Friday, October 17, 2008

फ़िर भी

इस सादगी पे कौन न मर जाए
या खुदा वो क़त्ल भी करते हैं ,
हाथ में तलवार भी नही
हम चाहें या ना चाहें
फ़िल्म : फ़िर भी गायक : हेमंत कुमार संगीतकार : रघुनाथ सेठ

गीतकार : पण्डित नरेन्द्र शर्मा

हम चाहें या ना चाहें
हमराही बना लेती हैं
हमको जीवन की
हम चाहें या न चाहें ...
ये राहें कहाँ से आती हैं
ये राहें कहाँ ले जाती हैं
राहें धरती के तन पर
आकाश की फैली बाहें
हम चाहें या न चाहें ...
उतरा आकाश धरा पर
तन मन कर दिया निछावर
जो फूल खिलाना चाहें
हँस हँस कर साथ निबाहें
हम चाहें या न चाहें ...


संगीत : रघुनाथ सेठ फ़िल्म: फ़िर भी - १९७१ शब्द : पण्डित नरेन्द्र शर्मा
कलाकार : प्रताप शर्मा, उर्मिला भट्ट , निर्माता : शिवेंद्र सिन्हा

फिर भी : से दूसरा गीत है ...
गायक : मन्ना डे : kyon pyaalaa chhalaktaa hai

क्यूँ प्याला छलकता है :
क्यूँ दीपक जलता है
दोनों के मन में कहीं अनहोनी विकलता है
क्यूँ प्याला छलकता है पत्थर में फूल खिला
दिल को एक ख़्वाब मिला
क्यूँ टूट गए दोनों इसका ना जवाब मिला
दिल नींद से उठ उठ कर
क्यूँ आँखें मलता है.. हैं राख की रेखाएँ लिखती है चिंगारी
हैं कहते मौत जिसे जीने की तैयारी
जीवन फिर भी जीवनजीने को मचलता है॥

मन्ना डे :
प्रबोध चंद्र डे मई - १ १९२० मन्ना डे के नाम से मशहूर हुए हिन्दी सिने संसार के गायक हैं । बंगला भाषा में : মান্ না দে
मन्ना बाबू के पिताजी का नाम था पूर्ण चंद्र और महामाया डे माताजी थीं -- उनके चाचाजी संगीताचार्य कै .सी . डे थे जिन्होंने मानना बाबू को बहुत प्रभावित किया था -इंदु बाबर पाठशाला में उनकी शिक्षा हुई थी । उसके बाद स्कॉटिश चर्च स्कूल में आगे की शिक्षा हुई : Scottish Church College, और बाद में विद्यासागर कोलेज से स्नातक हुए ।बचपन से कुश्ती और घूंसेबाजी से मन्ना बाबू को लगाव रहा था ।

कृष्ण चंद्र डे से आरंभिक संगीत शिक्षा लेने के बाद , उन्होंने उस्ताद दबीर खान से संगीत सीखा। , मन्ना डे , ३ साल कोलेज प्रतियोगिता में जीते थे । कृष्ण चंद्र डे १९४२ में मुंबई ले कर आए जहाँ सहायक के रूप में मन्ना बाबू ने काम किया - और फ़िर , सचिन देव बर्मन जी के लिए काम किया और कई संगीत निर्माताओं के लिए काम करते हुए स्वतंत्र कार्य शुरू किया।

उस्ताद अमन अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान . तमन्ना , १९४३ . से शास्त्रीय संगीत की तालीम लेते रहे ।

तमन्ना , १९४३ में बनी फ़िल्म प्रथम रही जिससे उन्हें ब्रेक मिला। सुरैया जी के साथ गीत गाया जो बहुत सराहा गया और एक गीत " ऊपर गगन विशाल " ,

फ़िल्म में गाया जो प्रसिध्ध हुआ । १९५० मशाल , सचिन देव बर्मन की धुनों से सजी फ़िल्म भी सफल हुई । १९५२ , फ़िल्म अमर भूपाली .बंगाली और मराठी में बनी फिल्म सफल हुई और मन्ना बाबू सफल हुए

यह दोस्ती , हम नही तोडेगे गीत फ़िल्म : शोले में गाया हुआ और एक चतुर नार कर के सिंगार फ़िल्म पडोसन का ये मन्ना बाबू के बहुत बाद के सफलतम गीत हैं

हेमंत कुमार मुखर्जी भी बँगाल से आये और बम्बई फिल्म इन्डस्ट्री मेँ बहुत लोकप्रिय हुए।

३५०० से ज्यादा गीत मन्ना बाबू ने गाये हैं ।

दिसम्बर १८ , १९५३ , मन्ना डे ने सुलोचना कुमारन जो केरल प्रांत से हैं उनसे विवाह किया । शुरोमा , अक्टूबर १९ , १९५६ ,और सुमिता , जून २० , १९५८ को जन्मी उनकी २ बेटियाँ हैं । .
बंगाली में लिखी "जिबोनेर जल्सघोरे " मन्ना बाबू की आत्मकथा है

