है महाशय का !
आगे क्या होगा देखते हैँ --
ऐसी ही कुछ अस्फुट सी बातेँ दोनोँ के बीच हुईँ ......
" चल बेटी -- हम भी मिल आयेँ नये जोडे को "
कहती मम्मी जी रीना को लेकर रोहित के सामने ही रीना के साथ स्टेज पर गईँ परँतु रोहित से कोयी बातचीत ही नहीँ की उल्टे वे रोहित से कतरा कर उतर गये और सामने ही सोफे पे जाकर पीयूष की मम्मी के पास बैठ गये ! --


ये सारा द्रश्य सारे मेहमानोँ ने न चाहते हुये भी देख ही लिया था और सभी जान गये कि रोहित का काम जिस तेजीसे सफलता की सीढीयाँ चढ रहा था उसकी निजी जिँदगी उतनी ही तेजी से,
मुँह के बल गिर कर , नीचे लुढक कर गर्त मेँ गिरी जा रही थी --

सभी जानते हैँ कि, समाज एक ऐसी व्यवस्था है कि, जब कोयी मुश्किल मेँ हो ,
-- गहरे पानी मेँ मेँ गोते खाता है तब लोग किनारे की सुरक्षित सतह से तमाशे को देखते रहते हैँ !
गहरे पानी मेँ डूबते को बचाने
कोयी बिरला ही छलाँग लगा कर मदद करने का साहस करता है ! -

- लोग देखते रहे, रोहित और रीना के इस अलग अलग आने और बैठने को -- ये कैसा दँपति है ?

"छोडो जी ...बडे लोगोँ की बडी बातेँ !!
-- अजी जो भी होगा आ जायेगा सामने .
.आखिर " डाइवोर्स " और " प्रेग्नन्सी "
कितने दिन कोयी छिपा लेगा भला ?
दुनिया के सामने आ ही जायेगा जो भी हो रहा है ! " -
- लोग फुसफुसा रहे थे -

- और रोहित अनसुना कर के वहाँ से जल्दी ही घर की ओर , अपने सूने मगर आलीशान आशियाने की ओर चल पडा -
- एक मशहूर चित्रपट के हीरो की बीवी जो आजकल " इन्टीरीयर डेकोरेशन " का सफल व्यवसाय कर रही थी
उसीने रोहित का फ्लेट, अत्याधुनिक साज सज्ज्जा से सँवारा था और रोहित ने मुँहमाँगी कीमत चुका कर रीना को तोहफे मेँ पेश किया था उन दोनोँ के नये आशियाने को !
और आज ये क्या हुआ ?
इसी आशियाने को छोड कर रीना
अपने मैके के शानदार तिमँजिले ,
राजसी शानो शौकतवाले घर को चुनकर ,
रोहित को अकेले छोड कर चली गयी थी --

अब रोहित उसे कोर्ट मेँ ही मिलेगा -
- उसने भी फैसला कर ही लिया -
- दुस्वप्न की तरह सारी कार्यवाही निपट गयी ..................
उसके बाद --
रीना ने एक अजीब प्रस्ताव रखा,
" रोहित क्या हम एक बार और साथ रहने का प्रयास करेँ ?
क्या खयाल है तुम्हारा ? "

और रोहित, ह