Monday, June 11, 2012

इंग्लैंड की राज परम्परा और साम्राज्ञी एलिजाबेथ

इंग्लैंड की राज परम्परा और साम्राज्ञी एलिजाबेथ
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विश्व - इतिहास , मौन साक्षी बनकर देख रहा था जब सन १९५३ के २ जून का दिन इंग्लैंड के लिए बहुत बड़े बदलाव को लेकर उपस्थित हुआ । इसी ऐतिहासिक दिन , राजकुमारी एलिजाबेथ को, इंग्लैंड की महारानी घोषित कर दिया गया था
इस महत्त्वपूर्ण घटना के पहले सन १९४७ में भारत आज़ाद गणतंत्र बनकर अपना स्वराज्य प्राप्त कर चुका था और महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे द्वारा , दारुण ह्त्या कर देने के पश्चात, स्वतन्त्र भारत में, पुन: स्थिति सामान्य होने लगी थी
ग्रेट ब्रिटन को यूनाईटेड कीन्गडम भी कहते हैं और स्कोत्लैंड, वेल्स एवं इंग्लैंड इन तीनों के भूभाग का संयुक्त भूभाग यु. के. कहलाता है और यह यूरोप भू खंड के उत्तर - पश्चिम भाग में नोर्थ - सी समुद्र से उत्तर दिशा में एवं दक्षिण में ईंगलीश चैनल के जल से घिरा हुआ प्राकृतिक द्वीप खंड है और घनी जन संख्या को स्थान देता १ सशक्त मुल्क है
इंग्लैंड की राजधानी एवं प्रमुख शहर लंदन है । स्कोत्लैंड का प्रमुख शहर एडीनबर्ग है तो वेल्स का मुख्य शहर कार्डीफ है
१ जनवरी सन १८०१ की तारीख आते आते आयरर्लैंड के कुछ हिस्से भी यु. के . में शामिल हुए अब सन १९२७ में यह युनाटेड किंगडम ग्रेट ब्रिटेन और नोर्धंन आयर लैंड का सयुक्त राष्ट्र संघ बना इस देश ने विश्व के लगभग सभी भू - भागों पर शासन किया है और आज का सुपर पावर उत्तर अमरीका कि जिसकी १३ कोलोनी या प्रांत भी ब्रिटीश सता के हाथ में थी । भारत पर भी ग्रेट - ब्रिटेन का साज था । सन १७४० से १७५० के बीच भारत में , फ्रांस की कम्पनी ईस्ट इंडीया कम्पनी फ्रांस और ईस्ट इंडीया कम्पनी ग्रेट ब्रिटेन के बीच भारत पर हुकुमत जमाने की कड़ी स्पर्धा जारी रही । रोबर्ट क्लाईव ने फ्रांस की सेना को प्लासी की और बक्सर की लड़ाई में हरा कर बंगाल में अपना डेरा जमा दिया । पृथ्वी के सुदूर क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया भूखंड के पूर्वी छोर को केप्टन कूक ने , सन १७७० में खोज निकाला और १७८७ में ब्रिटेन ने इसे , उम्र कैद की सजा पाए कैदियों के लिए चुना और कैदीयों को ऑस्ट्रेलिया भेज दिया गया । सन १७०७ में स्थापित हुई ग्रेट ब्रिटेन की पार्लियामेंट राज्य सभा या हाऊस ऑफ़ लोर्ड और लोक सभा माने हाउस ऑफ़ कोमंस से बनती है जहां कयी सभ्य या तो मनोनीत पदों पर आसीन हैं या चुनाव लड़ कर सभ्यता प्राप्त करते हैं ।
ये ग्रेट ब्रिटेन का राष्ट्रीय ध्वज है
लन्दन शहर हरा भरा है . ये एक अतिविशाल और वैभवशाली एवं समृध्ध नगरी है जहां एतिहासिक , सांस्कृतिक व कला के साथ साथ ,कई तरह के उद्योग और व्यापार की कई बड़ी बड़ी इमारतें हैं एक सैलानी के लिए, लन्दन शहर का प्रथम दर्शन , काफी रोमांचकारी अनुभव दे जाता है और उस अनुभव पर आप , कई सारे आध्याय लिख सकते हैं
ब्रिटीश किंगडम , U.K. = इंग्लैंड , वेल्स और स्कोत्लैंड और उत्तर आयरलैंड की मिलीजुली संयुक्त भूमि का हिस्सा है जिसे ११ वीं सदी के बाद , राज परिवार के द्वारा शासित किया जाता रहा है अब साथ साथ पार्लियामेंट भी जनता के ऊपर है और प्रधानमंत्री भी हैं परन्तु ग्रेट ब्रिटेन के राज परिवार का दबदबा और शानो शौकत आज भी वहां पर कयी सदीयों से उसी दबदबे के साथ कायम है वहीं से चली एक व्यापारी सत्ता , ईस्ट इंडीया कंपनी ने, भारत में प्रवेश किया था और मुग़ल सल्तनत के बाद भारत भूमि पर, अपना वर्चस्व स्थापित किया था ये भी भारत एवं ग्रेट ब्रिटेन का मिला जुला इतिहास है
भारत और ग्रेट ब्रिटन इतिहास के पन्नों पर इस प्रकार, एक साथ जुड़ गये थे
महारानी विक्टोरिया के आदेश पर , अंग्रेजों द्वारा चलायी जा रही सरकार - ईस्ट इंडीया कंपनी के हाथों से निकाल कर , महारानी ने स्वयम अपने हाथों में भारत की बागडोर लेकर , भारत की साम्राज्ञी बनने का ऐलान किया । वह एतिहासिक तारीख थी १ जनवरी सन १८७७ ! भारत का शासन ग्रेट ब्रेटन की नजर में ' मस्तिष्क मुकुट का सबसे चमकेला मणि ' या अंगरेजी में कहें तो , ' ज्वेल इन ध क्राउन ' सा था । उस वक्त , भारत भूमि पर भी कयी छोटे - बड़े राज परिवार, अपनी स्वतंत्र सता लिए , अपने राज सिंहासनों पर आसीन थे ट्रावन्कोर राज्य के महाराज ने महारानी विक्टोरिया के लिए, भव्य हाथीदांत से बना हुआ सिंहासन भेंट किया था

