Monday, December 22, 2008

५* तापमान कैसा होगा ? देखना चाहेंगें ?

ये महिला न्यू यार्क के पार्क में थक कर सुस्ता रहीं हैं ...
सभी टेबल व कुर्सियां बर्फ से भरी हुईं हैं ऐसे में वेटर महाशय भी नदारद हैं :)
...कल , मेरे शहर में ५ * तापमान था !
कडाके की ठण्ड पडी !
...बाहर कार में बैठने जाओ , तब भी लगे की कब , घर के भीतर जाएँ ! बाबा रे !
अब देखिए कुछ चित्र , जो अमरीका के विविध शहरों से लिए गए हैं ....
जहाँ , हमारे शहर से भी नीचे तक तापमान गया था ...
शिकागो, विस्कांसिन , बफेलो, मीनेसोटा, न्यु हेम्पशायर , मिल्वोकी , बोस्टन, न्यू जर्सी , न्यू यार्क, आईओवा , पेन्सिल्वेनिया , कनेटिकट , वोशिंग्टन, मेरी लैंड , ये सारे उत्तर पूर्वी इलाके के बड़े बड़े प्रांत , कल , बेहद ठण्ड का सामना कर रहे थे।
पश्चिमी प्रान्तों में भी काफी ठण्ड रही ...
अमरीकी जीवन शैली की ये एक ख़ास बात है
यहाँ हर तरह के बदलाव के साथ ,
जन जीवन यूँ ही , अबाध गति से , व्यस्तता से , जारी रहता है।
काम चलता ही रहता है।
जैसी भी परिस्थितियाँ हों , उनसे झूझने के उपाय फ़ौरन लागू किए जाते हैं
और जन - जीवन को सामान्य बनाने के उपाय , शीघ्र लागू करना हरेक प्रांत की नगर निगम सेवा का जिम्मा है ... और जनता से लिया गया " कर " माने " टैक्स" , इस्तेमाल होता हुआ , आप , हर जगह पर देख सकते हैं।
सबसे पहले ये देखिये,
बाहर क्रेब एप्पल के पेड़ पर , " फिंच " नामक पक्षी बैठा है ...सुंदर है ना ?
बिल्कुल hallmark कार्ड के जैसा ....
और जब जब स्नो गिरती है , लोग अपने घरों के बाहर एकत्रित हुई स्नो को इस तरह स्नो शवल से , दूर करते हैं ....
बहुत कड़े परिश्रम का काम होता है ये ॥
स्नो वजनी होता है और जिन्हें कमजोर दिल की आरोग्य की समस्या हो
उनके लिए ये काम खतरनाक भी साबित होता है -
और ये एक रास्ता क्रोस करते हुए जनाब हैं ,
उनका चेहरा दीखता ही नहीं इतना स्नो गिरा है -
- गाडियां रास्तों पे आ - जा रहीं है - यातायात , इस हालत में भी , जारी है -- काम पे जो जाना है ! जहाँ बिल भरने हों वहां , विपरीत परिस्थिति हो , फ़िर भी रोना कैसा ? रुकना कैसा ?
अमेरीकी नगर निगम ऐसे ट्रेक्टर नुमा मशीन का इस्तेमाल करती है जो रास्तों पर से , स्नो को हटाते हैं और रास्तों पर नमक भी छिड़का जाता है जिससे बर्फ पिघल जाती है !

