Monday, April 14, 2008

" न हम होगे " न तुम होगे "

ROME (AFP) - A pair of 6,000-year-old skeletons found by Italian archaeologists in a dying embrace will not be separated, team leader Elena Menotti has told AFP."We will do everything possible to preserve the bodies in the exact position of their grave,""There's no question of breaking their embrace."The skeletons were found last week during digging in an industrial zone near the northern city of Mantua and the find will be displayed at the city's archaeological museum.While scientists are still puzzling over how the pair died and why they were buried in this way, Menotti said their embrace was "testimony to a great feeling of love that has transcended time."For regardless of why they were buried in each other's arms, there had to have been feelings between them."

एक समाचार ने 'मुहब्बत " लफ्ज़ पर फिर एक बार सारा ध्यान केँद्रीत कर दीया !

-क्या कुछ नहीँ लिखा या कहा गया है इस एक शब्द पर ! अरे ॥ ढाई आखर है ना "प्रेम " का ! "प्यार" का भी एक से ज्यादा ही पडता है गिनती मेँ हिसाब-पर " इश्क " किसी हिसाब से बँधा है कहीँ ?

ये सुना होगा , कि," हीज़ाबे मुहोब्बत, हम उसको थे कहते, ना वो बोलते थे , न हम बोलते थे "या फिर ये कि," मोहोब्बत की किस्मत बनाने से पहले, ज़माने के मालिक, तू रोया तो होगा "उफ्फ~क्या और कहेँ ????कल एक बेशकिमती तोहफा डाक से आया ! श्रीमान राधेक़ाँत दवे जी ने व श्रीमती कुसुम दवे जी ने एक सँगीत ओडीयो टेप भेजी

नाम था " हुस्न -ए - जाँ : ~

सँगीत निर्देशक हैँ मुज़फ्फर अली -गीतोँ को गा रहीँ थीँ छाया गाँगुली -१) " यारो मुझे मुआफ रखो" ( मीर )

२) खूनेज करिश्मा नाज़ सितम ( नज़ीर अकबराबादी )

३) जब फागुन रँग ( नज़ीर)

४) पिया ब्याज प्याला ( कुतुब शाह) *( छाया व इकबाल सिद्दीकी )

५) निठुरे निठुरे॥अँगना बुहारुँ पहन के कँगना * (ज़रीना बेगम )और अँत का गीत था

६) न तुम होँगेँ न हम होँगेँ ॥" ( नज़ीर) * ( रोली सरन और नवेद सिद्दीकी )

अँतिम गीत, बडी, सहजता से आरँभ हुआ ~

~शब्द / अलफाज़् यूँ घुल रहे थे मानोँ, ज़िन्दगी की हुबहु तस्वीर उभर रही हो !~माशूका कह रही थी कि, ' आज हँस कर बोसा ले लो, प्यार से गले मिलो, चुहल करने के लिये, लतीफे सुनने सुनाने के लिये, आज का वक्त है, तो,। ॥मुहब्बत से पेश आओ हम से आकर मिलो, फिर न जाने, क्या हो ?-

" न तुम होगे न हम होगे "

गीत कुछ इस तरह से दीलोदीमाग मेँ बसने लगा कि पता भी न चला कब आँखेँ नम हुईँ , न जाने कब दबी सिसकीयाँ रह रह कर, मन मसोस कर, गहरे, कहीँ धधकते ज्वालामुखी की तरह, रुह को झकझोर कर सँगीत के साथ साथ, एकाकार हो गईँ !

ये नज़ीर का कलाम था कि, सब कुछ ले डूबा !