उसी पर महारानी विक्टोरिया विराजमान हुईं थीं भारत की महारानी विक्टोरिया ने अपने सेवक अब्दुल करीम से हिन्दुस्तानी सीखने का प्रयास भी किया था प्रस्तुत हैं महारानी के संग्रह से प्राप्त कुछ दुर्लभ चित्र :
अब्दुल करीम

ग्रेट ब्रिटन की आधुनिक काल में सता रूढ़ महारानी ऐलिज़ाबेथ का विवाह राज कुमार फीलीप्स के संग सन १९४७ में हुआ था तब महात्मा गांधी ने अपने हाथों से बुनी हुई खादी के तागों से गुंथी एक अनमोल शोल , जिसके मध्य में कढाई से लिखा हुआ था ' जय - हिंद ' यह गांधी जी के आदेशानुसार बनवा कर , उन्हें विवाह की भेंट स्वरूप उपहार में भेजी थी देखिये चित्र :

महारनी एलिजाबेथ का राज्याभिषेक के अवसर पर लिया हुआ चित्र :
और ये है अब का चित्र
ग्रेट ब्रिटन की महारानी ऐलिज़ाबेथ के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लीक करें
पूरा नाम: ऐलिज़ाबेथ ऐलेक्ज़ान्ड्रा मेरी
जन्म: २१ अप्रेल,१९२६
ज़नम स्थान: १७ ब्रुटोन स्ट्रीट, मे फेर, लँडन यु.क़े.( युनाइटेड किँगडम)
पिता:प्रिँस आल्बर्ट जो बाद मेँ जोर्ज ४ बनकर महारज पद पर आसीन हुए.
माता:एलिजाबेथ -बोज़ लियोन ( डचेस ओफ योर्क - बाद मेँ राजामाता बनीँ )
घर मेँ प्यार का नाम: "लिलीबट "
शिक्षा : उनके महल मेँ ही -
इतिहास के शिक्षक: सी. एह. के मार्टेन - वे इटन कोलेज के प्रवक्ता थे
धार्मिक शिक्षा : आर्चबीशप ओफ केन्टरबरी से पायी
बडे ताऊ : राजा ऐडवर्ड अष्टम ने जब एक सामान्य अमरीकी नागरिक एक विधवा, वोलीस सिम्प्सन से प्रेम विवाह कर लिया तब एडवर्ड अष्टम को इंग्लैण्ड का राजपाट छोडना पडा था तब , ऐलिज़ाबेथ के पिता सत्तारुढ हुए - १३ वर्ष की उम्र मेँ , द्वीतीय विश्व युध्ध के समय मेँ , बी.बी.सी. रेडियो कार्यक्रम " १ घँटा बच्चोँ का" मेँ अन्य बच्चोँ को अपने प्रसारित कार्यक्रम से एलिजाबेथ ने हीम्मत बँधाई थी बर्कशायर, वीँडज़र महल मेँ, युध्ध के दौरान निवास किया था
जहाँ भावि पति , राजमुमार फीलिप से उनकी मुलाकात हुई जो इस मुलाक़ात के बाद , नौसेना सेवा के लिये गए और राजकुमारी उन्हेँ पत्र लिखतीँ रहीँ क्यूँकि उन्हेँ राजकुमार से, प्रेम हो गया था
सन १९४५ मेँ, नंबर २३०८७३ का सैनिक क्रमांक उन्हें मिला था
सन १९४७ मे पिता के साथ दक्षिण अफ्रीका, केप टाउन शहर की यात्रा की और देश भक्ति जताते हुए रेडियो प्रसारण किया २० नवम्बर, १९४७ मेँ ड्यूक ओफ ऐडीनबोरो, जिनका पूरा नाम है कुँवर फीलिप ( डेनमार्क व ग्रीस के ) , इस राजकुंवर से भव्य विवाह समारोह में , नाता स्थापित हुआ
१९४८ मेँ प्रथम सँतान, पुत्र चार्ल्स का जन्म- १९५० मेँ कुमारी ऐन का जन्म -
१९६० मेँ कुमार ऐन्ड्रु जन्मे -
१९६४ मेँ कुमार ऐडवर्ड चौथी और अँतिम सँतान का जन्म हुआ
१९५१ तक "माल्टा " मेँ भी रहीँ जहाँ फीलिप सेना मेँ कार्यरत थे
६ फरवरी,१९५२ वे आफ्रीका के केन्या शहर पहुँचे जहाँ के ट्रीटोप होटेल "ठीका" में वे , नैरोबी शहर से २ घंटे की दूरी पर थे वहाँ उन्हेँ बतलाया गया कि उनके पिता की ( नीँद मेँ ) रात्रि को मृत्यु हो गई है सो, जो राजकुमारी पेडोँ पर बसे होटल पर चढीँ थीँ वे रानी बनकर उतरीँ !!