"यादें जी उठी " हिन्दी में पेंगुइन बुक्स से प्रकाशित हुई है

पद्मभुसन मन्ना बाबू को भारत सरकार ने दिया
१९६९ National Film Award for Best Male Playback Singer , मेरे हुजुर के लिए मिला १९७१ में National Film Award for Best Male Playback Singer बंगाली निशि पद्मा को मिला - १९७१ में पद्म श्री मिला
क़व्वाली : ' 'यह इश्क इश्क है , ए मेरी जोहरा -जबीं , यारी है इमां मेरा
प्यार भरे नगमे : प्यार हुआ इकरार हुआ , आ जा सनम मधुर चांदनी में हम ,तुम गगन के चंद्रमा हो , दिल की गिरह खोल दो , ये रात भीगी भीगी , सोच के ये गगन झूमे , शाम ढले जमुना किनारे इत्यादी हैं

भाव भरे गीत : जिंदगी कैसी ये पहेली हाय , कसमे वादे प्यार वफ़ा , हरतरफ अब ये ही अफसाने हैं , नादिया चले चले रे धारा , जैसे गीत हैं

मस्ती भरे नगमे : आओ ट्विस्ट करे ,किसने चिलमन से मारा ऐ भाई , जरा देख के चलो , झूमता मौसम मस्त महिना , एक चतुर नार , चुनरी संभल गोरी

देश भक्ति के गीत : ए मेरे प्यारे वतन , जाने वाले सिपाही से , होके मजबूर ,

भक्ति गीत : तू प्यार का सागर है , , भज रे मन राम सुखदाई , और

मधुशाला के सारे गीत मन्ना बाबू की हिन्दी साहित्य के प्रति अनुपम भेंट ही है --

18 comments:

Harshad Jangla said...

Lavanyaji
Very nice, interesting and omformative article.
I was looking to hear the song of Phir Bhi but did not find any link. It is always a pleasure to hear a song penned by Papaji.
Thanx.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA

Udan Tashtari said...

बहुत अच्छा लगा आपकी इस प्रस्तुति को पढ़ कर.आभार.

Gyandutt Pandey said...

पण्डित नरेन्द्र शर्मा का जितना प्रकटन आप हमारे समक्ष करती जाती हैं, उनके प्रति श्रद्धा उतनी बढ़ती जाती है।

सतीश सक्सेना said...

बहुत अच्छा लगा !

BrijmohanShrivastava said...

दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं /दीवाली आपको मंगलमय हो /सुख समृद्धि की बृद्धि हो /आपके साहित्य सृजन को देश -विदेश के साहित्यकारों द्वारा सराहा जावे /आप साहित्य सृजन की तपश्चर्या कर सरस्वत्याराधन करते रहें /आपकी रचनाएं जन मानस के अन्तकरण को झंकृत करती रहे और उनके अंतर्मन में स्थान बनाती रहें /आपकी काव्य संरचना बहुजन हिताय ,बहुजन सुखाय हो ,लोक कल्याण व राष्ट्रहित में हो यही प्रार्थना में ईश्वर से करता हूँ ""पढने लायक कुछ लिख जाओ या लिखने लायक कुछ कर जाओ "" कृपा बनाए रखें /

जितेन्द़ भगत said...

informative post.thanx

Radhika Budhkar said...

सुंदर गीत पंक्तिया हैं ,बहुत बहुत आभार ,आप नई नई और अच्छी जानकारी देती हैं ,धन्यवाद !

सजीव सारथी said...

very nice lavanya ji its a pleasure reading u

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत धन्यवाद, लावण्या जी. दूसरा वाला गीत (क्यूँ प्याला छलकता है) तो मैंने आज पहली बार पढा.

seema gupta said...

"thanks for sharing"

Regards

रंजना [रंजू भाटिया] said...

हैं कहते मौत जिसे जीने की तैयारी
जीवन फिर भी जीवनजीने को मचलता है॥

बहुत बढ़िया पोस्ट ..यह मैंने पहली बार पढ़ा गाना .बहुत अच्छा लगा

डॉ .अनुराग said...

सच में एक बेहद गुणवान व्यक्तित्व रहे आपके पिता श्री .

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

बहुत बढ़िया लगा पंडित जी के बारे में जानना

ताऊ रामपुरिया said...

हमेशा एक नई बात और सार्थक प्रेरक सोच ! आपके ब्लॉग पर हमेशा ही आना शुकून देता है ! बहुत कुछ यादे ताजा हो जाती हैं और जानकारी में इजाफा हो जाता है ! ऐसे ही अनवरत सिलसिला चलता रहे ! मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

अभिषेक ओझा said...

आभार, इस प्रस्तुति के लिए !

राज भाटिय़ा said...

बहुत धन्यवाद, मेरी पंसद के गीतो की जान कारी आप ने दि, यह सभी गीत मेरे पास है, ओर अक्सर सुनता भी हु,

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

sundar prastuti. padhakar purane gano ki yade tarotaja ho gai . dhanyawad.

समीर यादव said...

मन्ना दा उन अलहदा गायकों में थे, जिनके पास शास्त्रीय राग की सिखलाई और अद्भुत समझ थी. भारतीय सुगम संगीत को उनका योगदान अप्रतिम है. आपको धन्यवाद इस तरह की प्रस्तुति के लिए.