रास्ते साफ़ किए जाते हैं और हवाई जहाजों को भी स्नो रहित किया जाता है इस तरह , मशीन से , ऊपर जा कर , केमिकल स्प्रे किया जाता है
जिससे बर्फ पिघल जाती है -
इस प्रक्रिया को , " di -icing " कहते हैं --
जब कंट्रोल रूम से , पायलट को स्वीकृति मिल जाती है
उसके बाद ही उड़ान के लिए यात्री विमान में , सवारी के लिए आमंत्रित किए जाते हैं -- यहाँ एक कर्मचारी यही काम कर रहा है --
तब तक सारे यात्री , इन्तेजार करते हैं , प्रतीक्षा लाउंज के विशाल कमरे में लगे विशाल शीशे से बाहर की गतिविधि का निरिक्षण करते हैं।
अमेरीका में आर्थिक मंदी के रहते हुए भी , क्रिसमस के सबसे बड़े त्यौहार के आने से , असंख्य नागरिक , एक हिस्से से दुसरे तक यात्रा करेंगे
अपने परिवार के लोगों के साथ मिलकर , छुट्टी बिताना पसंद करेंगे।
स्नो गिरे या बरखा , गरमी हो या लू चले, काम काज चलता ही रहता है
शायद यही आज के अत्यन्त व्यस्त जीवन शैली की देन है समाज को !
अब क्या भारत या क्या विदेश ? सभी व्यस्त हैं ! अपने अपने कार्यों में !
२००८ का ये साल कई विभिन्न तथ्यों को लेकर सामने आया ......
और अब समापन की और अग्रसर हो रहा है।
रह गए , शेष ५ दिवस ।
आशा है ये सभी के लिए सुख शान्ति सुकून लेकर आएं
और आनेवाले नव -वर्ष में भी सुख शान्ति और अमनो चैन कायम रहे।
विश्व प्रगति के पथ पर आगे बढे और दुखी गरीब और हताश मन को
नई आशा और उमंग का तोहफा मिले ....
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नव वर्ष मंगल मय हो !






27 comments:

Neeraj Rohilla said...

लावण्याजी,
बहुत बढिया चित्र दिखाये आपने । इस साल हमारे शहर ह्यूस्टन में भी एक दिन ३ घंटे के लिये हल्की बर्फ़बारी हुयी थी । बहुत सर्दी हो तो कभी ह्यूस्टन आ जाईये, मौसम बहुत अच्छा रहता है सर्दियों में ।

आपको एवं आपके परिवार वालों को क्रिसमस की बधाईयाँ ।

आभार,

अशोक मधुप said...

बहुत ही बढ़िया फोटों। हम हिंदुस्तानवासियों के लिए तो बर्फ के दर्शन एक दुर्लभ बात होती है।

Alag sa said...

पिछले दिनों यहां भी पहाड़ों पर समय से कुछ पहले ही बर्फ गिरी। काफी हिमपात हुआ। हाई-वे पर तो मशीनों से ही सफाई होती है पर घरों के सामने से बर्फ हटाने में काफी मुश्किलें सामने आयीं।

सुंदर चित्रों के लिये आभार ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर चित्र, खुब मजा आ रहा है बर्फ़ का आप को, हमारे यहां तो पिछले तीन साल से बर्फ़ ही नही गिर रही... चार साल पहले गिरी थी १, २ मीटर बस
धन्यवाद

वर्षा said...

पहली दो तस्वीरें तो बहुत ही सुंदर। यहां तो अब तक सर्दियों ने दस्तक नहीं दी

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

हम ने बर्फ को चित्रों में ही गिरते देखा है। यहाँ अभी तक सर्दी नहीं थी। आज कुछ सर्दी चमकी है।
आप को व परिवार को आने वाले नववर्ष की बधाई।

विनय said...

भई मज़ा आ गया

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http://prajapativinay.blogspot.com

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर चित्र हैं। हम तो थोड़ी बहुत ठंड को तरस जाते हैं।
घुघूती बासूती

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुंदर चित्र व जानकारी. हमारे यहाँ बर्फ तो इतनी नहीं है मगर तापमान ज़रूर काफी नीचे आ गया है. ठंडी हवा के साथ मिलकर यह काफी ख़राब है. छोटे-मोटे ताल-तलय्ये पूरी तरह जम गए हैं हालांकि खिड़की से देखने पर नदी तो अभी भी बहती हुई नज़र आ रही है!

अल्पना वर्मा said...

bahut sundar pictures hain..isee saal ke shuru mein humne Canada visit kiya tha--Toronto mein hum ne -20 [minus20]degree ki bhi barfbaari dekhi thi.bahut hi romanchak anubhav raha--subah 3 baje se roads,parking etc ki barf hatane wale vehicles aatey they--itni safayee se barf hatatey they -ki dekhtey banta tha-
-main ne to snow storm mein jaan buujh kar bahar aa kar khub enjoy kiya tha--aap ne phir se sab yaad dila diya--shukriya!
आप को व परिवार को आने वाले नववर्ष की बधाई।

Gyan Dutt Pandey said...