राज्याभिषेक का अतिशय भव्य समारोह २ जून १९५२ को वेस्ट मीनीस्टर ऐबी मेँ सम्पन्न हुआ
जब वे धार्मिक रीति रिवाज से ब्रिटन की महारानी के पद पर आसीन हुईं
विश्व का सबसे बड़ा हीरा " कुलियन " है जो ५३० केरेट वजन का है और महारानी एलिजाबेथ के स्केप्टर में लगा हुआ है और भारत से इंग्लैंड पहुंचा कोहीनूर हीरा विश्व का सबसे विशाल हीरा है जिसे एलिजाबेथ की माता ने अपने मुकुट में जड्वाकर पहना था
कोहीनूर की चमक दमक आज भी वैसी ही बकरार है जैसी सदियों पहले थी
सन २०१२ , का जून माह है और इंग्लैंड के राज सिंहासन पर महारानी एलिजाबेथ आज भी शान से विराजमान हैं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने महारानी के पद पर रहते हुए 6 फरवरी 2012 को 60 वर्ष पूरे किए हैं
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ताजपोशी के हीरक जयंती समारोह के अवसर पर कराए गए एक जनमत सर्वेक्षण में उन्हें देश की महानतम रानी चुना गया है। इस मामले में उन्होंने महारानी विक्टोरिया को भी पीछे छोड़ दिया।
परंतु आज उनका परिवार कई बदलावों से गुजर चुका है और ना सिर्फ इंग्लैंड में बल्कि संसार भर में अब कई नयी प्रमुख व्यक्तियों के नाम मशहूर हो चुके हैं जैसे बील गेट्स ! जो आज संसार के सबसे धनवान व्यक्ति कहलाते हैं !
संसार चक्र , अपने नये दौर से गुजर रहा है । भारत में आज अम्बानी परिवार के वैभव के किस्से सुर्ख़ियों में हैं और विश्व के कयी पहले समृध्ध खे जानेवाले देशों में जैसे ग्रीस आज आर्थिक मंदी के बादल मंडराने लगे हैं । भविष्य के भारत के उत्थान के लिए एवं विश्व के हरेक दलित व गरीब इंसान के लिए सद्भावनाएं लेकर आओ कहें ....
जयहिंद !!
- लावण्या दीपक शाह
Lavnis@gmail.com
- लावण्या

Monday, June 4, 2012

वेदों से , तथ्य व् सत्य के मोती – लावण्या दीपक शाह

वेदों से , तथ्य व् सत्य के मोती – लावण्या दीपक शाह


विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद है । अथर्व वेद , साम वेद व यजुर्वेद ऋग्वेद के बाद प्रकाश में आये । अथर्व वेद के प्रणेता ऋषि अथर्ववान हैं अथर्व वेद में प्रयुक्त कयी सूक्त ऋग्वेद में भी सम्मिलित हैं ऋषि अथर्ववान ने ‘ अग्नि या अथर्व ‘ पूजन की विधि इन सूक्तों में बतलायी हैं पिप्पलाद ऋषि व शौनक ऋषि ने अथर्व वेद में सूक्त लिखे हैं शौनक ऋषि से पिप्पलाद ऋषि की शाखा अधिक प्राचीन हैं ९ शाखाएं जो पिप्पलाद ऋषि द्वारा प्रणत हुईं हैं उन में से २ आधुनिक समय तक आते हुए अप्राप्य हो चुकीं हैं पिप्पलाद ऋषि के तथ्यों को आधार बनाकर उन पर , आगे पाणिनी व पतंजलि ने भाष्य पर लिखा भाष्य ‘ ब्रह्मविद्या ‘ का ज्ञान समझाते हैं और यही भाष्य , आगे चलकर ‘ वेदान्त ‘ की पूर्व पीठिका बने भारतीय सनातन धर्म प्रणाली के यह तथ्य एवं सत्य , संस्कृति , भाषा एवं धर्म के प्रथम आध्याय हैं योगाचार्य पतंजलि ने २१ शाखाओं का निर्देश दिया है इन शाखाओं में निर्देशित कुछ नाम इस प्रकार हैं —

