Sunday, March 8, 2009

ऐसो है कोई परम सनेही...



घर आँगन न सुहावे, पिया बिन मोहि न भावे

दीपक जोय कहा करूँ, सजनी हरि परदेस रहावे

सूनी सेज ज्यूँ लागे सिसक सिसक जिय जावे

नयन निद्रा नहि आवे

कब की ऊभी मैँ मग जोऊँ , निस दिन बिरह सतावे

कहा कहूँ कछु कहत न आवे, हिवडो अति अकुलावे

हरि कब दरस दिखावे

ऐसो है कोई परम सनेही, तुरँत सँदेसो लावे

वा विरियाँ कब होसी म्हाँको, हरि सँग कँठ लगावे

मीरा मिल होरी गावे

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पँथ निहारूँ

प्राण सखा का पँथ निहारूँ

बारूँ चँदा दीप !

सुर बिन प्यारे मुरलिया सूनी,

बिन बसँत के बगिया सूनी,

कन्त बिन सूना सब जीवन,

मोती बिन ज्योँ सीप !

शून्य पथ, मुँह मोड न पाऊँ !

आशा का जी तोड न पाऊँ !

पर कैसे, मन, समझाऊँ , क्योँ ~~

प्रीतम नहीँ समीप !

- पण्डित नरेन्द्र शर्मा

होली और बसंत हो , फागुनी बयार हो और बिरह व्यथा से अवसादित मन हो ये हमारे साहित्य में मार्मिकता से कविता तथा कथा वार्ता में , बखूबी दर्शाया गया है ।-
आज की ये पोस्ट उन सभी विरही मन के प्रति समर्पित है ।
साहित्याकाश के २ नक्षत्र एक मध्यकालीन और दूजे बीसवी सदी से
बिरहा ह्रदय की व्यथा का निरूपण करतीं
हैं इन दोनों कविताओं में ....
मीरां जी प्रातः स्मरणीय , पवित्रात्मा हैं । महारानी राजपूतानी हैं और श्री कृष्ण की आराधना का मूर्तिमंत स्वरूप !
जिनकी सुमधुर वाणी आज भी समकालीन है ।
पण्डित नरेंद्र शर्मा कवि के रूप में , हिन्दी साहित्य को अनमोल गीत - कविता दे गए हैं जो श्रृंगार, बिरह, भक्ति, ज्ञान तथा हमारी विरासत का प्रतिबिम्ब लगतीं हैं ।

- लावण्या






31 comments:

Harshad Jangla said...

Lavanya Di

Nice poems and write up too.
Pranam to papaji.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA

राज भाटिय़ा said...

लावण्या जी अति सुंदर कविता के लिये
आप का धन्यवाद

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

लावण्या जी,
सुन्दर कविताओं और चित्रों के लिए आभार! पंडित जी की कविताओं की तो बात निराली है ही, भक्ति-काल की महान कवियित्री मीराबाई की रचनाओं को तो मैं विश्व की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में गिनता हूँ, जो देश-काल की हर सीमा से परे हैं.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

सुंदर कविता
समयचक्र: रंगीन चिठ्ठी चर्चा : सिर्फ होली के सन्दर्भ में तरह तरह की रंगीन गुलाल से भरपूर चिठ्ठे

Aflatoon said...

स्वर्गीय पूज्य नरेन्द्र शर्माजी की स्मृति को प्रणाम ।

Tarun said...

सुन्दर कविता के लिये धन्यवाद, होली की शुभकामनायें।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

इस अवसर पर आप ने मीरा का स्मरण करा दिया। वह जीवन भर कृष्ण में ही अवस्थित रही। उन का प्रेम और विरह केवल लौकिक था। वे तो खुद कृष्ण मय थी और सारी दुनिया भी उन के लिए कृष्णमय थी।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही मनोहारी चित्रों से आपने इन दोनो ही कालजयी रचनाओं का आनन्द कई गुना बढा दिया.