पढ़ कर बहुत सर्दी लग रही है। कंपकंपाने वाली पोस्ट!

अशोक पाण्डेय said...

धन्‍यवाद, लावण्‍या दी। आपकी बदौलत हमने यहां बैठे-बैठे अमरीका की बर्फबारी के दर्शन कर लिए :)

Arvind Mishra said...

ऊफ देखकर ही कंपकपी छूट गयी ! हम तो यहाँ बनारस में ११ डिग्री पर ही गुडगुडा रहे हैं ! कैसा जीजिविषा है लोगों की ! ऐसे ही मनुष्य ने सारी धरती पर विजय की पताका नही फहरा दी !
बड़े दिन और नववर्ष की शुभकामनाएं !

अभिनव said...

वाह दीदी.. बहुत सुंदर चित्र देखने को मिले.....

नितिन व्यास said...

वाह! वैसे ये ५ डिग्री फेरनहीट के चित्र हैं या ५ डिग्री सेल्सियस के?

yunus said...

वाह वाह वाह । क्‍या तस्‍वीरें हैं । मुंबई में इतनी गर्मी है कि पंखे और एसी के बिना रहना मुश्किल है । पर तस्‍वीरें देखकर हम स्‍वेटर ढूंढने चल पड़े हैं

Harshad Jangla said...

लावण्या दी
बहुत रसप्रद जानकारी | एटलांटा में भी कभी कभार बर्फ देखनेको मिलती है | वैसे सर्दी काफी लगती है | गर्म कपड़े और मोजे और टोपी और मफलर और कानो की earmuffs वगैरा पहन्नेका आनंद तो कुछ और ही है |
नए साल की आप सबको बधाइयां |

-हर्षद जांगला
एटलांटा , युएसए

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुन्दर चित्र ! मजा आ गया ! आपको क्रिशमश पर की बधाई !

मेरे ब्लाग पर आपकी पोस्ट आज सुबह दिखी है कृपया मेरे लॆट होने को क्षमा करियेगा !

रामराम !

कुश said...

हम तो राजस्थान में रहने वाले है.. ये सब तो सपना ही है

उन्मुक्त said...

हू ऊ... ऊ दांत कटकटा रहे हैं :-)

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह बहुत बढ़िया चित्र हैं ...पढ़ कर ही ठण्ड लगने लगी है ..

रंजना said...

उफ़ ये फोटो देखकर ही दांत किटकिटाने लगे..
लेकिन फ़िर भी चित्र(फोटोग्राफ) मनमोहक लगे .इस सुंदर पोस्ट के लिए आभार.

डॉ .अनुराग said...

सोचिये इस कम्पूटर से जो धूया आपको दिख रहा है ,वो दिल जलने की निशानी है ..पर क्या करे ....अब दिहाडी मजदूर भी हो गए है...शिमला में ऊपर घुमते घुमते एक डॉ का क्लीनिक देखा....सोचा साला यहाँ कौन आता होगा ...कैसे ओर कितना कमाता होगा.ये ......मुआफ करना.....बर्फ बारी देख कर दिमाग फ़िर गया ....हम बस कोहरे से ही दिल बहलाते है....हाय !

महेंद्र मिश्रा said...

अमरीका की बर्फबारी के दर्शन कर लिए..बहुत बढिया सुंदर चित्र...कंपकपी छूट गयी ..नववर्ष की बधाई

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

नितिन भाई - ये ५* फेरनहीट है

गौतम राजरिशी said...

मैं तो देख कर भी सिहर उठता हूं....कुछ ऐसी तस्वीरें कुछ ऐसी यादें जुड़ी हुई हैं इन बर्फों से कि मन कभी पुलकित तो हो नहीं सकता इन्हें देख कर...

राधिका बुधकर said...

बहुत बढ़िया लावण्या जी ,आप हमें यहाँ बैठे बैठे वहा के तापमान के दर्शन करवा रही हैं,मजा आया इस यात्रा में ,धन्यवाद .