
मलिका पुखराज ...मलिका - ऐ -- तरन्नुम को सुनिए लो फ़िर बसंत आयी
http://www.youtube.com/watch?v=jq3bb33sElU&feature=related
लो फ़िर बसंत आयी --- सुनिए ये नगमा , मलिका जी, ताहीरा की आवाज़ में
मलिका पुखराज ओर ताहीरा सैयद उनकी बिटिया -- लाइव -- अभी तो मैं , जवान हूँ
http://www.youtube.com/watch?v=GUuXAHfQz7k&feature=related
रीम झीम रीम झीम पड़े फुहार http://members.tripod.com/oldies_club/malika_pukhraj.htm
जन्म: १९२१ - जम्मू कश्मीर में हुआ ओर देहांत -- २००४ लाहौर पाकिस्तान में हुआ
उस्ताद अल्लाह बख्श साहब ने मलिका पुखराज को संगीत शिक्षा दी।
कश्मीर के महाराजा हरी सिंहजी के राज दरबार में ८ साल की उम्र में , मलिका ने गीत गा कर सभी को रीझाया तभी से वे , राज दरबार से जुड़ गयीं -उसके बाद, ८ दशक तक वे, ठुमरी, गजल, भजन, लोक गीत व पहाडी गीतों में उनके हुन्नर ओर महारथ की वजह से , मशहूर हुईं ओर पाकिस्तान जाकर बस गयीं। सैयद शब्बीर हुसैन खान साहब से ब्याह रचाया ओर ६ संतानों की माँ बनी -
साथ ही संगीत का सफर जारी रहा। Song Sung True उन्होंने अपनी आत्म कहानी लिखी है - जिस हाल, मैं, पढ़ रही हूँ जिसके कारण , उनके बारे में जानकारी हासिल करने की उत्सुकता हुई ओर इस प्रविष्टी का आगाज़ हुआ -
इसी किताब में एक जगह वे लिखतीं हैं " देहली में , मैं, २ बहनों से मिली : चवन्नी ओर दुअन्नी , जितनी चवन्नी , बदसूरत थी उतनी ही दुअन्नी बला की खुबसुरत थी पर, दोनों गातीं बहुत अच्छा थीं " उस पुराने समय की देहली शेहेर की बातें , कश्मीर के जम्मू इलाके की कई बातें तथा उनकी तालीम के बारे में , फ़िर कश्मीर के महाराजा हरी सिंह जी के , राज्याभिषेक के बारे में जितनी बातें मलिका जी ने बयान की है , वाकई , यादगार है जो हमें गुज़रे हुए जमाने के तौर तरीकों से, रूबरू , करवाती दिलचस्प बातें हैं .... पढने लायक है ये उपन्यास के रूप में लिखी हुई आत्मकथा , अपने अंदर , एक गुजरे हुए जमाने के बारे में , बहुत सारा , समेटे हुए ...