मेरे जीवन के दाम्पत्य के क्षण, ३३ सालोँ का लँबा सफर, उससे पहले, १६ /१७ साल की आयु मेँ , अपने जीवन साथी से , पहली बार मिलना, उससे पहले, एक ही गुजराती स्कूल मेँ कक्षा १ से , उन्हेँ देखना, साथ साथ, बडे होना, बचपन की देहलीज को पार कर, वयस्क होना, फिर, परिवार के सभी से जान पहचान , एक दूसरे के घर पर , भोजन करना, गप्पे लडाना, शादी ब्याह, २ सँतानोँ के अभिभावक बनना ~पुत्री सौ. सिँदुर का ब्याह, फिर सोपान की मँगेतर मोनिका से मिलना और उनकी शादी .....

~ ज़िँदगी, पलक झपकाती, किसी, तिलस्मी दुनिया से उतरी 'नाज़्नीन परी सी , मुस्कुराती, शरारत से, आँखेँ मुँद कर, हल्के से,माथा चूमकर, कह रही है," बता मैँ कौन हूँ ?" -

- इतना ही दील से निकला,

" तू मेरी सहेली है....रुह की परछाईँ है " -

-- लावण्या





20 comments:

Gyan Dutt Pandey said...

बहुत टची है यह प्रेम-जौहर की खबर। कौन लोग होंगे, क्या भाव होंगे, कितना स्नेह होगा....

Alpana Verma said...

मैं कल्पना कर रही थी कि कितना प्यार होगा उन दोनों में जो आज से ६००० साल पहले के लोगों ने स्वीकार और उन्हें इस तरह दफ़न किया ..
ज़िंदगी सहेली तो है मगर वो भी कहाँ पूरा साथ देती है--लेकिन जितना साथ दे उसी में खुश रह सकें तो फ़िर कल चाहे न तुम हों ,न हम हों .

arbuda said...

यदि पहचाने तो प्रेम में बहुत ताकत है.आपकी पोस्ट में मेरा दिल भी डूब गया.

ज़िंदगी में खूबसूरत लम्हे यादगार बन जाते हैं और सही मायने में यही थाती है ज़िंदगी की.

बहुत पसंद आयी यह पोस्ट.

डॉ .अनुराग said...

adbhut.......bemisall..

पारुल "पुखराज" said...

siharan hui padhkar ,DIDI! THX

mamta said...

लावण्या जी आपकी पोस्ट का एक अलग ही अंदाज होता है जो दिल को छू जाता है।

Udan Tashtari said...

एकदम निराली पोस्ट-अद्भुत अंदाज.

PD said...

mere pas ye geet mp3 me hai.. aapko chahiye to mujhe batayiyega.. aur agar aapke pas pahle se hi ho to mujhse share kijiyega, kyonki mere pas jo hai uska sound quality bahut achchha nahi hai.. :)

Unknown said...

गजब दो हंसों का जोड़ा.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

ज्ञान भाई साहब जी हाँ ..अवशय ये कोई प्रेमी युगल होगा ..

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

अल्पना जी सही कहा आपने ..बहुत प्रेम होगा जी हाँ ज़िँदगी सहेली तो है परँतु, साथ उतना ही निभायेगी जितनी उसकी डोर होगी !

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

अर्बुदा जी आप पहली बार मेरे जाल घर पे तशरीफ लाईँ हैँ आप का स्वागत है और पोस्ट पसण्द करने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया !

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Thank you so much Anurag bhai --

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Thank you so much dear Parul -- appreciate your thoughts
Rgds,
L

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

समीर भाई , शुक्रिया -- कब कनाडा को तशरीफ ला रहेँहैँ आप लोग ? :)

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

ममता जी आप ने इतने प्यार से मेरे लिखे को सराहा है कि मैँ , क्या कहूँ ? शुक्रिया तो महज़ एक लफ्ज़ है -

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

जी हाँ अतुल भाई -
दो हँसोँ का जोड़ा बिछुड गयो रे !

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

PD ,
I am an absolutely "Non - Techie " person ! :-(
Don't know how to format the songs to be able to send it to you :-(
If you can send it , I'll appreciate it ..Thanx !

मीनाक्षी said...

बहुत खूबसूरत लेख... एक एक शब्द प्रेम रस में डूबा..

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आपने सराहा ...शुक्रिया ..