) शाकालाका संहिता २ ) आश्वलायन संहिता , कप्पझला सूक्त , लक्ष्मी सूक्त , पवमान सूक्त , हिरण्य सूक्त, मेधा सूक्त, मनसा सूक्त इत्यादी

जिन्हें आचार्य आश्वालयन, महीदास , तथा पातंजली ने प्रतिपादीत किया ।

विवेक चूडामणि शंकराचार्य विरचित ग्रन्थ आगे चलकर , पातंजलि योगसूत्र से प्रभावित होकर उन्हीं का ज्ञान लिए रचे गये हैं ।

पातंजलि ने योगसूत्र , जिस में अष्टांग योग, क्रिया योग द्वारा चित्त वृत्ति , प्रत्यय संस्कार वासना , आशय , निरोध, परिणाम , गुण व प्र्तिपश्व का व्यक्ति के जीवन से सम्बन्ध किस तरह हैं उस तथ्य की विशद व्याख्या की । जगदगुरु शंकराचार्य का मत है कि ‘ अद्वैतवाद ‘ ब्रह्म का पूर्ण सत्य स्वरूप है ।

कठोपनिषद : संसार का परम सत्य है , जीव की मृत्यु ! योग पध्धति द्वारा मृत्यु पर विजय की कथा कठोपनिशद की विषय वस्तु है कथानक है कि योगाभ्यास में रत एक बालक , शरीर छोड़ कर , मृत्यु के अधिदेव , यमराज के पास यमलोक पहुँच जाता है और स्वयं यमराज से ‘ मृत्यु ‘ के संबंध में शिक्षा व ज्ञान प्राप्त करता है और ३ दिवस पश्चात, छोड़े हुए शरीर में , पुन: लौट आता है और जीवित हो जाता है !

महर्षि वेद व्यास ने ‘ योग भाष्य ‘ दीये जिस के टीकाकार ‘ वाचस्पति ‘ हुए ।

साँख्य – योग , द्वैत वाद भी योगाभ्यास के अंश हैं ।

३०० वर्ष , ईसा पूर्व की शताब्दी में चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में मौर्य वंश के सृजक चतुर , मंत्री पद पर आसीन चाणक्य या कौटिल्य ने अपने ग्रन्थ ” अर्थशास्त्र ” में , सांख्य योग और योगाभ्यास पर अपने विचार लिखे हैं और उनके महत्त्व पर भार दिया है । महाभारत कालीन विदुरनीति नामक ग्रन्थ जो विदुर जी ने लिखा है वह ‘ अर्थशास्त्र ‘ की भांति वेदाभ्यास व अन्य विषयों पर ज्ञान पूर्ण माहिती देता है ।

मांडूक्य उपनिषद : १२ मन्त्र समस्त उपनेषदीय ज्ञान को समेटे हैं जाग्रत , स्वप्न एवं सुषुप्त मनुष्य अवस्था हर प्राणी का सत्य है और इस सत्य के साथ ही निर्गुण पर ब्रह्म व अद्वैतवाद भी जुडा हुआ है ऊंकार ही हर साधना , तप एवं ध्यान का मूल मन्त्र है यह मांडूक्य उपनिषद की शिक्षा है

अथर्ववेद : ‘ गणपति उपनिषद ‘ का समावेश अथर्व वेद में किया गया है अंतगोत्वा यही सत्य पर ले चलते हुए कहा गया है कि, ईश्वर समस्त ब्रह्मांड का लय स्थान है ईश्वर सच्चिदान्द घन स्वरूप हैं , अनंत हैं, परम आनंद स्वरूप हैं

ब्रह्मसूत्र : इस में १०८ उपनिषदों के नाम एवं उन में निहित ज्ञान का समावेश है काली सनातन उपनिषद में नारद जी ब्रह्मा से प्रश्न करते हैं कि, ‘ द्वापर युग से आगे कलियुग में, संसार सागर किस आधार पर पार कर सकते हैं ? “

तब ब्रह्माजी उत्तर देते हैं कि, ” मूल मन्त्र , महामंत्र का जाप करने से ही कलियुग में संसार सागर पार होगा – और वह मूल मन्त्र है ,

“ हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे

हरे कृष्ण हरे कृष्ण , कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।

ईश्वर के नाम का १६ बार उच्चारण करने से जीव के अहम भाव के १६ आवरणों का छेदन सूर्य की १६ प्रकार की विविध कला रूपी किरणों से आच्छादित जीव को कलियुग के दूषित प्रभाव से मुक्ति प्राप्त होती है । परिणाम रूप स्वरूप ज्ञान का तिमिराकाश छंट कर पर ब्रह्मरूपी सर्व प्रकाशित स्वयम्भू प्रकाश मात्र शेष रहता है । हरि ऊं तत्सत ।