महारानी मीरा की रचनाएं भक्ति की पराकाष्ठा है और पंडित जी की रचनाएं तो अपने शब्दों से अलग ही विश्व का निर्माण करती हैं. उनका कोई मुकाबला नही है.

आपको बहुत धन्यवाद. परिवार सहित आपको होली की बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

मोना परसाई "प्रदक्षिणा" said...

उदास अलसाये मौसम में मीरा और शर्मा जी की रचनाओं में व्यक्त आलौकिक विरह वेदना अंतर्मन भिगो गईं . साधुवाद

mamta said...

जितने सुंदर और मनमोहक चित्र उतनी ही सुंदर कवितायें ।
आपको और आपके परिवार को होली मुबारक हो ।

Arvind Mishra said...

पण्डित नरेन्द्र शर्मा जी की कवित ने मन के कई सुषुप्त परतों को उकेरा -होली पर रंगमय आदर्भरी शुभकामनाएं !

कंचन सिंह चौहान said...

पोस्ट का धन्यवाद दी...!

आपको होली के पर्व की शुभकामनाएं

Poonam Agrawal said...

Lavanyaji, Beautiful pictures n beautiful poem

Wish u a very happy HOLI

Mrs. Asha Joglekar said...

लावण्या जी बहुत सुंदर चित्र और उससे सुंदर कविताएँ । बधाई होली की भी और प्रस्तुति की भी ।

नीरज गोस्वामी said...

Adbhut Chitra....Waah
आपको होली की शुभ कामनाएं ...
नीरज

विनय said...

होली की आपको और आपके परिवार में समस्त स्वजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

सुन्दर! हे कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे!
भक्ति रस से सन गया मैं।

pallavi trivedi said...

सुन्दर चित्रों के साथ अपनी बात कहने में आपका कोई जवाब नहीं है.....होली की शुभकामनाएं!

मीनाक्षी said...

विरह के रंग में रंगी रचनाओं ने व्याकुल कर दिया..हरि नहीं समीप ,,,पिया भए परदेस..
आपके पिताजी की लेखनी से जन्मी सभी रचनाएँ अनमोल विरासत हैं.

सुलभ [Sulabh] said...

मन को मोरा झकझोरे छेड़े है कोई राग
रंग अल्हड़ लेकर आयो रे फिर से फाग
आयो रे फिर से फाग हवा महके महके
जियरा नहीं बस में बोले बहके बहके...

हिंदी ब्लोगेर्स को होली की शुभकामनाएं और साथ में होली और हास्य
धन्यवाद.

अल्पना वर्मा said...

adbhut kavitayen hain!

chitr bhi itne sundar hain bas!

in kavitayon ki prastuti ke liye aap ka abhaar.

Holi parv ki shubhkamnyon sahit..

alpana

KK Yadav said...

Bahut sundar kavita
______________________________
होली के शुभ अवसर पर,
उल्लास और उमंग से,
हो आपका दिन रंगीन ...

होली मुबारक !
'शब्द सृजन की ओर' पर पढें- ''भारतीय संस्कृति में होली के विभिन्न रंग''

dwij said...

अनुपम मनोरम चित्रों व रचनाओं की प्रस्तुति के लिये आभार
.होली की बहुत-बहुत बधाई.



www.dwijendradwij.blogspot.com

विनीता यशस्वी said...

Nice pictures and nice poem...

aapko holi ki shubhkaamnaye...

Dr.Bhawna said...

बहुत सुंदर रचना... होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

Manoshi said...

लावण्य दी, आपको पूरे परिवार समेत होली की हार्दिक शुभकामनायें।

P.N. Subramanian said...

अलौकिक. तुलनात्मक प्रस्तुति सशक्त रही. पडितजी को नमन. आभार.
हम इसे चूक ही जाते. कुछ दिनों से नेट की मेहरबानी रही.

योगेन्द्र मौदगिल said...

होली मुबारक......

रंजना said...

मनमोहक चित्रों और हृदयस्पर्शी रचनाओं ने मुग्ध कर लिया........बहुत बहुत आभार आपका..

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आप सभी की टीप्पणियोँ का शुक्रिया

-लावण्या