सीता उपनिषद : सीता नाम प्रणव नाद , ऊंकार स्वरूप है परा प्रकृति एवं महामाया भी वहीं हैं ” सी ” – परम सत्य से प्रवाहित हुआ है ” ता ” वाचा की अधिष्ठात्री वाग्देवी स्वयम हैं उन्हीं से समस्त ” वेद ‘ प्रवाहित हुए हैं सीता पति ” राम ” मुक्ति दाता , मुक्ति धाम , परम प्रकाश श्री राम से समस्त ब्रह्मांड , संसार तथा सृष्टि उत्पन्न हुए हैं जिन्हें ईश्वर की शक्ति ‘ सीता ‘ धारण करतीं हैं कारण वे हीं ऊं कार में निहित प्रणव नाद शक्ति हैं I श्री रूप में, सीता जी पवित्रता का पर्याय हैं सीता जी भूमि रूप भूमात्म्जा भी हैं सूर्य , अग्नि एवं चंद्रमा का प्रकाश सीता जी का ‘ नील स्वरूप ‘ है चंद्रमा की किरणें विध विध औषधियों को , वनस्पति में निहित रोग प्रतिकारक गुण प्रदान करतीं हैं यह चन्द्र किरणें अमृतदायिनी सीता शक्ति का प्राण दायक , स्वाथ्य वर्धक प्रसाद है वे ही हर औषधि की प्राण तत्त्व हैं सूर्य की प्रचंड शक्ति द्वारा सीता जी ही काल का निर्माण एवं ह्रास करतीं हैं सूर्य द्वारा निर्धारित समय भी वही हैं अत: वे काल धात्री हैं पद्मनाभ, महा विष्णु, क्षीर सागर के शेषशायी श्रीमन्न नारायण के वक्ष स्थल पर ‘ श्री वत्स ‘ रूपी सीता जी विद्यमान हैं काम धेनू एवं स्यमन्तक मणि भी सीता जी हैं

वेद पाठी , अग्नि होत्री द्विज वर्ग के कर्म कांडों के जितने संस्कार, विधि पूजन या हवन हैं उनकी शक्ति भी सीता जी हैं । सीता जी के समक्ष स्वर्ग की अप्सराएं जया , उर्वशी , रम्भा , मेनका नृत्य करतीं हैं एवं नारद ऋषि व् तुम्बरू वीणा वादन कर विविध वाध्य बजाते हैं चन्द्र देव छत्र धरते हैं और स्वाहा व् स्वधा चंवर ढलतीं हैं ।

रत्न खचित दिव्य सिंहासन पर श्री सीता देवी आसीन हैं । उनके नेत्रों से करूणा व् वात्सल्य भाव प्रवाहमान है । जिसे देखकर समस्त देवता गण प्रमुदित हैं । ऐसी सुशोभित एवं देव पूजित श्री सीता देवी ‘ सीता उपनिषद ‘ का रहस्य हैं । वे कालातीत एवं काल के परे हैं ।

यजुर्वेद ने ‘ ऊं कार ‘ , प्रणव – नाद की व्याख्या में कहा है कि ‘ ऊं कार , भूत भविष्य तथा वर्तमान तीनों का स्वरूप है । एवं तत्त्व , मन्त्र, वर्ण , देवता , छन्दस ऋक , काल, शक्ति, व् सृष्टि भी है ।

सीता पति श्री राम का रहस्य मय मूल मन्त्र ” ऊं ह्रीम श्रीम क्लीम एम् राम है । रामचंद्र एवं रामभद्र श्री राम के उपाधि नाम हैं । ‘ श्री रामं शरणम मम ‘

श्रीराम भरताग्रज हैं । वे सीता पति हैं । सीता वल्लभ हैं । उनका तारक महा मन्त्र ” ऊं नमो भगवते श्री रामाय नम: ” है । जन जन के ह्दय में स्थित पवित्र भाव श्री राम है जो , अदभुत है ।

” ॐ नमो भगवते श्री नारायणाय “

” ऊं नमो भगवते वासुदेवाय “

ये सारे मन्त्र , अथर्व वेद में श्री राम रहस्य के अंतर्गत लिखे हुए हैं ।

– लावण्या दीपक शाह

Monday, May 21, 2012

ब्लोगिंग / कुछ हिंदी महिला ब्लॉगर्स Q. & A.

    विकास ज़ुत्शी भारतीय जन संचार संस्थान -- 9871485270

2010/3/14 Vikas Zutshi <vikaszutshisn@rediffmail.com>
see the attachment
one more thing,

क्या आप अपने विदेश में रहने के अनुभव को ब्लॉगिंग के साथ जो़ड़ सकती हैं ?
और ये सभी सवाल मेरे एक assingment का हिस्सा है । जो मैंने चुना था ।विषय है हिंदीं ब्लॉगिंग और महिलाएँ ।
(as iam doing post graduation in hindi journalism.)

भाई श्री विकास ज़ुत्शी जी ने प्रश्न पूछे थे उनके उत्तर व संदर्भ :
विकास जी , नमस्ते
मेरे विदेश में रहने के कारण ही मेरा, ( एक तरीके से देखा जाए तो ) " हिन्दी - ब्लोगिंग " की ओर रुझान हुआ भारत से दूर रहते हुए भी, न सिर्फ भारत से ब्लोगींग करनेवाले व्यक्तियों के अनुभव, उनके परिवेश व जिस शहर, कसबे या ग्राम में वे आबाद हैं वहां की सच्ची और खरी बातें जान पाने का ब्लॉग -- एकदम बढ़िया विकल्प है ... बनिस्बत , समाचार पत्र व मीडीया के ! ये सत्य मैं जान पायी हूँ और ऐसा मेरा निष्कर्ष एक लम्बे अनुभव के बाद हुआ है उसीने मुझे प्रेरित किया - के मैं भी ब्लॉग लेखन करूं हिन्दी ब्लॉग जगत से जुड़ने का विचार, वहीं से आया .. हिन्दी से जुड़े रहना भी इसी का अंश है . अपने लोगों से जुड़े रहना, अपनी मूल प्रकृति के समीप रहना ये ब्लॉग दुनिया से जुड़ कर ही संभव हो पाया है.
मेरी अपनी बात कहूं तो, मैंने , मुम्बई जैसे महानगर में जन्म लिया और वहीं पर मेरे जीवन का एक दीर्घ कालखंड बिता है . भारत के ग्राम्य जीवन की एक छवि मन में बसी हुई है पर ग्राम्य जीवन को, न ही करीब से कभी देखने का अवसर ही आया और नाही कोइ ग्राम्य जीवन से जुडा अनुभव ही हुआ ! हिन्दी ब्लोगर्स , जो कई सारे भारत के विभिन्न ग्राम प्रांत के बारे में लिखते हैं वो मुझे , मानो , मेरे सामने , एक नयी खिड़की खोलते से नज़र आते हैं ! जब् भी मैं, दक्षिण भारत के प्राचीन और भव्य मंदिरों के बारे में पढ़ती हूँ , ( जिन्हें न जाने कब देखूंगी ) तब, मन में एक उल्लास उभरता है और असीम प्रसन्नता होती है उनके बारे में यात्रा विवरण पढ़कर परदेस में बैठे हुए मैं तीर्थ यात्रा कर लेती हूँ मुझे ऐसा महसूस होता है ! दूसरी ओर , छतीसगढ़ के कई गाँवों में आदीवासी जन के कष्टों के बारे में पढ़कर बहोत दुःख होता है और सोचती हूँ, सरकार या समाज कोइ , मदद क्यूं नहीं करता ? ऐसा क्यूं है ? :-( कुछ संस्थाएं हैं पर बदलाव यों नहीं दीखलाई देते ? क्या कारण है जो पिछड़े और दुर्बल तबक्के में पिस रहे लोगों को आज भी इतने कष्ट हैं ? और ये दुखद और कठोर सत्य से ब्लॉग के जरिए ही साक्षात्कार हुआ है . ब्लॉग व्यक्ति की अपनी आवाज़ है , देशकाल से परे , किसी भी दबाव के बिना , हर ब्लोगर, अपने दिल की हर बात, दुनिया के कोने कोने तक पहुंचा सकता है - व्यक्ति स्वातंत्र्य का यह एक उत्तम साधन है - ऐसे ही , कारणों से ब्लॉग की विस्तृत होती दुनिया से मुझे , लगाव हुआ और अपनी बात कहने का, दूसरों की प्रतिक्रया जानने का अवसर भी इसी से मिला - अब आपके प्रश्नों के उत्तर दे रही हूँ !
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Q. ब्लॉग बनाने का विचार क्यों और कैसे आया ? और अबतक के अपने अनुभव पर क्या कहेंगी ?
A. ' एक दिन , गुगल की ब्लॉग सेवा के बारे में पढ़ते हुए, सारे निर्देश , पढ़ कर ब्लॉग बनाते हुए, मैंने अपना प्रथम ब्लॉग " अंतर्मन " बना लिया था - उसे , अंग्रेज़ी में लिखना आरम्भ किया - उन शुरुआती दिनों में , मैं, ब्लॉग - लेखन कला , सीख ही रही थी देखिये -- ये थी मेरी प्रथम प्रविष्टी ---

TUESDAY, SEPTEMBER 19, 2006

antarman .......from : लावण्या

My Photo
LAVANYA SHAH

In the Infinite space & Time...I'm but a petal of a flower, a drop in the Ocean. SONGS are those ANGEL's sound that Unite US with the Divine.

कई चित्र मूलतः मेरे नहीं है, मुझे इस के मूल चित्रकार के बारे में ज्ञात नहीं है, यदि आप इसके मूल चित्रकार हैं तो अपने बारे में बताएं, मैं स्त्रोत के रुप में आपका उल्लेख कर दूँगी यदि आपको इस लेख के प्रकाशन पर आपत्ति है तो कृपया प्रमाण सहित बताइए मैं इस को हटा दूँगी

(Rest of my Text + all material is copy righted under USA laws )

VIEW MY COMPLETE PROFILE


Hello World,
Feels good to be somewhere in between the world of dreams and reality which is the Cyber space !
Democracy, individualism , a passion for achievements of the finest that is within us is self evident within the diapheonous spheres of existance here like a surrelists dream . The WWW is alive with billion human thoughts and mine is a petal of a flower , a drop within the infinite Ocean of TIME ! So, here I'm , leaving my foot print on the sands of time........for all Eternity !

POSTED BY लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` AT 8:52 PM

फिर, ये पता लगा के इसी नाम का और कोइ ब्लॉग है ! तब मैंने " लावण्यम ~ अंतर्मन " के संशोधित नाम से अपना दूसरा , नया ब्लॉग आरम्भ किया और वहां पर , हिन्दी में लिखना जारी रखा - " लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`" मेरी, आपकी, अन्य की बात और जी हां , ब्लॉग सम्बंधित - मेरे सारे अनुभव बढ़िया रहे हैं -- http://www.lavanyashah.com/
Q. बात अगर हिंदी महिला ब्लॉगिंग की करें तो ये देखा जाता है कि अधिकतर महिलाएँ सिर्फ़ साहित्य लेखन को ही अपना विषय चुनती हैं (कविताएँ आदि) , वहाँ वेराइटी की कमी देखी जाती है, ऐसा क्यों?
A. आशा है आप आपके संशोधन विषय को लेकर, मेरे दोनों ब्लोग्स , पढने का कष्ट उठायेंगें :)
तब आप की ये शिकायत कमसकम , मेरे बारे में तो नहीं रहेगी . ये विश्वास है . मैं, कई विषयों पर लिखती रही हूँ -- उदाहरणार्थ : - यात्रा, समाज, धर्म, मॉडर्न कहानी, ज़िँदगी ख्वाब है ...!!
चेप्टर ~ १ से लेकर ...ज़िँदगी ख्वाब है..चेप्टर -- - १० -- कथा का - अँत..



( जिसमे परदेस में बसे भारतीय की छवि है ) अनुभव हैं
कई मुद्दों पर मैंने , यहां उत्तर अमरीका को करीब से देखने के बाद , जितना मैं समझी हूँ , उस के आधार पर लिखा है -- जैसे ये प्रविष्टियाँ देखिएगा . यहां सिर्फ ३ उदाहरण के तौर पर दे रही हूँ . ( समय मिले तब दूसरी कई सारी प्रविष्टी भी अवश्य जांचियेगा ) और भी कई महिलाएं , कई विविध विषयों पे लिखतीं हैं ....
उनपर भी रीसर्च हो ! ...
ये देखिये विवेक जी,
१ )
५* तापमान कैसा होगा ? देखना चाहेंगें ?

२ ) बफेलो ट्रेस :

३ )
पेरेडोक्स (paradox) है अमरीका..

Q. क्या ब्लॉग सामाजिक चेतना, जागरुकता फैलाने में सहायक हो पा रहा है ?
A. हां . लोग दूर देस में रहने वाले दूर बसनेवाले लोगों के दुःख दर्द, उनके सपने, उनकी आशाएं , निराशाएं
उनकी सच्चाई और जीवन के यथार्थ से परिचित होकर ये समझ पाते हैं के वहां भी लोगों को कई सारी विषमताओं से संघर्ष करना पड़ रहा है . इस तरह एक अपनापन , ब्लॉग से उपज रहा है - ब्लोगर्स, आपस में मिलते भी हैं और कई नये दोस्त भी बने हैं . ये सारा एक सफलता का द्रश्य ही तो है ! चेतना तो फ़ैली है ..जब् चेतना रूपांतरित होकर ठोस कर्म बनेगी तब , सामाजिक सफलताएं भी सामने आ पाएंगीं . भला बुरा , हर समाज में और हर व्यक्ति के अन्दर विद्यमान है आप कौन स मार्ग चुन कर आगे बढ़ते हैं वह सर्वथा , आप पे निर्भर है .
Q. इंटरनेट पर आज फ़ेसबुक,ट्विटर और अब बज़ के आने से ब्लॉग अपनी उपयोगिता कब तक बनाए रख पाएगा ?
A. सभी कम्युनीकेशन के विभिन्न औजार हैं .
इन सभी की उपयोगिता , व्यक्ति की मौलिक , पसंद से निर्धारित होगी . रेडियो, टीवी, सिनेमा, फ़ेसबुक,ट्विट, बज़ सभी जारी रहेंगें और लोगों को जोड़ने का काम करेंगें आगे भी और नयी खोज होंगीं . नये तरीके ईजाद होंगें .
Q. अबतक के महिला ब्लॉगर्स के सफ़र को देखकर क्या कहेंगी ?
A. बढ़िया !! शानदार !!
Q. अन्य स्थानों की तरह यहाँ भी ( हिंदी ब्लॉग पर) पुरुषों की संख्या, महिलाओं से काफ़ी अधिक है . जबकी अंग्रेज़ी ब्लॉग इससे बेहतर तस्वीर पेश करता है ,इसके पीछे क्या कारण मानती हैं ?
A. अजी , महिलाओं को घर, परिवार, चूल्हा , चौका , बच्चों की परवरिश , नौकरी , सामाजिक पर्व , उत्सव , अनुष्ठान जैसे अनगिनत कार्य करने होते हैं . हिन्दी ब्लोगिंग इस मायने में समाज का दर्पण है . अंग्रेजींदा महिला ब्लोगर्स अगर ज्यादा हैं ये भी खुशी की बात है . आशा करती हूँ के हिन्दी महिला ब्लोगर्स भी अपनी उपस्थिति, भविष्य में, ज्यादह संख्या में दर्ज करवायेंगी .
Q. ऐसे कुछ हिंदी महिला ब्लॉगर्स के नाम बता सकती हैं ,जो साहित्य लेखन से इतर भी लिखतीं हों ?
:) लगता है आपका रीसर्च पेपर, मैं ही तैयार कर रही हूँ विकास जी :-)
तब क्या मुझे भी १०० / १०० अंक मिलेंगें ?
संगीता पुरी जी गत्यात्मक ज्योतिष पर लिखतीं हैं . ममता जी , यात्रा विवरण बढ़िया लिखतीं हैं !! वे पहले गोवा रहतीं थीं , अब अरुणाचल से लिख रहीं हैं.

mamta


अदा जी बहुत बढ़िया गायिका हैं

अदा'

About में : http://www.shails.com/manjusha/index.htm

रश्मि रविजा


अल्पना वर्मा

रंजना सिंह


डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर

  • Location: India
  • ब्लोग्स : संगीत सम्बंधित ब्लोग्स :


    वीणापाणी
    http://aarohijivantarang.blogspot.com/

    और भी कई महिला ब्लोगर्स हैं जो विविध विषयों पे लिख रहीं हैं --

    Q. ब्लॉगिंग को आने वाले समय में किस रुप में देखती हैं ?

















    A. आगे भी लोग अपने मन की बातें शेर करते रहेंगें और व्यति स्वातंत्र्य और अपने अनुभव को अभिव्यक्ति करने से जुड़े रहेंगें येही अनुमान है

    Q. विदेशों में महिलाऔं और उनसे संबंधित मुद्दों को मुख्यधारा के मीडिया ने जब शामिल करना लगभग बंद कर दिया तो महिला ब्लॉगर्स ने मुखर होकर ब्लॉग का जमकर इस्तेमाल किया । क्या हमारे यहाँ ऐसा संभव ?
A. हां ...नेपोलियन ने कहा था न , " कोइ बात असंभव नहीं अगर कोइ ठान ले तो "
Q . ब्लॉग पर देखा जाता है कि ज़्यादातर टिप्पणियाँ जानने वालों की ही होती हैं, कहीं न कहीं ये ब्लॉग की कम लोकप्रियता, पहुँच में कमी को नहीं दर्शाता है ?
A. कई पढ़ते तो अवश्य हैं किन्तु , टिप्पणी करने से कतराते हैं , किसी को आप फ़ोर्स तो नहीं न कर सकते जिसकी जैसी इच्छा ! अगर ब्लोगिंग करनी है तब , आप प्रामाणिकता से लिखिए.महज टिप्पणी का होना या न होना, आपकी प्रतिभा अभिव्यक्ति या आपके मन की बात उजागर करने का इनाम न मान लें . हां , सकारात्मक सोच रखें और अच्छी बातें लिखें , जो कहीं न कहीं , किसी दिशा को आलोकित अवश्य करेंगीं ..
" अपना जितना काम, आप ही जो कोइ कर लेगा,
पाकर उतनी मुक्ति आप वह औरों को भी देगा ...
एक दीप सौ दीप जलाए मिट जाए अंधियारा "
( ये पंक्तिया परम आदरणीय , राष्ट्रकवि दददा मैथिली शरण गुप्त जी ने लिखीं थीं एक हस्ताक्षर देते समय, जो मेरी बड़ी बहन स्वर्गीय वासवी मोदी की एक पुस्तक में हैं . परंतु, .कहीं छपी नहीं हैं )
Q. ब्लॉग पर किसी तरह के watchdog होने पर क्या कहेंगी ?
A. अगर किसी को ये काम पसंद है तब वह, यही करे. जैसे हर समाज में खुफिया विभाग भी होता ही है क्या पाया , क्या खोया ये आनेवाला " समय " ही तय करेगा . मैं स्वयं, व्यक्ति स्वातंत्र की हिमायती हूँ और साथ साथ, व्यक्ति की शालीनता और गरिमा भी कायम रहे आपके लेखन से किसी के मन को चोट न पहुंचे इस बात का ध्यान रखा जाए आप दूसरों से वही व्यवहार कीजिये जैसा आप खुद के साथ बर्ताव होना पसंद करते हैं . " Do unto others that YOU want , others to do to you " ( as the Bible says )
Q. अगर और कोई जानकारी देना चाहें, जो इन सवालों में रह गई हों तो अच्छा लगेगा
A. मैंने अपना प्रयास किया है आप के मन में कोइ प्रश्न बाकी हों तब फिर पूछ लीजिएगा . अभी इतना ही अब आज्ञा लेती हूँ -- मेरी बात सुनने का शुक्रिया !

स स्नेह,
- लावण्या